बीमारी का बहाना बनाकर बिना प्रभार दिए भागे तहसीलदार, भड़के रायगढ़ कलेक्टर ने थमाया नोटिस

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़: सरकारी तंत्र में मनमानी और अनुशासनहीनता के खिलाफ रायगढ़ कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने एक बार फिर कड़ा हंटर चलाया है। अपनी मर्जी से छुट्टी तय कर मुख्यालय छोड़ने वाले कापू तहसीलदार उन्मेश पटेल को कलेक्टर ने कड़ी फटकार लगाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। साफ चेतावनी दी गई है कि इस स्वेच्छाचारिता पर 24 घंटे के भीतर जवाब दाखिल करें, वरना अनुशासनात्मक कार्रवाई भुगतने के लिए तैयार रहें।
एसडीएम को थमाया सूचना पत्र और खुद ही ले ली छुट्टी
पूरा मामला प्रशासनिक व्यवस्था को ठेंगा दिखाने का है। बताया जा रहा है कि तहसीलदार उन्मेश पटेल ने खुद को टायफाइड होने का हवाला देते हुए रायगढ़ के डॉ. पीके गुप्ता का एक मेडिकल सर्टिफिकेट संलग्न किया। लेकिन इसके बाद उन्होंने जो किया, उसने उनकी घोर लापरवाही को उजागर कर दिया। तहसीलदार ने विधिवत अवकाश स्वीकृत कराने के बजाय एसडीएम को केवल एक सूचना पत्र भेजा और 10 जुलाई से सीधे सात दिन के अवकाश पर चले गए।
तहसील खाली छोड़ भागे साहब, जनता परेशान
सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि तहसीलदार ने छुट्टी पर जाने से पहले अपनी तहसील का प्रभार किसी दूसरे अधिकारी को सौंपना भी मुनासिब नहीं समझा। बिना किसी को प्रभार दिए वे स्वेच्छा से मुख्यालय छोड़कर गायब हो गए। इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण कापू तहसील के सरकारी कामकाज ठप पड़ गए और सुदूर अंचलों से अपनी समस्याओं को लेकर आने वाली आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कलेक्टर का दो टूक वार: छुट्टी का आवेदन देना, मंजूरी की गारंटी नहीं
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है। शो-कॉज नोटिस में स्पष्ट शब्दों में कहा गया है कि केवल अवकाश का आवेदन दे देना ही उसकी स्वीकृति का आधार नहीं माना जा सकता। जब तक सक्षम अधिकारी द्वारा छुट्टी मंजूर न की जाए, तब तक मुख्यालय छोड़ना नियमों का खुला उल्लंघन है। कलेक्टर ने तल्ख लहजे में कहा कि बिना अनुमति के इस तरह गायब होना पदीय दायित्वों के प्रति घोर लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और वरिष्ठों के आदेशों की खुली अवहेलना को दर्शाता है।
कई फाइलों की जांच के भी आदेश, बढ़ सकती हैं मुश्किलें
प्रशासनिक गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, कलेक्टर ने सिर्फ नोटिस देकर ही बात खत्म नहीं की है। तहसीलदार उन्मेश पटेल के कार्यकाल के दौरान निपटाए गए और लंबित पड़े कुछ बेहद संवेदनशील राजस्व प्रकरणों की जांच के भी आदेश जारी कर दिए गए हैं। ऐसे में 24 घंटे के भीतर यदि तहसीलदार का संतोषजनक जवाब नहीं आता है, तो कापू तहसीलदार की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ना तय माना जा रहा है।
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