स्मार्ट मीटर पर बवाल: बिल बढ़ने के आरोपों के बीच महिलाओं का उग्र प्रदर्शन, कलेक्ट्रेट घेराव में तोड़े मीटर

Journalist Amardeep chauhan
http://amarkhabar.com
दुर्ग (छत्तीसगढ़), 2 जुलाई।
स्मार्ट मीटर व्यवस्था को लेकर छत्तीसगढ़ में असंतोष अब सड़कों पर खुलकर सामने आने लगा है। बुधवार को दुर्ग कलेक्ट्रेट परिसर उस समय तनाव और अफरा-तफरी का केंद्र बन गया, जब भिलाई क्षेत्र से आई बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों ने बिजली विभाग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। विरोध की तीव्रता इस कदर बढ़ी कि प्रदर्शनकारियों ने स्मार्ट मीटरों को जमीन पर पटक-पटक कर तोड़ दिया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नए स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद से बिजली बिलों में अप्रत्याशित वृद्धि देखी जा रही है। उनका आरोप है कि वास्तविक खपत के मुकाबले कई गुना अधिक बिल थमाए जा रहे हैं, जिससे मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के परिवारों का घरेलू बजट पूरी तरह बिगड़ गया है। महिलाओं ने सवाल उठाया कि जब बिजली उपयोग सीमित है, तो बिल इतना अधिक क्यों आ रहा है।
कलेक्ट्रेट परिसर में जुटी महिलाओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक इस व्यवस्था की निष्पक्ष जांच नहीं होती और उपभोक्ताओं को राहत नहीं मिलती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। प्रदर्शन के दौरान कई महिलाओं ने अपने हाथों में टूटे हुए मीटर उठाकर प्रतीकात्मक आक्रोश भी व्यक्त किया।
इस आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिला। आम आदमी पार्टी के स्थानीय नेताओं ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता दिखाई और बिजली विभाग पर गंभीर आरोप लगाए। पार्टी प्रतिनिधियों ने कहा कि स्मार्ट मीटर प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं और इसकी तकनीकी विश्वसनीयता की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मीटरों में गड़बड़ी या छेड़छाड़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि, बिजली विभाग की ओर से अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विभाग के कुछ अधिकारियों का कहना है कि स्मार्ट मीटर उपभोक्ता के वास्तविक उपयोग के आधार पर बिलिंग सुनिश्चित करते हैं और इसमें किसी तरह की अनियमितता की संभावना कम होती है। बावजूद इसके, बढ़ते विरोध को देखते हुए प्रशासन पर स्थिति स्पष्ट करने और भरोसा बहाल करने का दबाव बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नई तकनीकों को लागू करते समय पारदर्शिता और उपभोक्ताओं के बीच जागरूकता बेहद जरूरी होती है। यदि प्रारंभिक स्तर पर शिकायतों का समाधान नहीं किया गया, तो ऐसी व्यवस्थाएं जन असंतोष का कारण बन सकती हैं।
फिलहाल, दुर्ग में हुआ यह प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि स्मार्ट मीटर को लेकर असंतोष केवल तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि जनभावनाओं से जुड़ा विषय बन चुका है। अब देखना होगा कि प्रशासन और बिजली विभाग इस चुनौती का समाधान किस तरह करते हैं।
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