तमनार की तीन पंचायतों में भ्रष्टाचार का ‘ट्रिपल मर्डर’ : RTI की हत्या, कानून का उल्लंघन और जनता के करोड़ों का गबन!…

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़। जिले के जनपद पंचायत तमनार के अंतर्गत आने वाली तीन ग्राम पंचायतें कोड़केल, कुंजेमुड़ा और बजरमुड़ा भ्रष्टाचार के ऐसे ‘सिंडिकेट’ में तब्दील हो चुकी हैं, जहाँ कानून का नहीं, बल्कि ‘कमीशनराज’ का सिक्का चलता है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारियों को दबाना और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों को कूड़ेदान में फेंकना यहाँ के सचिवों की कार्यप्रणाली बन चुकी है।
RTI कार्यकर्ता की सूचना पर ‘ताला’, भ्रष्टाचार की ‘चाबी’ गायब – पत्रकार ने जब इन तीनों पंचायतों में 15वें वित्त आयोग के तहत हुए निर्माण कार्यों का लेखा-जोखा (मास्टर रोल, माप पुस्तिका और जियो-टैग फोटो) मांगा, तो मानों मधुमक्खी के छत्ते में पत्थर लग गया। 2021 से अब तक हुए करोड़ों के कार्यों की फाइलें दबाकर सचिव कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं। नियमतः 30 दिनों में मिलने वाली जानकारी महीनों बाद भी नदारद है।
कोड़केल : जहाँ ‘आदेश’ ही ‘अपराध’ बन गया! – सबसे चौंकाने वाला मामला ग्राम पंचायत कोड़केल का है। यहाँ के सचिव का दुस्साहस इतना है कि उन्होंने प्रथम अपीलीय अधिकारी (CEO जनपद) के लिखित आदेश (दिनांक 24.03.2026) को भी ठेंगा दिखा दिया। आदेश था – “तत्काल और निःशुल्क जानकारी दो”, लेकिन सचिव महोदय न सुनवाई में आए और न ही आज तक जानकारी दी। यह सीधे तौर पर प्रशासनिक बगावत है।
कुंजेमुड़ा और बजरमुड़ा : मास्टर रोल का ‘मिस्ट्री’ बॉक्स – यही हाल कुंजेमुड़ा और बजरमुड़ा का है। यहाँ मास्टर रोल (Muster Roll) देने से परहेज इसलिए किया जा रहा है क्योंकि आशंका है कि ‘फर्जी मजदूरों’ के नाम पर सरकारी खजाने में सेंध लगाई गई है। अगर काम धरातल पर हुआ है, तो तस्वीरें दिखाने में परहेज क्यों? क्या निर्माण कार्य सिर्फ कागजों पर हुआ है और भुगतान असल में जेबों में गया है?
PMO और राज्य सूचना आयोग तक पहुँचा मामला – इस संगठित भ्रष्टाचार के विरुद्ध अब आर-पार की लड़ाई शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), छत्तीसगढ़ पंचायत मंत्री और राज्य सूचना आयोग को भेजी गई “महा-शिकायत” में इन तीनों पंचायतों के सचिवों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत FIR दर्ज करने की मांग की गई है।
> “यह केवल जानकारी न देने का मामला नहीं है, बल्कि सरकारी धन की चोरी को छिपाने का आपराधिक कृत्य है। यदि इन सचिवों पर FIR नहीं हुई, तो ग्रामीण विकास का पैसा इसी तरह बंदरबांट होता रहेगा।” – पत्रकार एवं शिकायतकर्ता
जाँच के घेरे में ‘साहब’ और ‘सचिव’ का गठजोड़? – सवाल यह उठता है कि क्या इन सचिवों को उच्च अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है? क्यों एक अदना सा सचिव जनपद CEO के आदेश की अवहेलना करने की हिम्मत जुटा पा रहा है? क्या जिला प्रशासन रायगढ़ इन तीनों पंचायतों का ‘स्पेशल ऑडिट’ कराकर दूध का दूध और पानी का पानी करेगा?
देखना दिलचस्प होगा कि भ्रष्टाचार के इस ‘ट्रिपल मर्डर’ पर पुलिस FIR दर्ज करती है या मामला फाइलों में ही दफन हो जाता है।