गेजामुड़ा में मुआवजा विवाद: किसान एसडीएम-सीएसपी की समझाइश को ठुकराकर खड़े

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़, 15 मार्च 2026: अडाणी पावर की कोयला परिवहन रेल लाइन के लिए गेजामुड़ा गांव में मुआवजा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। गेजामुड़ा के करीब आठ परिवारों ने जमीन देने से साफ इनकार कर दिया है और पुरानी दर पर मुआवजा न लेने की दृढ़ता दिखाई है।
कृषि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में कई साल बीत चुके हैं। उद्योग विभाग ने 2023 में इस परियोजना की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की थी। तब पूर्व की गाइडलाइन दरें काफी कम थीं। अधिकांश प्रभावित किसानों ने पुरानी दरों के अनुसार मुआवजा ले लिया था। लेकिन हाल ही में छत्तीसगढ़ सरकार ने मुआवजा दरों में कई गुना बढ़ोतरी कर दी है।
नई गाइडलाइन बनाम पुरानी दरें
2019-20 की गाइडलाइन के अनुसार, गेजामुड़ा में मेन रोड किनारे भूमि के लिए 12.06 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर, अंदर की सिंचित भूमि के लिए 10.29 लाख और असिंचित भूमि के लिए 6.32 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तय थे। वहीं नई गाइडलाइन में मेन रोड किनारे भूमि का मुआवजा 57 लाख और अंदर की भूमि का 40 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित किया गया है। 500 वर्ग मीटर तक के भूमि हिस्से के लिए प्रति वर्ग मीटर 483 रुपये और 20 मीटर से आगे 315 रुपये का नया निर्धारण किया गया है।
किसानों का मोर्चा
गेजामुड़ा के ज्यादातर किसान पहले ही पुरानी दर पर मुआवजा ले चुके हैं। वहीं आठ परिवार ऐसे हैं जिन्होंने नई दरों के मुताबिक मुआवजे की मांग को लेकर मोर्चा खोल रखा है। एसडीएम, सीएसपी और स्थानीय अधिकारी समझाने के लिए मौके पर पहुंचे, लेकिन किसान उनकी बात सुनने को तैयार नहीं हुए। पुलिस ने काम में बाधा डालने पर कार्रवाई की चेतावनी दी, तो किसान गिरफ्तारी देने तक को तैयार हो गए।
कंपनी के प्रतिनिधि जब भी रेल लाइन का काम शुरू करने पहुंचे, किसान तुरंत धरने पर बैठ जाते हैं और काम रोक देते हैं।
प्रशासन और कंपनी की दुविधा
अधिग्रहण के समय किसानों ने विरोध नहीं किया, इसलिए अब अवार्ड पारित होने के बाद कागजों में बदलाव संभव नहीं है। अगर कंपनी गेजामुड़ा के कुछ किसानों को नई दर के अनुसार मुआवजा देती है, तो अन्य प्रभावित गांवों में भी समान मांग उठ जाएगी। प्रशासन को इस स्थिति में संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण लग रहा है, क्योंकि अन्य जगहों पर समान दर लागू न करने पर स्थिति अराजक हो सकती है।
गेजामुड़ा के किसान अपनी भूमि के अधिकार और मुआवजे की सही दर के लिए दृढ़ हैं। यह मामला सिर्फ औद्योगिक परियोजना और भूमि अधिग्रहण का नहीं, बल्कि स्थानीय किसान समुदाय की जमीन और न्याय के प्रति जागरूकता का भी प्रतीक बन गया है। प्रशासन और कंपनी के लिए यह संदेश साफ है: बिना संवाद और संतुलन के मामला विवाद का रूप ले सकता है।