Latest News

‘12 लाख का हक, 2 लाख का टैक्स’: जनपद पंचायत में खुली लूट का पर्दाफाश, ACB ने पकड़ा ‘रिश्वत सिंडिकेट’

Journalist Amardeep chauhan
amarkhabar.com

सक्ती, 15 जून 2026।
सरकारी दफ्तर… या वसूली का अड्डा? सक्ती जनपद पंचायत में हुई ACB की कार्रवाई ने इस सवाल को अब बहस नहीं, बल्कि कड़वी सच्चाई बना दिया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) बिलासपुर ने जिस तरह से मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) निखिल कश्यप, सहायक ग्रेड-3 अविनाश ठाकुर और भृत्य लच्छन भानु को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा है, उसने उस ‘रिश्वत सिंडिकेट’ की परतें उधेड़ दी हैं, जो सरकारी योजनाओं को ‘कट’ के कारोबार में बदल चुका है।

यह मामला सिर्फ एक ट्रैप नहीं—यह उस संगठित वसूली तंत्र की झलक है, जहाँ 12 लाख रुपये के वैध भुगतान पर 2 लाख रुपये का ‘फिक्स रेट’ तय किया गया था।

‘बिना चढ़ावा फाइल नहीं चलेगी’—सिस्टम का काला सच

सूत्रों के मुताबिक, हितग्राही का भुगतान जानबूझकर रोका गया। फाइल को आगे बढ़ाने और चेक जारी करने के नाम पर खुलेआम सौदेबाजी हुई।
कोई पर्दा नहीं, कोई डर नहीं—सीधे ‘रेट’ तय: 2 लाख रुपये।

यह वही सिस्टम है जहाँ हक पाने के लिए भी ‘टैक्स’ देना पड़ता है—और वह भी सरकारी खजाने में नहीं, जेबों में।

ACB का जाल और ‘लाइव कैच’

हितग्राही की शिकायत के बाद ACB ने चुपचाप जाल बिछाया। पहले सत्यापन—फिर प्लान—और फिर सीधा वार।
जैसे ही एक लाख रुपये की पहली किश्त दी गई, टीम ने मौके पर ही तीनों को दबोच लिया।

यह ‘लाइव कैच’ सिर्फ तीन लोगों की गिरफ्तारी नहीं है—यह उस निर्लज्ज व्यवस्था का सबूत है, जो खुलेआम चल रही थी।

तीन गिरफ्तारी… या पूरी चेन की सिर्फ शुरुआत?

सबसे बड़ा सवाल अब यही है—
क्या यह खेल सिर्फ तीन लोगों तक सीमित था?
या फिर यह एक पूरी ‘चेन’ है, जिसमें ऊपर से नीचे तक हिस्सेदारी तय है?

स्थानीय स्तर पर लंबे समय से चर्चा रही है कि—

– भुगतान हो या निर्माण
– योजना हो या बिल पासिंग
  हर जगह ‘कट’ का प्रतिशत पहले तय होता है, काम बाद में।

अगर जांच ईमानदारी से आगे बढ़ी, तो यह मामला सिर्फ एक जनपद तक सीमित नहीं रहेगा।

कौन जिम्मेदार? और कौन बचाएगा सिस्टम को?

इस कार्रवाई ने कई असहज सवाल खड़े कर दिए हैं—

– क्या वरिष्ठ अधिकारियों को इस खेल की भनक नहीं थी?
– क्या शिकायतें पहले भी आईं और दबा दी गईं?
– क्या यह ‘सिस्टमेटिक करप्शन’ अब नॉर्मल हो चुका है?

जनता का पैसा, अफसरों की कमाई?

सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह पैसा किसी ठेकेदार का नहीं, बल्कि एक हितग्राही का था—यानी सीधे जनता का हक।

जब सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए भी ‘कट’ देना पड़े, तो यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि व्यवस्था पर सीधा हमला है।

अब नजरें जांच पर—सच कितना बाहर आएगा?

ACB ने कार्रवाई तो कर दी है, लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होती है—
क्या जांच सिर्फ इन तीन नामों पर खत्म होगी?
या फिर उस पूरे नेटवर्क को बेनकाब करेगी, जो सालों से ‘कट सिस्टम’ के सहारे फल-फूल रहा है?

(फिलहाल तीनों आरोपी हिरासत में हैं। पूछताछ जारी है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि यह मामला ‘एक केस’ बनकर रह जाएगा या ‘एक सिस्टम’ को बेनकाब करेगा।)

Now U can Download Amar khabar from google play store also.

Amar Chouhan

AmarKhabar.com एक हिन्दी न्यूज़ पोर्टल है, इस पोर्टल पर राजनैतिक, मनोरंजन, खेल-कूद, देश विदेश, एवं लोकल खबरों को प्रकाशित किया जाता है। छत्तीसगढ़ सहित आस पास की खबरों को पढ़ने के लिए हमारे न्यूज़ पोर्टल पर प्रतिदिन विजिट करें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button