88 साल की उम्र में भी अपनों के सहारे को तरसे बुजुर्ग दंपति, एसएसपी से लगाई गुहार; बेटे के मामले में एसडीएम को भेजा गया प्रतिवेदन

रायगढ़ में वृद्ध माता-पिता की उपेक्षा का मामला आया सामने, पुलिस ने बेटे को बुलाकर दी समझाइश; वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण कानून के तहत आगे की कार्रवाई की पहल
रायगढ़, 11 अक्टूबर 2026। उम्र के जिस पड़ाव पर माता-पिता को अपनी संतान के सहारे, देखभाल और सम्मान की सबसे अधिक जरूरत होती है, उसी समय यदि उन्हें अपने ही घर में उपेक्षा का सामना करना पड़े, तो यह केवल एक पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता से जुड़ा गंभीर सवाल भी है। रायगढ़ में 88 वर्षीय सेवानिवृत्त लैब असिस्टेंट बैजनाथ पटनायक और उनकी पत्नी साहेबानी पटनायक की शिकायत ने इसी मुद्दे को एक बार फिर सामने ला दिया है। बुजुर्ग दंपति ने अपने इकलौते जीवित बेटे पर उनकी तथा दिव्यांग बेटी की देखभाल नहीं करने का आरोप लगाते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह से संरक्षण की गुहार लगाई। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने बेटे को थाने बुलाकर समझाइश दी और आगे की वैधानिक कार्रवाई के लिए अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम), रायगढ़ को प्रतिवेदन भेजा है।
वृद्धावस्था में भोजन, उपचार और देखभाल को लेकर शिकायत
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, बुजुर्ग दंपति ने 10 अक्टूबर को एसएसपी के समक्ष अपनी समस्या रखी। उन्होंने बताया कि उनके दो बेटे और एक बेटी हैं। छोटे बेटे का निधन हो चुका है, जबकि उनकी बहू मायके में रहती हैं। दंपति के अनुसार, बढ़ती उम्र के कारण अब उनके लिए रोजमर्रा के काम स्वयं करना मुश्किल हो गया है। ऐसे में उन्हें परिवार के सहयोग और नियमित देखभाल की आवश्यकता है।
शिकायत में बैजनाथ पटनायक और उनकी पत्नी ने आरोप लगाया कि उनका जीवित पुत्र खीरसागर पटनायक उन्हें पर्याप्त भोजन-पानी उपलब्ध नहीं कराता और बीमारी की स्थिति में समुचित उपचार की व्यवस्था भी नहीं करता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घर और जमीन के बंटवारे को लेकर विवाद होता है तथा उन्हें घर छोड़कर चले जाने के लिए कहा जाता है।
बुजुर्ग दंपति ने अपनी दिव्यांग बेटी की देखभाल को लेकर भी चिंता जताई। उम्र और परिस्थितियों के बीच खुद को असहाय महसूस कर रहे दंपति ने पुलिस से संरक्षण और आवश्यक सहायता दिलाने की मांग की।
शिकायत मिलते ही सक्रिय हुई चक्रधरनगर पुलिस
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसएसपी शशि मोहन सिंह ने थाना प्रभारी चक्रधरनगर को उचित वैधानिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस ने खीरसागर पटनायक को थाने बुलाया। शिकायतकर्ता बुजुर्ग दंपति भी वहां उपस्थित हुए।
पुलिस के अनुसार, इसी दौरान साहेबानी पटनायक की तबीयत बिगड़ गई। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने तत्काल उन्हें अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की। इसके बाद उप निरीक्षक गेंदलाल साहू और सहायक उप निरीक्षक आशिक रात्रे ने बेटे को माता-पिता के प्रति उसके नैतिक और कानूनी दायित्वों की जानकारी देते हुए समझाइश दी।
पुलिस की इस कार्रवाई का उद्देश्य शिकायत को गंभीरता से लेते हुए बुजुर्ग दंपति की सुरक्षा और भरण-पोषण से जुड़े पहलुओं पर आवश्यक कदम उठाना है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित प्राधिकारी की प्रक्रिया और दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही निकाला जाएगा।
अब एसडीएम के स्तर पर होगी आगे की कार्रवाई
पुलिस ने माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत आगे की कार्रवाई के लिए एसडीएम रायगढ़ को प्रतिवेदन प्रेषित किया है। अब संबंधित प्राधिकारी मामले के तथ्यों और दोनों पक्षों के पक्ष को सुनकर नियमानुसार निर्णय लेगा।
उल्लेखनीय है कि वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और संरक्षण के लिए कानून में प्रावधान किए गए हैं। ऐसे मामलों में संबंधित प्राधिकारी तथ्यों के आधार पर भरण-पोषण की जिम्मेदारी और उपलब्ध कानूनी उपायों पर विचार कर सकता है। इस प्रकरण में प्रतिवेदन भेजा जाना आगे की प्रक्रिया की पहल है; इसे अंतिम आदेश या दोष सिद्ध होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
बुजुर्गों की उपेक्षा केवल पारिवारिक मामला नहीं
इस घटना ने एक महत्वपूर्ण सामाजिक प्रश्न खड़ा किया है। जिन माता-पिता ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा परिवार की जिम्मेदारियां निभाने में बिताया, यदि उन्हें वृद्धावस्था में भोजन, इलाज और दैनिक जरूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़े, तो यह समाज और परिवार दोनों के लिए चिंतन का विषय है।
बुजुर्गों की देखभाल केवल भावनात्मक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार कानूनी दायित्व का विषय भी हो सकती है। विशेषकर तब, जब वृद्ध व्यक्ति शारीरिक रूप से कमजोर हों और अपने दैनिक कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर हों। ऐसे मामलों में शिकायतों की निष्पक्ष जांच, बुजुर्गों की सुरक्षा और संबंधित पक्षों को सुनते हुए समय पर कार्रवाई आवश्यक है।
एसएसपी का संदेश—बुजुर्गों को सम्मान और सुरक्षा देना जरूरी
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि माता-पिता की सेवा और देखभाल प्रत्येक संतान का नैतिक दायित्व है। बुजुर्गों के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए और उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि माता-पिता के भरण-पोषण एवं संरक्षण के लिए कानून में प्रावधान हैं और शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
रायगढ़ पुलिस ने भी लोगों से अपील की है कि परिवार के वरिष्ठ सदस्यों की देखभाल, सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करें। वृद्धावस्था में अपनों का साथ, समय पर उपचार और बुनियादी जरूरतों की पूर्ति किसी भी बुजुर्ग के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
फिलहाल, बैजनाथ पटनायक और साहेबानी पटनायक की शिकायत पर पुलिस ने प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए मामला आगे की प्रक्रिया के लिए एसडीएम रायगढ़ को भेजा है। अब संबंधित प्राधिकारी की कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि बुजुर्ग दंपति की शिकायत के निराकरण और उनके भरण-पोषण एवं संरक्षण के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
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