यहाँ तय समय से पहले जला दिया रावण का पुतला, राम-लक्ष्मण और हनुमान की वेशभूषा में थाने पहुंची रामलीला मंडली

बिलासपुर के कुदुदंड चांदनी चौक का मामला, दशहरा उत्सव समिति की शिकायत पर सिविल लाइन पुलिस ने दर्ज किया अपराध; आरोपों की जांच जारी
बिलासपुर। दशहरा केवल रावण के पुतले के दहन का आयोजन नहीं, बल्कि धार्मिक परंपराओं, सामूहिक सहभागिता और वर्षों से चली आ रही उत्सव की मर्यादाओं से जुड़ा पर्व भी है। लेकिन बिलासपुर के कुदुदंड चांदनी चौक में रावण दहन को लेकर ऐसा विवाद सामने आया, जिसने उत्सव समिति और उसके एक सदस्य के बीच चल रहे मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया। आरोप है कि निर्धारित समय और धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार कार्यक्रम संपन्न होने से पहले ही 35 फीट ऊंचे रावण के पुतले में आग लगा दी गई। मामले से नाराज रामलीला मंडली के कलाकार भगवान राम, लक्ष्मण, हनुमान और वानर सेना की वेशभूषा में समिति के अन्य सदस्यों के साथ सिविल लाइन थाने पहुंचे और लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की।
समिति की शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि, घटना को लेकर लगाए गए आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है। पुलिस का कहना है कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
35 फीट ऊंचे पुतले के दहन को लेकर उठा विवाद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुदुदंड चांदनी चौक में नवयुवक श्रद्धा दुर्गा एवं दशहरा उत्सव समिति लंबे समय से दुर्गा पूजा और दशहरा उत्सव का आयोजन करती आ रही है। समिति से जुड़े लोगों के मुताबिक, इस बार भी करीब 40 हजार रुपये की लागत से 35 फीट ऊंचा रावण का पुतला तैयार कराया गया था। कार्यक्रम के लिए राम, लक्ष्मण और हनुमान की झांकी सहित अन्य तैयारियां भी की गई थीं।
समिति का आरोप है कि पुतले का दहन तय समय पर धार्मिक विधि-विधान के साथ किया जाना था, लेकिन सदस्य मनीष राव चौहान उर्फ अंकित ने अपने कुछ साथियों के साथ कथित तौर पर निर्धारित समय से पहले ही पुतले में आग लगा दी। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, इस दौरान परंपरागत धार्मिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, जिससे आयोजन से जुड़े सदस्यों और स्थानीय लोगों में नाराजगी पैदा हुई।
समिति की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित सदस्य की कुछ धार्मिक टिप्पणियों को लेकर पहले से ही मतभेद थे। हालांकि, इन आरोपों और घटना के पीछे के वास्तविक कारणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले की जांच में इन पहलुओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
वेशभूषा में थाने पहुंची रामलीला मंडली
घटना के बाद विरोध दर्ज कराने का तरीका भी चर्चा में आ गया। शिकायत लेकर थाने पहुंचे लोगों में रामलीला के वे कलाकार भी शामिल थे, जिन्होंने भगवान राम, लक्ष्मण, हनुमान और वानर सेना की भूमिका निभाई थी। कलाकार उसी वेशभूषा में समिति के सदस्यों के साथ सिविल लाइन थाने पहुंचे।
समिति के सदस्यों ने पुलिस से मामले में कार्रवाई करने की मांग की। उनका कहना था कि सार्वजनिक धार्मिक आयोजन में तय कार्यक्रम और परंपराओं का पालन किया जाना चाहिए तथा किसी एक व्यक्ति को अपनी मर्जी से कार्यक्रम की प्रक्रिया बदलने का अधिकार नहीं होना चाहिए।
हालांकि, विवाद के सभी पक्षों का विस्तृत पक्ष सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में घटना को केवल धार्मिक भावनाओं से जुड़े विवाद के रूप में देखने के बजाय आयोजन संबंधी मतभेदों, संबंधित पक्षों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले को समझना जरूरी है।
BNS की चार धाराओं में अपराध दर्ज
सिविल लाइन थाना प्रभारी किशोर केवट के अनुसार, रावण दहन को लेकर उत्सव समिति की ओर से शिकायत प्राप्त हुई है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 196, 299, 324(4) और 3(5) के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की है।
पुलिस के मुताबिक, फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए जांच की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अपराध दर्ज होना आरोपों की अंतिम पुष्टि या किसी व्यक्ति का दोष सिद्ध होना नहीं है। संबंधित व्यक्ति का पक्ष, घटना के साक्ष्य और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
धार्मिक आयोजनों में समन्वय और संवाद भी जरूरी
दशहरा जैसे सार्वजनिक आयोजनों में बड़ी संख्या में लोग भाग लेते हैं। ऐसे कार्यक्रमों की सफलता के लिए आयोजन समिति के सदस्यों के बीच समन्वय, जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण और समय-सारिणी का पालन महत्वपूर्ण होता है। यदि किसी आयोजन को लेकर मतभेद पैदा होते हैं, तो उनका समाधान बातचीत और तय प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए, ताकि विवाद सार्वजनिक तनाव का कारण न बने।
फिलहाल कुदुदंड चांदनी चौक का यह मामला पुलिस जांच के अधीन है। अब आगे की तस्वीर जांच में सामने आने वाले तथ्यों, संबंधित पक्षों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों से ही स्पष्ट होगी।
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