मन की बात बनाम जनता की बात: धरमजयगढ़ में सांसद–विधायक आमने-सामने, विकास के दावों पर छिड़ी सीधी राजनीतिक जंग

Journalist Amardeep Chauhan
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धरमजयगढ़/रायगढ़। ‘मन की बात’ के बहाने शुरू हुई राजनीतिक बहस अब धरमजयगढ़ की जमीन पर सीधे टकराव में बदल गई है। रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र के सांसद राधेश्याम राठिया के बयान के बाद तीन बार के विधायक लालजीत सिंह राठिया ने न केवल तीखा पलटवार किया है, बल्कि अपने पूरे कार्यकाल का विकास रिपोर्ट कार्ड सामने रखते हुए सांसद से भी उनके संसदीय प्रदर्शन का हिसाब मांग लिया है। इस घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है, जहां अब मुद्दा केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि “किसने कितना काम किया” के सार्वजनिक परीक्षण तक पहुंच चुका है।
सांसद के सवाल, विधायक का सीधा जवाब
सांसद राधेश्याम राठिया ने हाल ही में आयोजित कार्यक्रम के दौरान यह सवाल उठाया था कि तीन बार विधायक रहने के बावजूद क्षेत्र में अपेक्षित विकास क्यों नजर नहीं आता। उन्होंने तंज कसते हुए पेट्रोल पंप, मंदिर और तालाब जैसे कार्यों का उल्लेख कर विकास के दावों को सीमित और अपर्याप्त बताया था।
विधायक लालजीत सिंह राठिया ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विकास का आकलन राजनीतिक मंचों से दिए गए बयानों से नहीं, बल्कि धरातल पर बने ढांचों और जनता को मिली सुविधाओं से होना चाहिए। उन्होंने आरोपों को “तथ्यों से परे” बताते हुए अपने कार्यकाल में कराए गए कार्यों की विस्तृत सूची सार्वजनिक की।
पुल, सड़क और भवन: गिनाए ठोस काम
विधायक ने अपने जवाब में मालपानी, साजापाली, कुदमुरा, इमलीटिकरा, बरतापाली, कुडेकेला, बनहर, महाराजगंज, बोकरामुड़ा और डोंगाघाट जैसे क्षेत्रों में बने पुलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं ने ग्रामीण संपर्क व्यवस्था को मजबूत किया है।
सड़क निर्माण को लेकर उन्होंने हाटी–धरमजयगढ़ मार्ग का उदाहरण देते हुए भाजपा के पूर्व शासनकाल पर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि वर्षों तक यह सड़क सिंगल लेन ही रही, जबकि इसके उन्नयन की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। उन्होंने दावा किया कि सड़क निर्माण की दिशा में ठोस पहल कांग्रेस शासनकाल में हुई।
“जहां कार्यक्रम, वहां सड़क भी हमारी”
मुनुन्द गांव में आयोजित ‘मन की बात’ कार्यक्रम का जिक्र करते हुए विधायक ने कहा कि जिस गांव में कार्यक्रम किया गया, वहां मुख्य सड़क से गांव तक पहुंचने का मार्ग भी उनके कार्यकाल में स्वीकृत हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि धरमजयगढ़ का राठिया भवन, जहां कई राजनीतिक बैठकें होती हैं, उसका निर्माण भी उनके ही कार्यकाल में हुआ है।
अडानी पुरुंगा कोल ब्लॉक बना नया राजनीतिक केंद्र
मामला केवल विकास कार्यों तक सीमित नहीं रहा। अडानी के प्रस्तावित पुरुंगा कोल ब्लॉक को लेकर चल रहे विरोध आंदोलन को भी विधायक ने इस बहस के केंद्र में ला दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब प्रभावित ग्रामीण समर्थन मांगने सांसद के पास पहुंचे, तब उनकी ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई।
विधायक ने कहा कि जनप्रतिनिधि का दायित्व केवल योजनाएं गिनाना नहीं, बल्कि संकट के समय जनता के साथ खड़ा होना भी है। उन्होंने खुद को ग्रामीणों के आंदोलन के साथ लगातार जुड़ा हुआ बताया और जल, जंगल, जमीन के मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही।
“मन की बात सुनते हैं, जनता की भी सुन लेते”
राजनीतिक तंज को धार देते हुए विधायक ने कहा, “आप जैसे मोदी जी के ‘मन की बात’ सुन रहे हैं, वैसे ही जनता की ‘मन की बात’ भी सुन लेते तो जनता के बीच जाने में झिझक नहीं होती।” यह बयान अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।
सांसद से मांगा रिपोर्ट कार्ड
पलटवार को आगे बढ़ाते हुए विधायक लालजीत सिंह राठिया ने सांसद से यह भी पूछा कि उन्होंने अपने संसदीय कार्यकाल के दौरान रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र की समस्याओं को संसद में कितनी प्रभावी ढंग से उठाया और उनके समाधान के लिए क्या पहल की। उन्होंने कहा कि जनता को दोनों जनप्रतिनिधियों के काम का तुलनात्मक आकलन करने का अधिकार है।
सियासत में ‘विकास बनाम दावा’ की सीधी लड़ाई
धरमजयगढ़ की राजनीति अब एक नए मोड़ पर खड़ी है, जहां आरोप–प्रत्यारोप से आगे बढ़कर विकास कार्यों की वास्तविकता पर सीधी बहस शुरू हो गई है। एक ओर सांसद सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी ओर विधायक आंकड़ों और परियोजनाओं के साथ जवाब दे रहे हैं।
आने वाले दिनों में यह टकराव और तेज होने के संकेत हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जनता किसके दावों को विश्वसनीय मानती है—और क्या यह बहस केवल बयानबाजी तक सीमित रहेगी या वास्तविक जवाबदेही की दिशा में आगे बढ़ेगी।
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