“खेती बचाओ, जमीन नहीं देंगे” – एयरपोर्ट के लिए अधिग्रहण के खिलाफ रायगढ़ के किसानों की हुंकार

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़। प्रस्तावित एयरपोर्ट निर्माण को लेकर जिले के कई गांवों में किसानों की बेचैनी अब खुलकर सामने आने लगी है। जमीन अधिग्रहण की चर्चा तेज होते ही प्रभावित गांवों के किसानों ने विरोध का स्वर बुलंद कर दिया है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ किसान सभा रायगढ़ के बैनर तले ग्राम जकेला में आसपास के गांवों के किसानों की एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए और एयरपोर्ट के लिए जमीन लेने की योजना का पुरजोर विरोध किया।
बैठक में ग्राम औरदा, कोड़ातराई और बेलपाली के किसानों ने खुलकर अपनी बात रखी। किसानों का कहना था कि जिस जमीन पर पीढ़ियों से वे खेती करते आ रहे हैं, वही उनकी आजीविका का आधार है। ऐसी स्थिति में यदि विकास के नाम पर उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण किया गया तो हजारों लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
किसानों ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर पहले से ही हवाई अड्डा मौजूद है और उससे लोगों की जरूरतें पूरी हो रही हैं, तो फिर नई जगह पर एयरपोर्ट बनाने के लिए किसानों की जमीन क्यों ली जा रही है। उनका कहना था कि विकास जरूरी है, लेकिन ऐसा विकास नहीं होना चाहिए जिससे ग्रामीणों का जीवन ही उजड़ जाए।
बैठक के दौरान कई किसानों ने भावुक होते हुए कहा कि उनके पास खेती के अलावा आय का कोई दूसरा साधन नहीं है। जमीन ही उनके परिवार का सहारा है। यदि वह भी चली गई तो आने वाले समय में उनके बच्चों और परिवारों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। इसलिए किसान किसी भी स्थिति में अपनी जमीन देने को तैयार नहीं हैं।
बैठक में यह भी तय किया गया कि यदि जिला प्रशासन या सरकार द्वारा जबरन जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाती है तो किसान आंदोलन का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे। जरूरत पड़ी तो सड़क पर उतरकर व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
किसानों ने प्रशासन और सरकार से अपील करते हुए कहा कि विकास योजनाएं बनाते समय किसानों की भावनाओं और उनकी आजीविका को भी ध्यान में रखा जाए। उन्होंने साफ कहा कि बिना किसानों की सहमति के यदि जमीन लेने की कोशिश की गई तो पूरे क्षेत्र में बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है।
बैठक के अंत में किसानों ने एकजुटता दिखाते हुए यह संकल्प लिया कि अपनी जमीन और खेती को बचाने के लिए वे मिलकर संघर्ष करेंगे। किसानों का कहना है कि यदि उनकी आवाज अनसुनी की गई तो आने वाले दिनों में यह विरोध और तेज हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन और सरकार की होगी।
Journalist Amardeep chauhan
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