धरमजयगढ़ में SECL परियोजना पर टकराव गहराया: ग्रामीणों का उग्र विरोध, GM का भरोसा—“बिना सहमति न सर्वे होगा, न खदान”

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
धरमजयगढ़/रायगढ़। जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र में प्रस्तावित SECL की दुर्गापुर-शाहपुर ओपन कोल परियोजना को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। ग्रामसभा की सहमति के बिना ड्रोन सर्वे कराए जाने की आशंका ने ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ा दिया है। हालात ऐसे बने कि SECL के महाप्रबंधक (GM) के सामने ही ग्रामीणों ने तीखा विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद GM को सार्वजनिक रूप से आश्वस्त करना पड़ा कि स्थानीय सहमति के बिना न तो ड्रोन सर्वे किया जाएगा और न ही खदान परियोजना आगे बढ़ेगी।
दरअसल, यह पूरा मामला पांचवीं अनुसूची और पेसा (PESA) क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जहां किसी भी प्रकार की भूमि अधिग्रहण या परियोजना के लिए ग्रामसभा की सहमति को अनिवार्य माना जाता है। प्रभावित गांव—दुर्गापुर, शाहपुर, बायसी, बायसी कॉलोनी और नगर पंचायत धरमजयगढ़ के कुछ वार्ड—लंबे समय से प्रस्तावित कोल ब्लॉक का विरोध करते आ रहे हैं।
बैठक में साफ संदेश, फिर भी बढ़ा अविश्वास
19 जुलाई को अंबेटिकरा मंदिर परिसर में SECL प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच हुई बैठक में किसानों और जनप्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा था कि “जमीन के बदले जमीन” के बिना कोई भी प्रस्ताव स्वीकार्य नहीं होगा। बैठक में मौजूद ग्रामीणों के मुताबिक, उसी दौरान GM ने भरोसा दिलाया था कि बिना ग्रामसभा की सहमति कोई सर्वे नहीं कराया जाएगा।
हालांकि, इसके बाद ड्रोन सर्वे की संभावित गतिविधियों की खबर सामने आते ही ग्रामीणों का अविश्वास और गहरा गया। ग्राम पंचायत दुर्गापुर के लोगों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को लिखित आवेदन देकर सर्वे पर रोक लगाने की मांग की और मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए समिति बनाने की जानकारी भी दी।
पुलिस बल के साथ सर्वे टीम पहुंचने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि 23 जुलाई को SECL की टीम पुलिस बल और सुरक्षा कर्मियों के साथ गांव पहुंची और ड्रोन सर्वे का प्रयास किया। हालांकि, भारी विरोध के चलते टीम को वापस लौटना पड़ा। ग्रामीणों ने इसे “जबरन कार्रवाई” करार देते हुए कहा कि यदि उनकी आपत्तियों की अनदेखी कर सर्वे किया गया तो किसी भी अप्रिय स्थिति की जिम्मेदारी SECL प्रबंधन और प्रशासन की होगी।
कानूनी और संवैधानिक सवाल भी उठे
यह मामला केवल परियोजना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून के तहत आदिवासी क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन के अधिकारों पर भी सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी भागीदारी और सहमति के बिना इस तरह की प्रक्रिया संवैधानिक भावना के विपरीत है।
स्थिति संवेदनशील, प्रशासन की नजर
सूत्रों के अनुसार, अब SECL प्रबंधन और प्रभावित किसानों के बीच एक बड़ी बैठक की तैयारी की जा रही है, ताकि विवाद का समाधान निकाला जा सके। फिलहाल क्षेत्र में स्थिति संवेदनशील बनी हुई है और प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
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