“घरघोड़ा मॉडल” की गूंज: पुलिस की सख्ती और ग्रामीणों की सजगता ने रची नशामुक्ति की नई इबारत (देखें वीडियो)

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़ जिले के छोटे से गांव घरघोड़ी ने इन दिनों एक बड़ी सामाजिक सीख पेश की है। कभी अवैध महुआ शराब और उससे जुड़ी अव्यवस्थाओं के कारण चर्चा में रहने वाला यह गांव अब नशामुक्ति की दिशा में मिसाल बनता नजर आ रहा है। यह परिवर्तन अचानक नहीं आया, बल्कि पुलिस की निर्णायक कार्रवाई, सतत संवाद और ग्रामीणों की जागरूक भागीदारी का सम्मिलित परिणाम है।

दरअसल, पिछले माह घरघोड़ा थाना प्रभारी निरीक्षक कुमार गौरव साहू के नेतृत्व में पुलिस ने गांव में अवैध शराब के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया। इस दौरान कई भट्ठियों को ध्वस्त किया गया और बड़ी मात्रा में महुआ शराब जब्त की गई। आमतौर पर ऐसी कार्रवाईयों का असर अस्थायी होता है, लेकिन यहां कहानी अलग रही—यहीं से बदलाव की असली शुरुआत हुई।
कार्रवाई के बाद पुलिस ने केवल कानून का भय दिखाने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि गांव के सामाजिक ढांचे के भीतर प्रवेश कर संवाद स्थापित किया। पंचायत प्रतिनिधियों, महिला समितियों और वरिष्ठ नागरिकों के साथ बैठक कर यह स्पष्ट किया गया कि नशे के खिलाफ लड़ाई तभी सफल होगी, जब समाज खुद इसकी कमान संभालेगा। इस अपील का असर गहरा पड़ा और ग्रामीणों ने इसे अपने स्वाभिमान से जोड़ लिया।
आज गांव का माहौल बदला हुआ है। मुनादी के जरिए अवैध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। महिलाएं, जो पहले इन समस्याओं की सबसे बड़ी पीड़ित थीं, अब इस मुहिम की अगुवाई करती दिख रही हैं। युवा वर्ग भी सक्रिय होकर पुलिस के साथ समन्वय बना रहा है। संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तत्काल देने की प्रवृत्ति ने अवैध कारोबार पर लगभग विराम लगा दिया है।
हाल ही में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम ने इस अभियान को और मजबूती दी। थाना प्रभारी कुमार गौरव ने ग्रामीणों से सीधे संवाद करते हुए स्पष्ट किया कि “ऑपरेशन आघात” केवल कार्रवाई का नाम नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक सुधार अभियान है। उन्होंने जिस सहजता से लोगों को समझाया, उसने पुलिस की छवि को सख्त के साथ-साथ संवेदनशील भी बनाया।

कार्यक्रम के दौरान साइबर अपराध, महिला सुरक्षा और सड़क सुरक्षा जैसे विषयों पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। “हेलो सिस्टर” हेल्पलाइन के माध्यम से महिलाओं को सुरक्षा का भरोसा दिलाया गया, वहीं बीट आरक्षक प्रणाली के जरिए गांव-गांव पुलिस की उपस्थिति को और प्रभावी बनाने की बात कही गई।
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साभार न्यूज़ पार्टनर… https://morbharatnews.com/?p=1508
इस पूरी पहल में पंचायत और महिला समूहों की भूमिका उल्लेखनीय रही। सरपंच श्रीमती हराकुंवर राठिया सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने न केवल प्रशासन का साथ दिया, बल्कि लोगों के बीच जाकर जागरूकता फैलाने में भी अहम भूमिका निभाई। यही कारण है कि यह अभियान केवल सरकारी कार्यक्रम बनकर नहीं रह गया, बल्कि जनआंदोलन का रूप ले चुका है।

रायगढ़ के पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह की दूरदर्शिता भी इस बदलाव के पीछे स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उनका यह संदेश कि “नशामुक्त समाज के लिए जनभागीदारी सबसे बड़ी ताकत है”, केवल शब्द नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर उतरता हुआ नजर आ रहा है। उनके मार्गदर्शन में चल रही कार्रवाई और जागरूकता का संतुलन ही इस मॉडल की सफलता का आधार बना है।

निस्संदेह, घरघोड़ा थाना प्रभारी कुमार गौरव साहू और उनकी टीम की सक्रियता, संवेदनशीलता और निरंतर उपस्थिति इस बदलाव की धुरी रही है। वहीं, एसपी रायगढ़ के नेतृत्व ने इस पूरी पहल को दिशा और स्थायित्व प्रदान किया है। पुलिस की यह कार्यशैली—जहां सख्ती और संवाद दोनों साथ चलते हैं—वास्तव में सराहनीय है।
कार्यक्रम में घरघोड़ा थाना प्रभारी कुमार गौरव साहू, प्रधान आरक्षक अरविंद पटनायक, आरक्षक उद्धव पटेल और आरक्षक हरीश पटेल मौजूद रहे।
आज घरघोड़ी केवल एक गांव नहीं, बल्कि एक संदेश बन चुका है—यदि प्रशासन और समाज साथ आ जाएं, तो सबसे जटिल सामाजिक बुराइयों पर भी प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। यह मॉडल अब आसपास के गांवों के लिए प्रेरणा बन रहा है और संभव है कि आने वाले समय में पूरे क्षेत्र में इसी तरह के सकारात्मक बदलाव देखने को मिलें।
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