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होर्मुज संकट की आहट: भारत ने 25 दिन का तेल भंडार सुरक्षित रखा, वैकल्पिक आपूर्ति पर तेज़ी से काम

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com

मध्य पूर्व में तेजी से बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच दुनिया की निगाहें एक बार फिर रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिक गई हैं। ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के बाद इस समुद्री मार्ग को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल बढ़ा दी है। ऐसे समय में भारत ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर सतर्कता बढ़ा दी है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार देश के पास फिलहाल कच्चे तेल और रिफाइंड ईंधन (पेट्रोल-डीजल) का लगभग 25 दिनों का पर्याप्त भंडार मौजूद है। ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति का आकलन करने के लिए केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने हाल ही में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक भी की, जिसमें संभावित जोखिमों और वैकल्पिक रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई।

वैकल्पिक आपूर्ति के विकल्प तलाशने में जुटा भारत

ऊर्जा मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए भारत ने अपनी आयात रणनीति को लचीला बनाने की दिशा में काम तेज कर दिया है।
सरकार क्रूड ऑयल, एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति के लिए दूसरे देशों से संपर्क बढ़ा रही है, ताकि यदि खाड़ी क्षेत्र से आने वाली आपूर्ति बाधित होती है तो देश की ऊर्जा जरूरतों पर कोई बड़ा असर न पड़े।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत पहले से ही अपनी ऊर्जा टोकरी को विविध बनाने की कोशिश कर रहा है और अमेरिका, अफ्रीका तथा अन्य क्षेत्रों से आयात बढ़ाने की रणनीति इसी दिशा का हिस्सा है।

पेट्रोल-डीजल कीमतों को लेकर फिलहाल राहत

मौजूदा हालात को देखते हुए आम उपभोक्ताओं के मन में सबसे बड़ा सवाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक फिलहाल ईंधन की कीमतों में तत्काल वृद्धि की कोई योजना नहीं है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर घरेलू गैस दरों पर पड़ सकता है।

क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य

ईरान और ओमान के बीच स्थित यह संकरा समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।
अनुमान के अनुसार रोजाना लगभग 1.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल इसी मार्ग से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री रास्ते पर निर्भर करता है।

तनाव के बाद बढ़ी चिंता

हाल के दिनों में अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने इस मार्ग को बंद करने की चेतावनी दी है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने यहां से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाने की भी चेतावनी दी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन और ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है।

भारत के लिए क्या मायने

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है और पश्चिम एशिया उसके प्रमुख आपूर्तिकर्ता क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे में यदि यह समुद्री मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है या फिर शिपिंग और बीमा लागत बढ़ जाती है, तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

फिलहाल सरकार हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी विकल्पों पर काम कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव लंबा खिंचता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव तेज हो सकता है, लेकिन भारत की तैयारी फिलहाल स्थिति को संभालने के लिए पर्याप्त मानी जा रही है।

Amar Chouhan

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