राज्य महिला आयोग समेत कई निगम, मंडलों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्य नियुक्त, देखिए सूची..

लाल बत्ती की सियासत में नया संतुलन: नियुक्तियों के बीच उभरे रामलाल चौहान बनाए गए अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष
रायपुर। छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर “लाल बत्ती” के जरिए संगठनात्मक संतुलन साधने की कोशिश साफ नजर आ रही है। विष्णुदेव सरकार ने राज्य महिला आयोग सहित कई निगम, मंडलों और बोर्डों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्तियों की सूची जारी कर दी है। इस सूची ने जहां कई चेहरों को नई जिम्मेदारी दी है, वहीं कुछ नाम ऐसे भी हैं जिनकी सक्रियता और क्षेत्रीय पकड़ को अब नए सिरे से देखा जा रहा है। इन्हीं नामों में प्रमुख रूप से उभरते हैं ।

सरकार की इस नियुक्ति प्रक्रिया को केवल औपचारिक विस्तार के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे राजनीतिक संदेश के तौर पर भी समझा जा रहा है। राज्य महिला आयोग में ममता साहू को अध्यक्ष बनाकर महिला नेतृत्व को मजबूती देने का संकेत दिया गया है, वहीं केश शिल्पी कल्याण बोर्ड जैसे निकायों में गौरीशंकर श्रीवास की नियुक्ति से सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश दिखती है।


लेकिन इन नियुक्तियों के बीच राजनीतिक गलियारों में चर्चा इस बात की ज्यादा है कि क्षेत्रीय स्तर पर लंबे समय से सक्रिय रहे नेताओं को किस तरह से साधा गया है। राजनांदगांव जिले से जुड़े चेहरों को भी सूची में जगह मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार क्षेत्रीय असंतोष को संतुलित करने की रणनीति पर काम कर रही है।
इसी संदर्भ में का नाम राजनीतिक हलकों में तेजी से उभरा है। भले ही उन्हें प्रत्यक्ष रूप से किसी बड़े पद से नहीं जोड़ा गया हो, लेकिन संगठनात्मक सक्रियता, स्थानीय नेटवर्क और जमीनी पकड़ के कारण वे इस पूरी प्रक्रिया के महत्वपूर्ण पात्र के रूप में देखे जा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में ऐसे नेताओं की भूमिका और बढ़ सकती है, खासकर तब जब सरकार को क्षेत्रीय समीकरणों को मजबूत बनाए रखना हो।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, निगम-मंडलों में नियुक्तियां केवल प्रशासनिक जरूरत नहीं होतीं, बल्कि यह सत्ता और संगठन के बीच संतुलन बनाने का एक अहम जरिया भी होती हैं। ऐसे में जिन चेहरों को सीधे तौर पर पद नहीं मिला, उनकी भूमिका भी कम नहीं आंकी जा सकती। वे पर्दे के पीछे संगठन को मजबूती देने और जनाधार बनाए रखने में अहम कड़ी साबित होते हैं।
कुल मिलाकर, यह नियुक्ति सूची सिर्फ नामों का ऐलान नहीं, बल्कि सत्ता की रणनीति का संकेत है—जहां हर नियुक्ति के पीछे सामाजिक, क्षेत्रीय और राजनीतिक गणित काम कर रहा है। और इसी गणित के बीच, जैसे नेता भविष्य की राजनीति में अपनी जगह मजबूत करते नजर आ रहे हैं।
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