जंतर-मंतर बना युवाओं के गुस्से का केंद्र: पेपर लीक के खिलाफ देशव्यापी आक्रोश, सरकार से टकराव के बीच आंदोलन तेज

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली का इन दिनों देशभर के युवाओं के आक्रोश का सबसे बड़ा मंच बन गया है। प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों, विशेषकर NEET विवाद, ने छात्रों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। पिछले कई दिनों से चल रहा यह आंदोलन अब केवल छात्रों का विरोध नहीं, बल्कि एक व्यापक जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है।
धरना स्थल पर हजारों की संख्या में छात्र-युवा डटे हुए हैं और उनकी मुख्य मांग शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की है। आंदोलनकारी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं और साफ संकेत दे चुके हैं कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच वार्ता का दौर शुरू जरूर हुआ है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आ पाया है। सूत्रों के अनुसार सरकार ने कुछ समय मांगा है, जबकि आंदोलनकारी तत्काल निर्णय की मांग कर रहे हैं। इस बीच राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और जंतर-मंतर के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
20 जुलाई को हुए टकराव ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया था। इस दौरान कई छात्र घायल हुए, जिनमें कुछ को गंभीर चोटें आईं। घटना के बाद प्रशासन और भी सतर्क हो गया है, जबकि प्रदर्शनकारियों में नाराजगी और बढ़ गई है।
आंदोलन को सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है। चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता ने भी इस मुद्दे को लेकर भूख हड़ताल की थी, जिसे उन्होंने सरकार से बातचीत के बाद समाप्त कर दिया। हालांकि, उन्होंने साफ कहा है कि छात्रों की मांगें पूरी होना अभी बाकी है।
दिल्ली मेट्रो सेवाओं पर भी इस आंदोलन का असर साफ दिखाई दे रहा है। सुरक्षा कारणों से कई मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद किया गया है, जिससे आम यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा अब गर्माने लगा है। विपक्षी दल सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगा रहे हैं, वहीं सत्ता पक्ष स्थिति को नियंत्रित करने और समाधान निकालने की कोशिश में जुटा हुआ है।
कुल मिलाकर, जंतर-मंतर पर चल रहा यह आंदोलन देश की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और आंदोलन की दिशा तय करेगी कि यह विरोध कितनी दूर तक जाता है और क्या यह कोई ठोस बदलाव ला पाता है या नहीं।
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