टपरिया बॉर्डर पर ट्रांसपोर्ट युद्ध, 150 से अधिक ओडिशा के ट्रांसपोर्टरों पर संगीन धाराओं में मामला दर्ज, छत्तीसगढ़ के ट्रांसपोर्टर्स एकजुट

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
तमनार/रायगढ़।
छत्तीसगढ़–ओडिशा सीमा के टपरिया बॉर्डर पर भड़का ट्रांसपोर्ट विवाद अब कानून की चौखट तक पहुंच चुका है। ओडिशा के कोल ट्रांसपोर्टरों के विरुद्ध तमनार थाना में डकैती और जानलेवा हमले जैसी गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। इस बहुचर्चित मामले में ओडिशा के कुख्यात कोल ट्रांसपोर्टर बंटी डालमिया उर्फ घनश्याम डालमिया सहित करीब 150 नामजद और अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है।
प्रकरण के अनुसार, ओडिशा की कोल माइंस में छत्तीसगढ़ के ट्रांसपोर्टरों को लोडिंग नहीं दिए जाने को लेकर पहले तनाव की स्थिति बनी, जो देखते ही देखते हिंसक टकराव में बदल गई। आरोप है कि सुनियोजित तरीके से एकत्र भीड़ ने रायगढ़ के ट्रांसपोर्टरों पर हमला कर दिया। इस हमले में संजय अग्रवाल, सतीश चौबे, आशीष यादव सहित आधा दर्जन लोग गंभीर रूप से घायल हुए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हमलावरों के पास लाठी-डंडों के साथ अन्य घातक हथियार भी थे और हमला जान से मारने की नीयत से किया गया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए तमनार पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई कठोर धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है, जिसमें डकैती, मारपीट, आपराधिक षड्यंत्र और जानलेवा हमला जैसी धाराएं शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि वीडियो फुटेज, मोबाइल रिकॉर्ड और प्रत्यक्ष गवाहों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
इस घटना के बाद छत्तीसगढ़ के ट्रांसपोर्टर संगठनों में जबरदस्त आक्रोश है। रायगढ़, घरघोड़ा, तमनार सहित आसपास के इलाकों के ट्रांसपोर्टर्स एकजुट होकर खुलकर सामने आ गए हैं। उनका कहना है कि ओडिशा में लंबे समय से छत्तीसगढ़ के ट्रांसपोर्टरों के साथ भेदभाव किया जा रहा है और लोडिंग रोककर आर्थिक दबाव बनाने की कोशिश हो रही है। टपरिया बॉर्डर की घटना उसी मानसिकता का हिंसक परिणाम है।
ट्रांसपोर्टरों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई और उन्हें सुरक्षा की गारंटी नहीं दी गई, तो वे चरणबद्ध आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। वहीं प्रशासनिक स्तर पर दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच समन्वय बनाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं, ताकि हालात और न बिगड़ें।
फिलहाल टपरिया बॉर्डर पर पुलिस बल तैनात है और स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है। यह मामला सिर्फ दो पक्षों के बीच विवाद नहीं रह गया है, बल्कि अंतर्राज्यीय कोयला परिवहन व्यवस्था, कानून-व्यवस्था और ट्रांसपोर्ट कारोबार की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा सवाल बनता जा रहा है।