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“19 साल पुरानी दरों पर मुआवजा नहीं मंजूर”: धरमजयगढ़ में भू-अधिग्रहण को लेकर आंदोलन तेज, मामला विधानसभा तक पहुंचा

Journalist Amardeep chauhan
amarkhabar.com

घरघोड़ा/रायगढ़, 11 जून।
क्षेत्र के ग्राम कुर्मीभौंना, पोरडा और पोरडी में प्रस्तावित कोल माइंस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ भू-प्रभावित ग्रामीणों का विरोध अब तेज हो गया है। मुआवजा और पुनर्वास नीति में संशोधन की मांग को लेकर ग्रामीणों ने अपनी आवाज पहले वित्त मंत्री तक पहुंचाई थी, और अब यह मामला राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा तथा विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह तक जा पहुंचा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2007 में निर्धारित मुआवजा दरों को वर्ष 2026 में भी लागू किया जा रहा है, जबकि वर्तमान बाजार मूल्य कई गुना बढ़ चुका है। उनका कहना है कि मौजूदा प्रावधानों के तहत असिंचित भूमि के लिए 6 लाख, अर्धसिंचित के लिए 8 लाख और सिंचित भूमि के लिए 10 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा तय है, जो आज की परिस्थितियों में बेहद कम है। स्थानीय स्तर पर जमीन की कीमत 20 से 25 लाख रुपये प्रति एकड़ या उससे अधिक बताई जा रही है।

पुनर्वास पर गहराया संकट

भू-प्रभावित परिवारों का कहना है कि 19 साल पुरानी दरों पर मुआवजा मिलने की स्थिति में वे न तो वैकल्पिक भूमि खरीद पाएंगे और न ही नई आजीविका स्थापित कर सकेंगे। ज्ञापन में उन्होंने मांग की है कि मुआवजा निर्धारण वर्तमान बाजार दर, पंजीकृत विक्रय पत्र, गाइडलाइन रेट और महंगाई सूचकांक के आधार पर किया जाए।

राजस्व मंत्री ने लिया संज्ञान

सूत्रों के अनुसार, ज्ञापन मिलने के बाद राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने संबंधित जिले के कलेक्टर से फोन पर चर्चा कर स्थिति की जानकारी ली। कलेक्टर द्वारा यह स्पष्ट किए जाने पर कि मुआवजा दरों में बदलाव का अधिकार राज्य स्तर पर है, मंत्री ने संकेत दिया कि यह मुद्दा आगामी कैबिनेट बैठक में उठाया जा सकता है। इस पहल के बाद प्रभावितों में उम्मीद की नई किरण जगी है।

विधानसभा अध्यक्ष से भी की मुलाकात

इधर, ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से भी मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं। बताया जाता है कि पुराने मुआवजा दरों का मुद्दा सामने आते ही उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री के नाम टिप्पणी सहित आवेदन अग्रेषित किया।

प्रमुख मांगें स्पष्ट

ग्रामीणों ने अपने ज्ञापन में मुआवजा नीति में तत्काल संशोधन की मांग करते हुए कहा है कि

वर्तमान न्यूनतम दरों का पुनरीक्षण किया जाए

बाजार मूल्य के अनुरूप नई दरें तय हों

भूमि के साथ पेड़-पौधों का अलग मूल्यांकन जारी रखा जाए

मुआवजा दरों की समय-समय पर स्वतः समीक्षा की व्यवस्था हो


सैकड़ों परिवार प्रभावित

तीनों गांवों में सैकड़ों परिवार इस परियोजना से प्रभावित बताए जा रहे हैं। कई क्षेत्रों में शत-प्रतिशत भूमि अधिग्रहण की स्थिति बनने की आशंका है, जिससे विस्थापन का खतरा और बढ़ गया है।

आने वाले दिनों में बढ़ सकता है दबाव

लगातार उच्च स्तर तक मामला पहुंचने से स्पष्ट है कि भू-प्रभावित ग्रामीण अब अपने हक को लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह मुद्दा आने वाले समय में प्रदेश स्तर पर बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद बन सकता है।

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Amar Chouhan

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