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उम्र को मात देता जज़्बा: 70 की दहलीज पर भी एक्शन का पर्याय बने चिताह यजनेश सेठी

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com

मुंबई। फिल्मी दुनिया में जहां चमक-दमक के पीछे अक्सर उम्र की सीमाएं तय हो जाती हैं, वहीं एक नाम ऐसा है जो इन तमाम धारणाओं को लगातार चुनौती दे रहा है—चिताह यजनेश सेठी। 70 वर्ष की उम्र में भी उनकी फुर्ती, अनुशासन और कार्यशैली किसी युवा एक्शन ट्रेनर से कम नहीं, बल्कि कई मायनों में उनसे कहीं आगे दिखाई देती है।

सेठी केवल एक प्रोड्यूसर या एक्शन डायरेक्टर भर नहीं हैं, बल्कि वे उस परंपरा के वाहक हैं जिसने बॉलीवुड में एक्शन को सिर्फ दिखावे से निकालकर तकनीक, अनुशासन और कला का रूप दिया। उनका नाम उन चुनिंदा लोगों में शुमार है जिन्होंने पर्दे के पीछे रहकर भी सिनेमा की दिशा तय की।

प्रदेश सचिव, प्रेस रिपोर्टर क्लब और सामाजिक कार्यकर्ता श्याम गुप्ता बताते हैं कि पिछले दो दशकों से उनका सेठी जी से सीधा जुड़ाव रहा है। वे कहते हैं, “सेठी जी केवल एक ट्रेनर नहीं, बल्कि एक संस्था हैं। उन्होंने जिस समर्पण से खुद को साधा है, उसी प्रतिबद्धता के साथ सैकड़ों कलाकारों को प्रशिक्षित किया है।”

सितारों के पीछे का असली एक्शन गुरु

फिल्म इंडस्ट्री में अक्सर हीरो की ताकत और स्टंट्स की चर्चा होती है, लेकिन उन स्टंट्स को गढ़ने वाले चेहरे कम ही सामने आते हैं। चिताह यजनेश सेठी उन्हीं अनदेखे लेकिन निर्णायक चेहरों में से एक हैं।

दावा किया जाता है कि उन्होंने कई पीढ़ियों के दिग्गज कलाकारों को ट्रेनिंग दी है। इनमें देव आनंद, दिलीप कुमार, दारा सिंह से लेकर अमिताभ बच्चन, मिथुन चक्रवर्ती और अनिल कपूर जैसे सितारे शामिल हैं।

यही सिलसिला आगे बढ़ते हुए सलमान खान, सुनील शेट्टी, ऋतिक रोशन, अक्षय कुमार और अजय देवगन तक पहुंचता है। अभिनेत्री वर्ग में जूही चावला, रवीना टंडन, प्रियंका चोपड़ा और करीना कपूर जैसी नामचीन हस्तियां भी उनके प्रशिक्षण से जुड़ी बताई जाती हैं।

हालांकि “90% बॉलीवुड को ट्रेनिंग देने” का दावा भले ही अतिशयोक्ति लगे, लेकिन यह निर्विवाद है कि सेठी ने इंडस्ट्री में एक्शन ट्रेनिंग के स्तर को नई ऊंचाई दी है।

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“मार्शल आर्ट किंग” की पहचान

चिताह यजनेश सेठी को फिल्म जगत में “मार्शल आर्ट किंग” के रूप में भी जाना जाता है। उनकी पहचान केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने मार्शल आर्ट को सामाजिक सरोकार से भी जोड़ा।

“अब नहीं डरेंगी भारत की बेटियां” जैसे अभियानों के तहत लाखों बालिकाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देना उनके काम का वह पक्ष है, जो उन्हें सिर्फ फिल्मी शख्सियत नहीं बल्कि सामाजिक प्रेरणा भी बनाता है।

श्याम गुप्ता, जो स्वयं एक प्रशिक्षक के रूप में तीन लाख से अधिक बालिकाओं को सेल्फ डिफेंस सिखा चुके हैं, अपने गुरु के योगदान को वैश्विक बताते हैं। उनके अनुसार, सेठी को महिला आत्मरक्षा अभियान के लिए कई देशों में सम्मानित किया जा चुका है।

नई पीढ़ी के साथ लगातार सक्रिय

हाल ही में मुंबई दौरे के दौरान छत्तीसगढ़ी फिल्म “जोहार छत्तीसगढ़ पार्ट 2” सहित अन्य परियोजनाओं को लेकर सेठी के साथ बैठक हुई। इस दौरान उनके शिष्य राज साहू और ओमप्रकाश घृतलहरे भी मौजूद रहे।

इस मुलाकात ने यह साफ कर दिया कि सेठी सिर्फ अतीत की विरासत नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की सक्रिय शक्ति हैं। वे आज भी नई पीढ़ी के कलाकारों को एक्शन की बारीकियां सिखा रहे हैं और उन्हें मानसिक व शारीरिक रूप से मजबूत बना रहे हैं।

जहां अधिकतर लोग 60 के बाद रफ्तार धीमी कर देते हैं, वहीं चिताह यजनेश सेठी 70 की उम्र में भी रफ्तार तय कर रहे हैं। वे केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक दौर हैं—जिसने बॉलीवुड को एक्शन की नई भाषा दी और समाज को आत्मरक्षा का साहस।

उनकी कहानी यह बताती है कि उम्र केवल एक संख्या है, असली ताकत जुनून और अनुशासन में होती है।

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Amar Chouhan

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