समधन की हत्या के दोषी को उम्रकैद: घरघोड़ा अपर सत्र न्यायालय का कड़ा फैसला, पीड़ित परिवार को मुआवजे की अनुशंसा

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
घरघोड़ा (रायगढ़), 24 जुलाई 2026।
गंभीर आपराधिक मामलों में न्यायिक सख्ती का एक और उदाहरण पेश करते हुए घरघोड़ा के अपर सत्र न्यायालय ने हत्या के एक बहुचर्चित मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने मामले की सुनवाई के बाद आरोपी मनी राम मझवार को उसकी समधन रमनिया बाई की हत्या का दोषी ठहराते हुए कठोर दंडादेश पारित किया।
अपर सत्र न्यायाधीश श्री अभिषेक शर्मा की अदालत ने न केवल आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई, बल्कि ₹1000 के अर्थदंड से भी दंडित किया है। साथ ही, मृतिका के विधिक वारिसों को ₹1,00,000 की क्षतिपूर्ति राशि प्रदान किए जाने की अनुशंसा विधिक सेवा प्राधिकरण रायगढ़ के माध्यम से की गई है।
घटना का पृष्ठभूमि और जांच:
मामले की जानकारी देते हुए अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने बताया कि थाना कापू में दर्ज अपराध क्रमांक 22/2021 के अनुसार, ग्राम सरिया मड़वा ताल निवासी धन सिंह मझवार ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि 21 फरवरी 2021 को वह अपनी पत्नी के साथ शादी के कपड़े खरीदने ग्राम बनिया गया था और 24 फरवरी की सुबह घर लौटने पर उसके पुत्र दीपक ने चौंकाने वाली जानकारी दी।
दीपक ने बताया कि तड़के सुबह लगभग 5 से 6 बजे के बीच उसके दादा, आरोपी मनी राम मझवार ने उसकी नानी रमनिया बाई पर टांगी से वार कर उनकी निर्मम हत्या कर दी।
सूचना मिलते ही तत्कालीन थाना प्रभारी कापू धनी राम राठौर ने मामला दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की। पुलिस ने वैज्ञानिक एवं सूक्ष्म जांच के माध्यम से साक्ष्यों का संकलन करते हुए आरोपी के खिलाफ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 302 के तहत चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया।
न्यायालय का निर्णय:
विचारण के दौरान न्यायालय ने सभी साक्ष्यों, गवाहों के बयान तथा अभियोजन एवं बचाव पक्ष के तर्कों का गहन परीक्षण किया। साक्ष्यों की पुष्टि और परिस्थितियों की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने आरोपी को हत्या का दोषी माना और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
संदेश और महत्व:
यह फैसला न केवल एक जघन्य अपराध में न्याय की स्थापना करता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि पारिवारिक संबंधों में हुए अपराधों को भी न्यायालय गंभीरता से लेते हुए कठोर दंड देने से पीछे नहीं हटता। साथ ही, पीड़ित परिवार को क्षतिपूर्ति की अनुशंसा न्याय व्यवस्था के मानवीय पक्ष को भी दर्शाती है।
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