“36 घंटे में पुलिस का एक्शन: IGKV पेपर लीक में प्रोफेसर बना ‘डीलर’, 6 आरोपी गिरफ्तार”

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायपुर, 24 अगस्त 2026।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) से जुड़े बी.एससी. (कृषि) द्वितीय वर्ष की कीटशास्त्र (AGCH-221) परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले में रायपुर पुलिस ने महज 36 घंटे के भीतर बड़ा खुलासा करते हुए मुख्य आरोपी प्रोफेसर सहित कुल 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट तथा थाना तेलीबांधा की संयुक्त टीम ने की, जिसने तेजी और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया।
लिफाफे में छेद कर बनाया वीडियो, 11 हजार में सौदा
जांच में सामने आया है कि इस पूरे घटनाक्रम का मास्टरमाइंड दुर्ग स्थित भारती एग्रीकल्चर कॉलेज का प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया (38) है। वह पिछले करीब एक वर्ष से परीक्षा से संबंधित गोपनीय कार्यों—उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने और प्रश्नपत्र लाने—में संलग्न था।
17 अगस्त को उसे आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र सौंपे गए थे। आरोप है कि उसने 20 अगस्त की परीक्षा का प्रश्नपत्र चुपके से अपने घर ले जाकर सुई और नुकीले औजार की मदद से लिफाफे में सूक्ष्म छेद किया और मोबाइल से उसका वीडियो बना लिया।
इसके बाद उसने यह सामग्री अपने ही कॉलेज के छात्र अजय नायक को 11,000 रुपये में बेच दी। देखते ही देखते यह वीडियो अन्य छात्रों और सोशल मीडिया ग्रुप्स में वायरल हो गया।
परीक्षा से पहले मिली सूचना, तत्काल दर्ज हुआ मामला
20 अगस्त की सुबह परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले प्रश्नपत्र वायरल होने की सूचना कवर्धा कृषि महाविद्यालय और संबंधित अधिकारियों तक पहुंची। वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं परीक्षा प्रभारी डॉ. एन.आर. रंगारे की शिकायत पर थाना तेलीबांधा में अपराध दर्ज किया गया।
पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अमित तुकाराम कांबले, डीसीपी (क्राइम एवं साइबर) स्मृतिक राजनाला और डीसीपी (उत्तर) तारकेश्वर पटेल की निगरानी में विशेष टीमों का गठन किया गया।
रायपुर, दुर्ग, कबीरधाम और बिलासपुर में एक साथ छापेमारी कर डिजिटल साक्ष्यों की बारीकी से जांच की गई। व्हाट्सएप चैट, कॉल डिटेल और सोशल मीडिया गतिविधियों के विश्लेषण के बाद दुर्ग निवासी अनुज मिंज को हिरासत में लिया गया, जिससे पूछताछ के दौरान पूरा नेटवर्क उजागर हुआ।
जब्ती और कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 11 हजार रुपये नकद, 6 मोबाइल फोन, वीडियो रिकॉर्डिंग उपकरण, केबल, कनेक्टर सहित सुई, सूजा और फेविकोल जैसे उपकरण जब्त किए हैं।
सभी आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2008 की धारा 4, 5, 10 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316 के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले में दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।
गिरफ्तार आरोपी
गिरफ्तार आरोपियों में प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया (मुख्य आरोपी), अजय नायक, त्रिदेव पटेल, नितिन पाण्डेय, अनुज मिंज और आदित्य साहू शामिल हैं। सभी का आपसी संपर्क डिजिटल माध्यमों के जरिए स्थापित हुआ था।
टिप्पणी: ‘लीक’ नहीं, लालच का नेटवर्क
प्रारंभिक जांच यह संकेत देती है कि ऐसे मामलों में प्रश्नपत्र “लीक” होने से अधिक, संस्थागत जिम्मेदारी में सेंध और व्यक्तिगत लालच की भूमिका अहम होती है। कुछ लोग पैसे के लिए गोपनीयता तोड़ते हैं, तो कुछ छात्र अवैध लाभ लेने के लिए इसे खरीदते हैं।
देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर समय-समय पर उठते सवालों के बीच यह घटना एक बार फिर व्यवस्था की कमजोर कड़ियों को उजागर करती है। हाल के विरोध प्रदर्शनों से सबक लेते हुए अब आवश्यक है कि न केवल निगरानी तंत्र को और सख्त किया जाए, बल्कि परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
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