“दो करोड़ की ‘काली खेती’ का पर्दाफाश: आमाघाट के खेतों में पनप रहा था जहर का कारोबार”

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़ जिले के तमनार थाना क्षेत्र के ग्राम आमाघाट में सामने आई अवैध अफीम की खेती ने न केवल कानून-व्यवस्था को चुनौती दी है, बल्कि यह भी उजागर कर दिया है कि किस तरह संगठित रूप से ग्रामीण अंचलों को मादक पदार्थों के नेटवर्क का अड्डा बनाया जा रहा है। करीब दो करोड़ रुपये से अधिक के इस अवैध कारोबार का खुलासा पुलिस की सटीक सूचना और त्वरित कार्रवाई का परिणाम है।
19-20 मार्च की दरम्यानी रात मिली मुखबिर सूचना ने पूरे मामले की परतें खोल दीं। सूचना थी कि खर्राघाट भैर नाला किनारे स्थित जमीन पर बड़े पैमाने पर अफीम की खेती की जा रही है। इसके बाद तमनार पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) और अन्य थानों की टीमों के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए मौके पर दबिश दी।
जब पुलिस टीम खेतों तक पहुंची, तो वहां का दृश्य चौंकाने वाला था। दूर-दूर तक फैली जमीन पर अफीम के पौधे लहलहा रहे थे—जिनकी संख्या 60,326 आंकी गई और कुल वजन 2,877 किलोग्राम निकला। यही नहीं, मौके से तैयार अफीम भी बरामद की गई, जिसका वजन 3.02 किलोग्राम पाया गया। कुल मिलाकर जब्त मादक पदार्थों का बाजार मूल्य करीब 2 करोड़ 5 लाख 10 हजार रुपये आंका गया—जो इस बात का संकेत है कि यह कोई छोटा-मोटा प्रयोग नहीं, बल्कि सुनियोजित अवैध कारोबार था।
कार्रवाई के दौरान एक आरोपी, मार्शल संगा (निवासी खूंटी, झारखंड), को मौके से गिरफ्तार किया गया, जबकि उसके दो साथी इमानवेल भेंगरा और सीप्रियन भेंगरा अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वे बिना किसी वैध अनुमति के इस खेती में लगे हुए थे और बाहरी सहयोग से इस नेटवर्क को संचालित कर रहे थे।
जांच के दौरान राजस्व विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि जिस जमीन पर यह खेती की जा रही थी, वह पांच अलग-अलग खसरों में दर्ज है, जिससे यह संकेत मिलता है कि भूमि के उपयोग और निगरानी में कहीं न कहीं गंभीर चूक हुई है।
इस पूरे घटनाक्रम पर एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कहा है कि जिले में “ऑपरेशन आघात” के तहत मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और इस तरह के अवैध कारोबार में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
यह मामला सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है—कि किस तरह गांवों की शांत जमीनों को नशे के अड्डों में बदला जा रहा है। दो करोड़ से अधिक की यह ‘काली खेती’ न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि समाज के भविष्य पर भी गहरा खतरा बनकर उभर रही है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस की यह कार्रवाई आगे कितने बड़े नेटवर्क का खुलासा करती है, और क्या इस जहर की जड़ तक पहुंचा जा सकेगा या नहीं।
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