अखबार में परोसा गया नाश्ता पड़ेगा भारी: FSSAI की सख्ती से सड़क किनारे फूड कारोबारियों में हड़कंप

Journalist Amardeep chauhan
http://amarkhabar.com
नई दिल्ली/देश डेस्क।
सड़क किनारे मिलने वाले समोसे, कचौड़ी, वड़ा-पाव और अन्य फास्ट फूड को पुराने अखबार में परोसने की आम आदत अब भारी पड़ सकती है। खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर देश की शीर्ष संस्था FSSAI ने इस प्रथा पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि अब ऐसे मामलों में जुर्माने के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई और जेल तक का प्रावधान लागू किया जाएगा।
सस्ते उपाय की कीमत सेहत पर भारी
अक्सर देखा जाता है कि फूड वेंडर सुविधा और लागत बचाने के लिए गरम खाद्य पदार्थों को पुराने अखबार में लपेटकर ग्राहकों को दे देते हैं। देखने में यह भले ही सामान्य लगे, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह आदत गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है।
अखबार की छपाई में इस्तेमाल होने वाली स्याही में लेड (सीसा) सहित कई भारी धातुएं और रासायनिक यौगिक मौजूद होते हैं। गरम भोजन के संपर्क में आने पर ये तत्व भोजन में मिल सकते हैं, जो लंबे समय में शरीर में विषैले प्रभाव डालते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के रासायनिक संपर्क से पेट संबंधी बीमारियों के साथ-साथ लीवर, किडनी और तंत्रिका तंत्र पर असर पड़ सकता है। लगातार संपर्क में रहने पर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
इसके अलावा अखबार जिस वातावरण से होकर गुजरता है—प्रिंटिंग प्रेस, गोदाम, ट्रांसपोर्ट और खुले बाजार—उस दौरान उस पर धूल, बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्म जीवाणु भी जमा हो जाते हैं, जो भोजन को और अधिक असुरक्षित बना देते हैं।
सख्त निगरानी और कार्रवाई के निर्देश
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में कुछ स्थानों पर खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई के बाद इस मुद्दे को गंभीरता से लिया गया है। अब फूड सेफ्टी विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी दुकान, ठेले या रेस्टोरेंट में अखबार का उपयोग भोजन परोसने या पैकिंग के लिए प्रतिबंधित माना जाएगा।
नियमों के उल्लंघन पर संबंधित कारोबारी का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। साथ ही भारी जुर्माना और खाद्य सुरक्षा कानूनों के तहत कानूनी कार्रवाई, जिसमें जेल की सजा तक का प्रावधान शामिल है, लागू किया जाएगा।
छोटे कारोबारियों पर भी लागू होंगे नियम
यह निर्देश केवल बड़े होटल या रेस्टोरेंट तक सीमित नहीं है। सड़क किनारे ठेला लगाने वाले छोटे दुकानदारों से लेकर फास्ट फूड आउटलेट तक सभी को खाद्य पैकेजिंग के सुरक्षित मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा।
अधिकारियों ने कहा है कि अब पैकिंग के लिए केवल फूड-ग्रेड पेपर, पत्तल, या सुरक्षित पैकेजिंग सामग्री का ही उपयोग किया जाना चाहिए।
उपभोक्ताओं से भी सतर्क रहने की अपील
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने उपभोक्ताओं से भी अपील की है कि वे ऐसे दुकानदारों से खाद्य सामग्री लेने से बचें, जो अखबार या असुरक्षित सामग्री में भोजन परोसते हैं। साथ ही सुरक्षित पैकेजिंग की मांग करने में संकोच न करें।
यह कदम सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। बदलते नियमों के बीच अब खाद्य कारोबारियों के लिए भी यह संदेश स्पष्ट है कि लापरवाही की कीमत केवल आर्थिक नहीं, बल्कि कानूनी रूप से भी भारी पड़ सकती है।
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