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जहरीली सांसों में घुटता नवागांव: शिव शक्ति स्टील प्लांट पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, 15 दिन में कार्रवाई नहीं तो उग्र आंदोलन

Journalist Amardeep chauhan
http://amarkhabar.com

रायगढ़, 24 जून 2026।
औद्योगिक विकास की चमक के पीछे छिपी पर्यावरणीय कीमत एक बार फिर सामने आई है। जिले के ग्राम पंचायत नवागांव में स्थित शिव शक्ति स्टील प्लांट के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। लंबे समय से प्रदूषण की मार झेल रहे गांव के लोगों ने प्रशासन को सीधी चेतावनी दे दी है—यदि 15 दिनों के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन उग्र रूप लेगा।

स्थानीय सरपंच मंजू सत्यनारायण चौहान के नेतृत्व में ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (CECB) के क्षेत्रीय अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए प्लांट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि संयंत्र से निकलने वाला घना काला धुआं पूरे क्षेत्र की हवा को जहरीला बना रहा है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

बीमारियों का फैलता दायरा, खेती पर संकट
ग्रामीणों के अनुसार, प्रदूषण का असर अब स्पष्ट रूप से स्वास्थ्य और आजीविका दोनों पर दिखाई दे रहा है। सांस संबंधी समस्याएं, त्वचा रोग और आंखों में जलन जैसी शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं। वहीं, खेतों पर गिरने वाली कालिख ने फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई किसानों का दावा है कि उनकी उपज पहले की तुलना में आधी रह गई है।

रात के अंधेरे में ‘नियंत्रण’ भी बंद?
ग्रामीणों ने एक गंभीर आरोप यह भी लगाया है कि प्लांट प्रबंधन रात के समय प्रदूषण नियंत्रण उपकरण—विशेष रूप से ईएसपी (Electrostatic Precipitator)—को जानबूझकर बंद कर देता है, जिससे बिना फिल्टर का धुआं वातावरण में फैलता है। उनका कहना है कि रात में आसमान पर छाई कालिख इस कथित लापरवाही की गवाही देती है। इस संबंध में पूर्व में भी शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आया।

प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
ज्ञापन में ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि:

– पर्यावरण विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा तत्काल निरीक्षण किया जाए।
– रात के समय औचक जांच कर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए।
– मानकों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना लगाया जाए और आवश्यक हो तो प्लांट को सील किया जाए।
– प्रभावित ग्रामीणों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और उपचार की व्यवस्था की जाए।
– फसल एवं अन्य आर्थिक नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए।

7 दिन में रिपोर्ट, 15 दिन में फैसला
पंचायत ने विभाग से 7 दिनों के भीतर अब तक की गई कार्रवाई की लिखित रिपोर्ट मांगी है। साथ ही स्पष्ट किया है कि यदि 15 दिनों के भीतर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो ग्रामीण प्लांट के मुख्य द्वार पर विशाल विरोध प्रदर्शन करेंगे।

जिम्मेदारी तय करने की मांग
ग्रामीणों ने यह भी दो टूक कहा है कि यदि भविष्य में प्रदूषण के कारण कोई गंभीर जनहानि या स्थिति उत्पन्न होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि औद्योगिक विकास और पर्यावरणीय संतुलन के बीच संतुलन बनाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है—और कब तक स्थानीय आबादी इसकी कीमत चुकाती रहेगी।

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Amar Chouhan

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