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“आवास योजना की किस्त मिली, लेकिन बालू नहीं—बरमकेला के हितग्राही निर्माण कार्य ठप होने से परेशान”

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com

बरमकेला।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीणों को घर बनाने के लिए सरकार ने किस्त तो जारी कर दी है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बिना बालू के मकान निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ गया है। बरमकेला क्षेत्र के ओड़िशा सीमा से लगे सुदूर वनांचल के ग्राम पंचायत झाल, हट्टापाली, जीरापाली, करनपाली, जोगनीपाली और कोकबाहल के हितग्राही पिछले करीब 20 दिनों से मकान निर्माण शुरू नहीं कर पा रहे हैं। वजह साफ है—क्षेत्र में बालू की उपलब्धता ही नहीं है।

स्थिति इतनी विचित्र हो चुकी है कि बालू वही ला पा रहा है जिसके पास खुद का ट्रैक्टर है और जो रात के अंधेरे में चोरी-छिपे खनन क्षेत्र तक पहुंचने का जोखिम उठा सके। बताया जा रहा है कि दिन के समय प्रशासन द्वारा ड्रोन कैमरे से सख्त निगरानी की जा रही है, जिसके कारण बालू लाने का वैधानिक रास्ता लगभग बंद हो गया है। नतीजतन प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही किस्त मिलने के बावजूद अपने ही घर के निर्माण के लिए भटकने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जब प्रशासन ने खनन पर सख्ती कर दी है तो यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर वैध रूप से बालू कहां से और कैसे मिलेगी। खनन का ठेका अब तक किसी को नहीं दिया गया है, वहीं महानदी क्षेत्र से बालू लाने वालों पर पुलिस कार्रवाई कर ट्रैक्टर जब्त कर रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सरकार की महत्वाकांक्षी आवास योजना आखिर जमीन पर कैसे पूरी होगी।

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासनिक असमंजस और अव्यवस्था के कारण योजना का लाभ लेने वाले लोग ही सबसे ज्यादा परेशान हो रहे हैं। मकान निर्माण की समय-सीमा निकलती जा रही है और लाभार्थी बालू के अभाव में असहाय बने हुए हैं।

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ग्रामीणों की पीड़ा उनके शब्दों में

“सरकार ने आवास तो दिया है लेकिन बालू के अभाव में घर कैसे बनाये? यही निवेदन है कि बालू को घर तक पहुंचने दिया जाये।”
— आकाश सिदार

“दो महीने से घर को उजाड़ रहा हूँ, उजड़ने के बाद जब काम शुरू करने का समय आया है तो बालू नहीं मिल पा रहा। समय पर बालू मिलता तो अब तक मेरा घर बन गया होता।”
— दुबले साहू, झाल पंचायत

“छड़ (सरिया) का रेट 5800 क्विंटल, गिट्टी का रेट 5000 प्रति ट्रैक्टर तथा बालू 2700 रुपये प्रति ट्रैक्टर है। सरकार के द्वारा दिए गए 1 लाख 20 हजार रुपये 1 किचन और 1 रूम के लिए अपर्याप्त है। और पैसे कहाँ से लाऊ इसका टेंशन ऊपर से बालू बैन लगा दिया गया है। अब घर क्या मिट्टी से बनाऊंगा? पास करेंगे क्या कच्चे मकान को?”
— उत्तम सिदार

“जिनके पास पहले से बालू है वो घर बना रहे हैं। ओड़िसा से बालू के लिए कॉन्टैक्ट कर रहे हैं लेकिन कई कारणों से वहाँ से भी बालू नहीं मिल पा रहा है।”
— भरत पटेल, झाल पंचायत

“महानदी से बालू आता था, वहाँ के खनन करने वालों को पुलिस पकड़ रही है और उनके ट्रैक्टर जब्त कर रही है, जिससे हमें बालू नहीं मिल पा रहा है। हमें प्रशासन ये बताये कि वैध तरीके से बालू कहाँ मिलेगा? हमने पूछताछ किया तो पता चला कि अबतक किसी को खनन के लिए ठेका नहीं मिला है।”
— सम्राट पटेल, झाल पंचायत

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Amar Chouhan

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