“तमनार कांड में कड़ा न्याय: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को ‘शेष जीवनकाल’ तक कैद, पीड़िता को 6 लाख मुआवजा”

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़। तमनार थाना क्षेत्र में नाबालिग से दुष्कर्म के बहुचर्चित मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय, घरघोड़ा ने सख्त और नजीर पेश करने वाला फैसला सुनाया है। न्यायालय ने आरोपी त्रिभुवन अगरिया को दोषी करार देते हुए उसके शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही ₹5,000 का अर्थदंड भी लगाया गया है। अदालत ने पीड़िता की शारीरिक और मानसिक पीड़ा को ध्यान में रखते हुए 6 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।
मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश पॉक्सो शहाबुद्दीन कुरैशी की अदालत में हुई, जहां प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी के खिलाफ अपराध सिद्ध हुआ। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि नाबालिगों के विरुद्ध इस प्रकार के जघन्य अपराधों में कठोरतम दंड ही न्यायोचित है।
इलाज के बहाने रची थी साजिश
अभियोजन के अनुसार, घटना लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व की है। आरोपी ने बीमार नाबालिग बालिका को इलाज कराने का झांसा दिया और बहला-फुसलाकर सुनसान झाड़ियों की ओर ले गया। वहां उसने दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। घटना सामने आने के बाद थाना तमनार में अपराध दर्ज कर जांच प्रारंभ की गई।
सशक्त विवेचना बनी सजा की आधारशिला
इस संवेदनशील प्रकरण की जांच तत्कालीन थाना प्रभारी तमनार निरीक्षक आशीर्वाद रहटगांवकर ने की। विवेचना के दौरान उन्होंने वैज्ञानिक और तकनीकी दृष्टिकोण अपनाते हुए साक्ष्यों का संकलन किया। पीड़िता के बयान, चिकित्सकीय परीक्षण और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को सुनियोजित ढंग से न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी और सुदृढ़ विवेचना के कारण न्यायालय आरोपी के विरुद्ध आरोप सिद्ध करने में आश्वस्त हुआ। यह भी उल्लेखनीय है कि निरीक्षक रहटगांवकर को उनकी उत्कृष्ट विवेचना क्षमता के लिए पूर्व में केंद्रीय गृह मंत्री पदक से सम्मानित किया जा चुका है।
कानून का स्पष्ट संदेश
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि नाबालिगों के साथ यौन अपराध समाज के लिए गंभीर खतरा हैं और ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है, ताकि समाज में भय और कानून के प्रति विश्वास बना रहे।
यह फैसला न केवल पीड़िता के लिए न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों को कानून किसी भी स्थिति में बख्शने वाला नहीं है।
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