CMC वेल्लोर पहुँचे रायगढ़ के DMD पीड़ित दोनों मासूम

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
लंबी यात्रा के बाद विशेषज्ञ डॉक्टरों ने शुरू की प्रारंभिक जांच, परिवारों की उम्मीदें बढ़ीं
रायगढ़। दुर्लभ बीमारी ड्यूचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (DMD) से जूझ रहे रायगढ़ जिले के दो मासूम बच्चों की उम्मीदों भरी यात्रा अब अपने पहले पड़ाव पर पहुँच गई है। लंबी रेल यात्रा के बाद दोनों बच्चे सुरक्षित रूप से दक्षिण भारत के प्रतिष्ठित अस्पताल Christian Medical College Vellore पहुँच गए हैं, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने उनकी प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है।
परिजनों के अनुसार अस्पताल पहुंचते ही बच्चों का पंजीयन और मेडिकल इतिहास की जांच की गई। डॉक्टरों ने बीमारी की स्थिति समझने के लिए कई आवश्यक टेस्ट और स्कैन कराने की प्रक्रिया शुरू की है।

रायगढ़ से उम्मीदों के साथ निकले थे दोनों बच्चे
रायगढ़ जिले के
ग्राम पंचायत सूपा (तहसील पुसौर) निवासी सलोम अहिरवाल
केलों बिहार, रायगढ़ निवासी रिसव हंसराज
लंबे समय से DMD जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। इस बीमारी में धीरे-धीरे शरीर की मांसपेशियां कमजोर होती जाती हैं, जिससे चलने-फिरने और सामान्य गतिविधियों में कठिनाई बढ़ने लगती है।
स्थानीय डॉक्टरों ने बच्चों की स्थिति को देखते हुए बेहतर जांच और विशेषज्ञ उपचार के लिए उन्हें वेल्लोर ले जाने की सलाह दी थी।
रेलवे स्टेशन से शुरू हुई उम्मीदों की यात्रा
मंगलवार को परिजनों और सहयोगियों के साथ दोनों बच्चे ट्रेन से लंबी यात्रा पर रवाना हुए थे। रेलवे स्टेशन पर परिजनों और स्थानीय लोगों ने बच्चों को शुभकामनाओं के साथ विदा किया था।
लंबी यात्रा के बाद जब वे वेल्लोर पहुंचे तो परिवार के लिए यह राहत का पल था कि अब बच्चों का इलाज देश के शीर्ष विशेषज्ञों की निगरानी में शुरू होगा।

डॉक्टरों की निगरानी में शुरू हुई जांच
अस्पताल सूत्रों के अनुसार डॉक्टरों की टीम बच्चों की विस्तृत जांच कर रही है, जिसमें शामिल हैं:
मांसपेशियों की ताकत और मूवमेंट की जांच
ब्लड टेस्ट और जेनेटिक जांच
न्यूरो-मस्कुलर विशेषज्ञ की सलाह
आगे के इलाज की योजना तैयार करना
इन रिपोर्टों के आधार पर तय किया जाएगा कि बच्चों के लिए कौन-सा उपचार और थेरेपी सबसे प्रभावी होगी।

परिवारों को समाज से सहयोग की उम्मीद
बच्चों के परिजनों ने बताया कि इस बीमारी के इलाज और जांच में काफी खर्च आता है। ऐसे में उन्होंने समाज के जागरूक लोगों, सामाजिक संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों से सहयोग की अपील की है।
उम्मीद की कहानी
दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे इन मासूमों की यह यात्रा केवल इलाज की नहीं, बल्कि उम्मीद, साहस और जीवन के लिए संघर्ष की कहानी बन गई है। अब रायगढ़ के लोग भी यही प्रार्थना कर रहे हैं कि वेल्लोर से जल्द अच्छी खबर आए और दोनों बच्चे स्वस्थ होकर अपने घर लौटें।