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हाथियों का तांडव: एक ही रात में उजड़ गए दो घर, मासूम की जिंदगी बची… लेकिन मां चली गई

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com

धरमजयगढ़ (रायगढ़)।
जंगल से सटे गांवों में रहने वाले लोगों के लिए हर रात अब एक डर बन चुकी है। शनिवार की वह काली सुबह धरमजयगढ़ वन मंडल के दो परिवारों के लिए कभी न भूलने वाला दर्द बन गई, जब जंगली हाथियों के तांडव ने एक ही रात में दो जिंदगियां छीन लीं।

मां ने बचाई मासूम की जान, खुद हार गई जिंदगी से जंग

कापू वन परिक्षेत्र के तालगांव बस्ती में तड़के करीब 4 बजे अचानक एक जंगली हाथी बस्ती में घुस आया। नींद में डूबे गांव में चीख-पुकार मच गई। हर कोई अपनी जान बचाने के लिए भागने लगा।

इसी अफरा-तफरी के बीच एक मां अपनी दुधमुंही बच्ची को सीने से लगाए घर से बाहर निकल रही थी। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। हाथी ने उस पर हमला कर दिया।
मां गंभीर रूप से घायल हो गई… लेकिन उसकी गोद में पल रही मासूम चमत्कारिक रूप से सुरक्षित बच गई।

गांव वालों ने तुरंत महिला को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन जिंदगी की डोर टूट चुकी थी।
पीछे रह गई एक मासूम… जो शायद अभी यह भी नहीं जानती कि उसकी मां अब कभी वापस नहीं आएगी।

वन विभाग की गाड़ी भी बनी गुस्से का शिकार

घटना के बाद हाथी का गुस्सा इतना बढ़ गया कि उसने वन विभाग की एक गाड़ी पर भी हमला कर उसे क्षतिग्रस्त कर दिया। यह सिर्फ एक हमला नहीं, बल्कि जंगल और इंसानों के बीच बढ़ती दूरी का खौफनाक संकेत था।

दूसरे गांव में भी बुझ गया एक घर का चिराग

इसी रात छाल वन परिक्षेत्र के औरानारा गांव के पास एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई।
ग्रामीण हाथी को देखकर भाग रहे थे… लेकिन खतरा पीछा नहीं छोड़ रहा था।

भागते-भागते बंधन अगरिया हाथी की चपेट में आ गया।
उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

एक और घर उजड़ गया… एक और परिवार की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई।

डर, गुस्सा और बेबसी—ग्रामीणों की तीन सच्चाई

इन दोनों घटनाओं के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।
ग्रामीणों की आंखों में डर है… दिल में गुस्सा है… और हालात के सामने गहरी बेबसी।

वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर निगरानी कर रही है और गांवों में मुनादी कर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
लेकिन सवाल वही है—
कब तक लोग अपने ही घरों में डरकर जिएंगे?

बढ़ता मानव-हाथी संघर्ष—कौन जिम्मेदार?

लगातार बढ़ रही ऐसी घटनाएं सिर्फ हादसे नहीं हैं… ये उस संघर्ष की कहानी हैं, जहां जंगल सिकुड़ रहे हैं और हाथी गांवों की ओर बढ़ रहे हैं।

आज फिर दो जिंदगियां चली गईं…
कल किसकी बारी होगी—यह डर अब हर गांव के दिल में बस चुका है।

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Amar Chouhan

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