मुड़ागांव पंचायत में विकास या ‘कागजी खेल’? स्ट्रीट लाइट से शौचालय तक लाखों के खर्च पर उठे सवाल, जांच की मांग तेज

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़ जिले के लैलूंगा ब्लॉक स्थित ग्राम पंचायत मुड़ागांव में विकास कार्यों के नाम पर हुए खर्च को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। पंचायत के खातों में दर्ज आंकड़े बताते हैं कि स्ट्रीट लाइट और अन्य निर्माण कार्यों में लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से मेल नहीं खाती। ग्रामीणों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, केवल स्ट्रीट लाइट मद में ही 6 लाख 55 हजार रुपये खर्च दर्शाए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि जुलाई 2025 में अलग-अलग तिथियों पर एक ही प्रकार के कार्य के लिए बार-बार भुगतान किया गया। 19 जुलाई और 25 जुलाई की तिथियों में बदलाव करते हुए 99 हजार, 88 हजार, 66 हजार और 49 हजार 500 रुपये की राशि निकाली गई। इन भुगतानों की प्रकृति और औचित्य पर अब सवाल उठ रहे हैं।
मामला यहीं नहीं थमता। पंचायत रिकॉर्ड में नाहनी गृह (स्नानघर) निर्माण के लिए 86 हजार रुपये खर्च दिखाए गए हैं, जबकि गांव में ऐसा कोई निर्माण जमीनी स्तर पर मौजूद नहीं है। इसी तरह लघुशंका (शौचालय) मद में 1 लाख 57 हजार 500 रुपये और अन्य कार्यों में 2 लाख 44 हजार 200 रुपये खर्च दर्ज हैं। इसके अलावा श्रमिक भुगतान के नाम पर 4 लाख 87 हजार 700 रुपये का आंकड़ा सामने आया है। कुल मिलाकर स्ट्रीट लाइट और अन्य मदों को जोड़ें तो खर्च 11 लाख 42 हजार 700 रुपये तक पहुंच रहा है, जो एक छोटे से ग्राम पंचायत के लिए असामान्य रूप से बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है।
स्थानीय निवासी सिद्धार्थ सहित कई ग्रामीणों का आरोप है कि जिन स्थानों पर स्ट्रीट लाइट लगने का दावा किया गया है, वहां या तो लाइट लगी ही नहीं है या फिर अधूरी और अनुपयोगी स्थिति में है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि एक ही तरह के कार्य को अलग-अलग तिथियों में दिखाकर बार-बार भुगतान निकाला गया, जिससे गड़बड़ी की आशंका और गहरा जाती है।
गांव में चर्चा है कि कागजों में विकास तेज़ी से दौड़ रहा है, लेकिन धरातल पर हालात जस के तस बने हुए हैं। यही कारण है कि अब ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यदि अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों व संबंधित लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
फिलहाल, यह मामला पंचायत व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और जांच की दिशा में क्या कदम उठाता है।
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