सड़क पर रोकी गई मवेशी लोड पिकअपें, कामधेनु सेना की सूचना पर पुलिस ने की जांच

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
धरमजयगढ़ (रायगढ़)।
धरमजयगढ़ क्षेत्र में रविवार को उस समय हलचल मच गई जब मवेशी तस्करी की आशंका में एक के बाद एक चार पिकअप वाहनों को रोककर जांच की गई। सूचना मिलते ही सामाजिक संगठन और पुलिस दोनों सक्रिय हो गए। हालांकि, पुलिस की गहन जांच के बाद मामला पूरी तरह अलग निकला और जिन ग्रामीणों को तस्कर समझा जा रहा था, वे दरअसल अपने खेती-किसानी के लिए मवेशी लेकर घर लौट रहे किसान निकले। समय रहते हुई निष्पक्ष जांच के कारण निर्दोष ग्रामीणों को बड़ी परेशानी से बचा लिया गया।
जानकारी के अनुसार, कामधेनु सेना के धरमजयगढ़ ब्लॉक अध्यक्ष अनिल साव को सूचना मिली कि भैसमा मवेशी बाजार से 8 से 10 पिकअप वाहनों में मवेशी लोड कर जशपुर की ओर ले जाया जा रहा है। आशंका जताई गई कि यह मवेशी तस्करी का मामला हो सकता है। सूचना मिलते ही अनिल साव अपने साथियों के साथ सक्रिय हो गए और सिथरा के पास सड़क किनारे संदिग्ध पिकअप का इंतजार करने लगे।
कुछ देर बाद एक पिकअप वाहन में दो जोड़ी मवेशी लोड कर जाते हुए दिखाई दिया। साव ने तत्काल इसकी जानकारी कामधेनु सेना के प्रदेश महासचिव नारायण बाईन को दी। नारायण बाईन ने बिना देर किए धरमजयगढ़ थाना प्रभारी सीताराम ध्रुव को पिकअप का फोटो भेजकर पूरे मामले की सूचना दी।
सूचना मिलते ही थाना प्रभारी सीताराम ध्रुव अपनी टीम के साथ सक्रिय हो गए और इलाके में घेराबंदी शुरू कर दी, ताकि कोई भी संदिग्ध वाहन भाग न सके। पुलिस ने पहले पिकअप को रोककर थाने लाया और जांच प्रक्रिया शुरू की।
इसी दौरान फिर खबर मिली कि सिथरा क्षेत्र में दो और पिकअप मवेशी लेकर गुजर रहे हैं। उनका पीछा करते हुए धरमजयगढ़ स्थित इंडियन पेट्रोल पंप के पास उन्हें रोक लिया गया। बताया गया कि इन वाहनों को स्थानीय लोगों की मौजूदगी में भाजपा युवा मोर्चा के मंडल अध्यक्ष समय अग्रवाल के सुपुर्द किया गया।
इसके बाद दो और पिकअप की जानकारी सामने आई। उनका पीछा करते हुए वाहनों को धरमजयगढ़ तक लाया गया। इस बार चालक पत्थलगांव की ओर जाने के बजाय कापू की दिशा में मुड़ गए। पीछा करते हुए अंततः नदी के पास दोनों वाहनों को रोक लिया गया। यहां अनिल साव ने दोनों पिकअप को पत्रकार मुकेश मौर्य के सुपुर्द करते हुए पुलिस को सूचना देने को कहा।
पुलिस ने चारों पिकअप वाहनों को अपने कब्जे में लेकर चालकों से पूछताछ की और कागजात की बारीकी से जांच की। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि मवेशियों को किसी भी प्रकार से कत्लखाने ले जाने की मंशा नहीं थी। सभी मवेशी भैसमा बाजार से खरीदे गए थे और संबंधित किसान उन्हें अपने गांव खेती-किसानी के काम के लिए ले जा रहे थे।
थाना प्रभारी सीताराम ध्रुव की सूझबूझ और निष्पक्ष जांच के चलते स्थिति जल्द स्पष्ट हो गई। यदि बिना जांच के कार्रवाई होती तो कई निर्दोष ग्रामीणों को अनावश्यक कानूनी झंझट का सामना करना पड़ सकता था। पुलिस की संतुलित कार्रवाई से एक ओर जहां अफवाहों पर विराम लगा, वहीं ग्रामीणों ने भी राहत की सांस ली।
News associate VK chauhan