“दरवाजे पर दस्तक देती स्वास्थ्य टीम: रायगढ़ में एक माह तक चलेगा कुष्ठ खोज अभियान, समय रहते पहचान पर जोर”

Journalist Amardeep chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़, 15 जून 2026।
जिले को कुष्ठ रोग मुक्त बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने एक व्यापक पहल शुरू की है। कलेक्टर के निर्देशन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत के मार्गदर्शन में सोमवार से विशेष कुष्ठ खोज अभियान (एलसीडीसी) की शुरुआत की गई। यह अभियान आगामी एक माह, यानी 15 जून से 15 जुलाई तक जिले के सभी विकासखंडों में संचालित होगा।
अभियान का स्वरूप इस बार पूरी तरह जमीनी रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग की प्रशिक्षित टीमें घर-घर पहुंचकर न केवल लोगों की जांच करेंगी, बल्कि संभावित मरीजों की पहचान कर उन्हें तत्काल निःशुल्क उपचार से भी जोड़ा जाएगा। उद्देश्य साफ है—बीमारी को शुरुआती स्तर पर पकड़कर उसके गंभीर परिणामों को रोका जाए।
जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ. अविनाश चंद्रा के अनुसार, इस अभियान में ग्रामीण स्वास्थ्य अधिकारी (आरएचओ), सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) और मितानिनों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। प्रत्येक टीम गांवों और मोहल्लों में जाकर हर परिवार के सभी सदस्यों की जांच करेगी। खास बात यह है कि पूरे सर्वेक्षण की मॉनिटरिंग डिजिटल माध्यम से होगी—मोबाइल एप के जरिए हर गतिविधि का ऑनलाइन पंजीयन किया जाएगा।
डॉ. चंद्रा बताते हैं कि सर्वे के दौरान यदि किसी व्यक्ति में कुष्ठ रोग के लक्षण दिखाई देते हैं, तो पहले उसकी पुष्टि की जाएगी और फिर उसे ‘निक्षय-कुष्ठ 2.0’ पोर्टल पर पंजीकृत कर उपचार की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुष्ठ रोग के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज करना सबसे बड़ी भूल होती है। शरीर पर सफेद या तांबे रंग के चकत्ते, उस हिस्से में सुन्नता, नसों में सूजन या दर्द, हाथ-पैरों में झुनझुनी तथा चेहरे या कानों में असामान्य बदलाव इसके प्रमुख लक्षण माने जाते हैं।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कुष्ठ रोग को लेकर समाज में अब भी कई भ्रांतियां मौजूद हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि यह रोग छूने, साथ बैठने या हाथ मिलाने से नहीं फैलता। मल्टी ड्रग थेरेपी (एमडीटी) की पहली खुराक लेने के बाद ही रोगी से संक्रमण फैलने की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है। ऐसे में मरीजों को सामाजिक दूरी या भेदभाव का सामना नहीं करना चाहिए, बल्कि उन्हें समय पर इलाज मिलना अधिक जरूरी है।
जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री रंजना पैंकरा ने बताया कि इस अभियान का लक्ष्य केवल मरीजों की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले में कुष्ठ प्रसार दर को वर्तमान 3.78 से घटाकर शासन के निर्धारित मानक एक से नीचे लाना भी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच से लेकर उपचार तक की सभी सुविधाएं जिले के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि जब सर्वेक्षण दल उनके घर पहुंचे, तो वे पूरा सहयोग करें और परिवार के प्रत्येक सदस्य की जांच अवश्य कराएं। विभाग का मानना है कि जनभागीदारी के बिना इस तरह के अभियान अपनी पूर्ण सफलता हासिल नहीं कर सकते।
दरअसल, यह अभियान सिर्फ एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी भी है—जहां जागरूकता, समय पर पहचान और उपचार मिलकर एक ऐसे समाज की नींव रख सकते हैं, जो न केवल स्वस्थ हो, बल्कि भेदभाव से भी मुक्त हो।
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