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“रात का कहर: हाथियों ने उजाड़े 9 घर, खेत रौंदे; पूरे इलाके में डर की दस्तक”

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com

रायगढ़, 15 जुलाई 2026।
धरमजयगढ़ वन मंडल के कापू रेंज में बीती रात एक बार फिर जंगली हाथियों का कहर देखने को मिला। भोजन की तलाश में गांवों में घुसे हाथियों के दल ने 9 ग्रामीणों के मकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया, वहीं 10 किसानों की फसलों को रौंदकर भारी नुकसान पहुंचाया। रातभर चले इस उत्पात के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

गांव-गांव में तबाही के निशान

मिली जानकारी के अनुसार, कापू रेंज के अलग-अलग गांवों में हाथियों ने जमकर उत्पात मचाया। गंझू राम कोरवा, रतिराम, अमीरसाय, बुधिराम, सुखदेव, घुरटीबाई और बालकुंवर के घरों को नुकसान पहुंचाया गया। वहीं अलोला क्षेत्र में मनीजर किस्पोट्टा और शनि लकड़ा के मकान भी हाथियों के हमले से नहीं बच सके।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब हाथियों ने एक किसान दिलीप के अहाते को तोड़ते हुए वहां खड़ी कार को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। इसके साथ ही कई गांवों में खेतों में खड़ी फसलों को रौंद दिया गया, जिससे किसानों को आर्थिक चोट पहुंची है।

फसलें बर्बाद, आजीविका पर संकट

ग्रामीणों के मुताबिक, हाथियों का दल अलग-अलग इलाकों में घूमते हुए धान और अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। लगातार हो रही घटनाओं से किसान चिंतित हैं, क्योंकि यह नुकसान सीधे उनकी आजीविका से जुड़ा है।

‘रात होते ही बढ़ जाता है डर’

कापू क्षेत्र के ग्रामीण बताते हैं कि पिछले कई दिनों से एक मादा हाथी अपने शावक के साथ इलाके में विचरण कर रही है। रात होते ही ये हाथी गांवों की ओर रुख करते हैं और घरों तथा खेतों को नुकसान पहुंचाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि “अब हालात ऐसे हो गए हैं कि सूरज ढलते ही गांव में डर का साया फैल जाता है।”

इलाके में हाथियों की बड़ी मौजूदगी

वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, धरमजयगढ़ वन मंडल में करीब 97 हाथी अलग-अलग दलों में विचरण कर रहे हैं, जिनमें 36 नर, 41 मादा और 20 शावक शामिल हैं। वहीं रायगढ़ वन मंडल में भी 56 हाथियों की मौजूदगी दर्ज की गई है, जो अलग-अलग रेंज में सक्रिय हैं।

वन विभाग अलर्ट, निगरानी तेज

घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और नुकसान का आंकलन शुरू कर दिया गया है। कापू वन परिक्षेत्र अधिकारी के अनुसार,

हाथियों के मूवमेंट पर दिन-रात नजर रखी जा रही है

गांवों में मुनादी कर लोगों को सतर्क किया जा रहा है

ग्रामीणों से हाथियों से दूरी बनाए रखने की अपील की गई है


सवाल वही: समाधान कब?

रायगढ़ जिले में हाथियों का आतंक कोई नई बात नहीं है, लेकिन लगातार बढ़ रही घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि मानव-वन्यजीव संघर्ष अब गंभीर रूप ले चुका है।
प्रश्न यह है कि क्या केवल मुनादी और निगरानी से समस्या सुलझेगी, या फिर दीर्घकालिक समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे?

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Amar Chouhan

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