“पहली बारिश में तरबतर तहसील दफ्तर: घरघोड़ा में तिरपाल तले चल रहा काम, व्यवस्था पर उठे सवाल”

Journalist Amardeep chauhan
http://amarkhabar.com
घरघोड़ा। मानसून की पहली ही तेज बारिश ने स्थानीय तहसील कार्यालय की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है। सरकारी कामकाज का प्रमुख केंद्र माना जाने वाला यह परिसर जलभराव की गंभीर समस्या से जूझता नजर आया, जहां चारों ओर पानी भर जाने से पूरा दफ्तर किसी अस्थायी तालाब में तब्दील हो गया। हालात ऐसे हैं कि आम नागरिकों से लेकर कर्मचारी तक, सभी को पानी से होकर गुजरते हुए कार्यालय तक पहुंचना पड़ रहा है।
तहसील कार्यालय में आने वाले बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए यह स्थिति और अधिक परेशानी भरी साबित हो रही है। फिसलन और गड्ढों के कारण दुर्घटना की आशंका लगातार बनी हुई है, लेकिन इसके बावजूद लोगों को मजबूरी में इसी रास्ते से होकर गुजरना पड़ रहा है।

समस्या केवल परिसर तक सीमित नहीं है। वर्षों पुराना तहसील भवन अब जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। छत से जगह-जगह पानी टपकने के कारण अधिकारी और कर्मचारी तिरपाल का सहारा लेकर काम करने को विवश हैं। सरकारी फाइलें और महत्वपूर्ण दस्तावेज भी इस स्थिति में सुरक्षित नहीं रह पाते, जिससे प्रशासनिक कार्यों की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ने की आशंका है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह कोई नई समस्या नहीं है। हर वर्ष बारिश के मौसम में यही हालात बनते हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। जल निकासी की उचित व्यवस्था के अभाव में थोड़ी सी बारिश भी पूरे परिसर को जलमग्न कर देती है।
तहसील कार्यालय, जो राजस्व प्रशासन का एक महत्वपूर्ण केंद्र होता है, उसकी यह स्थिति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। लोगों का कहना है कि जब बुनियादी सरकारी भवन ही उपेक्षा का शिकार हों, तो विकास के दावों की हकीकत समझना मुश्किल नहीं है।

अब क्षेत्र में यह सवाल जोर पकड़ने लगे हैं कि आखिर इस जर्जर भवन का जीर्णोद्धार कब होगा और क्या जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाएगा। आम लोगों के साथ-साथ कर्मचारियों की सुरक्षा और सुविधा को लेकर भी प्रशासन की जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि तहसील कार्यालय के भवन का जल्द से जल्द मरम्मत कार्य कराया जाए, परिसर में पक्की जल निकासी व्यवस्था विकसित की जाए और ऐसा वातावरण तैयार किया जाए, जहां नागरिक बिना किसी जोखिम के अपने काम के लिए आ-जा सकें।
पहली ही बारिश में सामने आई यह तस्वीर प्रशासन के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी कार्रवाई की जरूरत है।
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