महरा/माहरा समाज की ST में शामिल होने की मांग पर बढ़ी हलचल, केंद्र से राज्य को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र

जनगणना वर्गीकरण और अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग पर आगे बढ़ी प्रशासनिक प्रक्रिया, अब राज्य स्तर पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी समाज की निगाहें
रायपुर। छत्तीसगढ़ के महरा/माहरा समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची में शामिल करने की मांग एक बार फिर चर्चा में है। समुदाय की ओर से लंबे समय से उठाई जा रही इस मांग को लेकर केंद्र सरकार के अधीन जनगणना संबंधी कार्यालयों के बीच पत्राचार हुआ है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, मामले को आवश्यक कार्रवाई के लिए जनगणना कार्य निदेशालय, छत्तीसगढ़ तक पहुंचाया गया है। इससे समाज की मांग पर प्रशासनिक स्तर पर आगे की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद जरूर बढ़ी है, लेकिन अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने को लेकर अभी किसी अंतिम निर्णय की पुष्टि नहीं होती है।
मामले का केंद्र महरा/माहरा समुदाय को अनुसूचित जाति (SC) की श्रेणी से अनुसूचित जनजाति (ST) की श्रेणी में शामिल करने की मांग है। इसके साथ ही समाज ने जनगणना में समुदाय की पहचान और वर्गीकरण को नियमानुसार दर्ज किए जाने का विषय भी उठाया है। अब देखना होगा कि संबंधित राज्य और केंद्रीय स्तर के प्राधिकारी इस मांग पर आगे क्या कदम उठाते हैं।
अप्रैल में भेजा गया था मांग से संबंधित पत्र
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, दुर्ग जिले के संयुक्त महरा/माहरा समाज छत्तीसगढ़ की ओर से 29 अप्रैल 2026 को भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय, नई दिल्ली को पत्र भेजा गया था। इस पत्र के माध्यम से समुदाय को अनुसूचित जाति से अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल करने तथा जनगणना के दौरान उचित वर्गीकरण सुनिश्चित करने की मांग रखी गई थी।
समाज की ओर से वरिष्ठ उपाध्यक्ष लखन लाल मेश्राम ने इस विषय को उठाया था। मांग से संबंधित पत्र मिलने के बाद भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय ने मामले को आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए जनगणना कार्य निदेशालय, छत्तीसगढ़ को भेजा।
9 जून के पत्र से सामने आई प्रशासनिक पहल
दस्तावेज के अनुसार, जनगणना कार्य निदेशालय, छत्तीसगढ़ की ओर से 9 जून 2026 को डिजिटल हस्ताक्षरित पत्र जारी किया गया। इसमें संबंधित मामले को आवश्यक कार्रवाई के लिए अग्रेषित किए जाने का उल्लेख है।
यह पत्राचार इस बात का संकेत है कि समाज की ओर से प्रस्तुत मांग संबंधित कार्यालयों तक पहुंची है और उसे आगे की प्रक्रिया के लिए भेजा गया है। हालांकि, किसी मांग को संबंधित विभाग तक अग्रेषित किया जाना और उस पर अंतिम स्वीकृति मिलना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। इसलिए इसे महरा/माहरा समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिलने की मंजूरी के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
फिलहाल उपलब्ध दस्तावेजों से इतना ही स्पष्ट होता है कि मामले में प्रशासनिक स्तर पर पत्राचार हुआ है। राज्य सरकार ने इस विषय पर क्या अनुशंसा की है, कोई औपचारिक प्रस्ताव भेजा गया है या आगे की जांच पूरी हुई है, इसकी पुष्टि के लिए संबंधित विभागों से जानकारी आवश्यक होगी।
समाज की मांग के पीछे क्या है प्रमुख मुद्दा?
महरा/माहरा समाज की प्रमुख मांग है कि समुदाय की सामाजिक स्थिति, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और संबंधित तथ्यों पर विचार करते हुए उसे अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए। इसके साथ ही जनगणना के दौरान समुदाय की पहचान और वर्गीकरण को लेकर भी स्पष्टता की अपेक्षा की जा रही है।
समाज के लिए यह विषय केवल एक प्रशासनिक श्रेणी तक सीमित नहीं है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की संवैधानिक श्रेणियों से जुड़े अधिकार, सरकारी योजनाओं का लाभ तथा आरक्षण संबंधी प्रावधान निर्धारित कानूनी व्यवस्था के अधीन आते हैं। ऐसे में समुदाय की मांग पर निर्णय लेने के लिए संबंधित तथ्यों, दस्तावेजों और निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया का परीक्षण महत्वपूर्ण होगा।
अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिलने की प्रक्रिया आसान नहीं
किसी समुदाय को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करना सामान्य प्रशासनिक आदेश से पूरा होने वाला मामला नहीं है। इसके लिए निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है। इसमें संबंधित राज्य सरकार की अनुशंसा, भारत के रजिस्ट्रार जनरल की भूमिका, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग से संबंधित परीक्षण और केंद्र सरकार के स्तर पर आवश्यक कार्रवाई जैसी प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं। अंतिम बदलाव के लिए संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत निर्धारित प्रक्रिया और संसदीय कार्रवाई महत्वपूर्ण होती है।
इसी कारण किसी आवेदन को स्वीकार कर आगे भेजे जाने, उस पर विचार किए जाने और समुदाय को आधिकारिक रूप से अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किए जाने के बीच अंतर समझना जरूरी है। जब तक निर्धारित प्रक्रिया पूरी नहीं होती और आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आता, तब तक समुदाय की मौजूदा संवैधानिक स्थिति में बदलाव मानकर चलना उचित नहीं होगा।
अब आगे की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
महरा/माहरा समाज की इस मांग पर आगे क्या निर्णय होता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल पत्राचार से समाज को अपनी मांग आगे बढ़ने की उम्मीद मिली है। अब संबंधित राज्य स्तरीय विभागों और सक्षम प्राधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
समाज की अपेक्षा है कि मामले का परीक्षण तथ्यों और निर्धारित नियमों के आधार पर किया जाए तथा आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट की जाए। दूसरी ओर, इस विषय पर किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले संबंधित विभागों की आधिकारिक प्रतिक्रिया और निर्णय की प्रतीक्षा करना जरूरी है।
फिलहाल तस्वीर यही है कि महरा/माहरा समुदाय की अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग प्रशासनिक पत्राचार के स्तर पर आगे बढ़ी है, लेकिन अंतिम मंजूरी की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस घटनाक्रम को संभावित प्रक्रिया की शुरुआत के रूप में देखना अधिक तथ्यपरक होगा, न कि दर्जा मिलने के निर्णय के रूप में।
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