NTPC तलाईपाली परियोजना से प्रभावित 8 गांवों के किसानों ने उठाई मुआवजा, रोजगार और पुनर्वास की मांग

कट-ऑफ डेट में समानता से लेकर पीएपी कार्ड और बस्ती में बुनियादी सुविधाओं तक छह बिंदुओं पर निराकरण की मांग

घरघोड़ा। एनटीपीसी तलाईपाली परियोजना से प्रभावित आठ गांवों के किसानों ने भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, रोजगार और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों को लेकर एक बार फिर अपनी मांगें सामने रखी हैं। प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना के लिए उनकी भूमि और अन्य परिसंपत्तियों का अधिग्रहण किया गया है, लेकिन इससे जुड़े कुछ महत्वपूर्ण विषयों का निराकरण अब भी अपेक्षित है। इसी सिलसिले में ग्रामीणों ने 5 अक्टूबर 2026 को एनटीपीसी कार्यालय में आयोजित बैठक के दौरान छह प्रमुख मांगें रखीं और अब उनके समाधान के लिए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), घरघोड़ा को आवेदन प्रस्तुत किया है।
आवेदन में तिलाईपाली, विच्छीनारा, रायकेरा, नयारामपुर, अजीतगढ़, साल्हेपाली, चोटीगुड़ा और कुघूरमौहा गांव के प्रभावित किसानों की ओर से विभिन्न समस्याओं के निराकरण की मांग की गई है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि भूमि अधिग्रहण के बाद प्रभावित परिवारों के सामने रोजगार, उचित मुआवजे और पुनर्वास स्थल पर बुनियादी सुविधाओं जैसे सवाल महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

कट-ऑफ डेट में समानता की मांग
प्रभावित किसानों की पहली मांग शासकीय और निजी भूमि के लिए कट-ऑफ डेट के निर्धारण से जुड़ी है। आवेदन में कहा गया है कि जिस प्रकार शासकीय भूमि के मामले में वर्ष 2014-15 को आधार तिथि माना गया है, उसी प्रकार निजी भूमि के मामले में भी समान आधार तिथि निर्धारित की जाए। किसानों का मानना है कि इस विषय पर स्पष्टता आने से मुआवजे और अन्य संबंधित लाभों को लेकर बनी असमंजस की स्थिति दूर हो सकती है। हालांकि, इस मांग पर लागू नियमों और परियोजना के प्रासंगिक अभिलेखों के आधार पर प्रशासनिक परीक्षण आवश्यक होगा।

स्थानीय प्रभावितों को रोजगार में प्राथमिकता देने पर जोर
ग्रामीणों ने एनटीपीसी और उससे संबंधित ठेका कंपनियों में रोजगार केq1 अवसरों में परियोजना प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता देने की मांग की है। उनका कहना है कि परियोजना के कारण जिन परिवारों की जमीन और अन्य परिसंपत्तियां प्रभावित हुई हैं, उन्हें रोजगार के अवसरों में उचित प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
यह मांग इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भूमि अधिग्रहण के बाद कई परिवारों के सामने आजीविका के वैकल्पिक साधन तलाशने की चुनौती रहती है। ग्रामीण चाहते हैं कि परियोजना में उपलब्ध रोजगार के अवसरों का लाभ स्थानीय प्रभावित परिवारों तक पहुंचे।
मकानों के मुआवजे में छूटे मामलों के सुधार की मांग
आवेदन में मकानों के सर्वे और मुआवजा निर्धारण से जुड़ी समस्या भी उठाई गई है। प्रभावित किसानों के अनुसार, मकानों के सर्वे के दौरान कुछ मामलों में मकानों का उचित आकलन नहीं हुआ अथवा संबंधित मुआवजा प्रदान नहीं किया गया। ऐसे मामलों में त्रुटियों का परीक्षण कर आवश्यक सुधार करने और पात्र प्रभावित परिवारों को नियमानुसार मुआवजा देने की मांग की गई है।
ग्रामीणों ने इस विषय पर दोबारा जांच और अभिलेखों के सत्यापन की आवश्यकता जताई है, ताकि किसी पात्र परिवार को सर्वे या मूल्यांकन संबंधी त्रुटि के कारण नुकसान न उठाना पड़े।
तेंदूपत्ता मुआवजे के लिए बिलासपुर जाने की सुविधा मांगी
प्रभावित ग्रामीणों ने तेंदूपत्ता से संबंधित मुआवजे के मामले में भी अपनी बात रखी है। आवेदन के मुताबिक, इस विषय के निराकरण के लिए बिलासपुर स्थित संभागीय आयुक्त कार्यालय आने-जाने हेतु वाहन सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित प्रक्रिया में प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहयोग मिले, ताकि वे अपने प्रकरणों के निराकरण के लिए संबंधित कार्यालय तक पहुंच सकें। इस मांग पर संबंधित विभाग और प्रशासन की ओर से क्या व्यवस्था की जाती है, यह आगे महत्वपूर्ण रहेगा।
पीएपी कार्ड और पुनर्वास स्थल पर मूलभूत सुविधाओं का मुद्दा
प्रभावित किसानों ने परियोजना प्रभावित व्यक्ति (पीएपी) कार्ड उपलब्ध कराने की मांग भी आवेदन में शामिल की है। ग्रामीणों के अनुसार, प्रभावित परिवारों की पहचान और उनसे संबंधित पात्रता एवं सुविधाओं की प्रक्रिया स्पष्ट होना आवश्यक है। ऐसे में पात्र परिवारों को नियमानुसार पीएपी कार्ड जारी करने की मांग की गई है।
इसके अलावा, नई बस्ती में रह रहे अथवा बसाए जाने वाले प्रभावित परिवारों के लिए बिजली, पेयजल और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठाई गई है। ग्रामीणों का कहना है कि पुनर्वास की प्रक्रिया केवल स्थान परिवर्तन तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि वहां सम्मानजनक जीवन के लिए आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित होनी चाहिए।
प्रशासन और परियोजना प्रबंधन की भूमिका पर टिकी निगाहें
सूरज गुप्ता के नेतृत्व में आठ गांवों के प्रभावित किसानों की ओर से प्रस्तुत आवेदन में कुल छह मांगों के निराकरण का आग्रह किया गया है। इनमें कट-ऑफ डेट, रोजगार में प्राथमिकता, मकानों के मुआवजे में सुधार, तेंदूपत्ता मुआवजे के लिए परिवहन सुविधा, पीएपी कार्ड तथा नई बस्ती में बिजली-पानी-सड़क की व्यवस्था प्रमुख हैं।
अब इन मांगों पर प्रशासन, एनटीपीसी प्रबंधन और संबंधित विभागों की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर प्रभावित परिवारों की निगाहें टिकी हैं। मांगों के निराकरण के लिए संबंधित अभिलेखों की जांच, पात्रता का परीक्षण और जिम्मेदार विभागों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल, प्रभावित ग्रामीणों की प्रमुख अपेक्षा यही है कि बैठक में उठाए गए मुद्दों पर केवल चर्चा तक सीमित रहने के बजाय नियमानुसार स्पष्ट निर्णय लिए जाएं और पात्र परिवारों को समयबद्ध राहत मिल सके।
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