“शब्दों की सियासत पर सड़क का जवाब: ‘वनवासी’ विवाद में लैलूंगा उबाल पर, पुतला दहन के दौरान पुलिस से टकराव”

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
लैलूंगा (रायगढ़), 29 मई 2026।
केंद्रीय गृह मंत्री के एक बयान ने छत्तीसगढ़ के लैलूंगा में राजनीतिक और सामाजिक तापमान को अचानक बढ़ा दिया। ‘आदिवासी’ समुदाय के लिए ‘वनवासी’ शब्द के प्रयोग को लेकर शुक्रवार को आदिवासी कांग्रेस और स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बस स्टैंड चौक पर जोरदार प्रदर्शन किया। विरोध इतना तीखा था कि पुतला दहन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झूमाझटकी तक की नौबत आ गई।
प्रदर्शन का नेतृत्व आदिवासी कांग्रेस जिलाध्यक्ष दिलीप केरकेट्टा और पूर्व विधायक ने किया। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए ‘वनवासी’ शब्द को आदिवासी अस्मिता के खिलाफ बताया और इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन स्थल पर बड़ी संख्या में जुटे लोगों ने इस मुद्दे को केवल शब्दों का विवाद नहीं, बल्कि पहचान और इतिहास से जुड़ा सवाल बताया।
दरअसल, हाल ही में दिल्ली में आयोजित ‘जनजाति संगम’ कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में ‘वनवासी’ शब्द का उपयोग किया था। इसी बयान के बाद से आदिवासी संगठनों और विपक्षी दलों में असंतोष की लहर देखी जा रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि ‘आदिवासी’ शब्द उनकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है, जबकि ‘वनवासी’ उन्हें सीमित दायरे में बांधने की कोशिश है।
प्रदर्शन के दौरान माहौल तब गरमा गया जब पुलिस ने पुतला दहन रोकने की कोशिश की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ देर के लिए बस स्टैंड चौक पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई और पुलिस व कार्यकर्ताओं के बीच हल्की धक्का-मुक्की हुई। हालांकि, बाद में स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया।
इस विरोध प्रदर्शन में युवा प्रभाग अध्यक्ष शिवशंकर पैकरा, सरपंच जुगलाल भगत, बीडीसी सदस्य अन्नू तिर्की, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष वीरेंद्र शाह सहित कई स्थानीय जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता मौजूद रहे। वक्ताओं ने एक सुर में कहा कि आदिवासी समाज को उसकी मूल पहचान से अलग करने की किसी भी कोशिश का विरोध किया जाएगा।
गौरतलब है कि ‘आदिवासी बनाम वनवासी’ शब्दों को लेकर बहस नई नहीं है, लेकिन समय-समय पर यह मुद्दा राजनीतिक रंग लेता रहा है। लैलूंगा का यह प्रदर्शन इसी बहस के एक और उग्र पड़ाव के रूप में सामने आया है, जिसने संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।
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