तपते मौसम में इंसानियत की छांव बनें: वरिष्ठ पत्रकार सुधीर चौहान ने प्रदेशवासियों से की सतर्कता और सेवा की अपील

Journalist Amardeep chauhan
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रायपुर। छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ते तापमान और भीषण गर्मी के बीच वरिष्ठ पत्रकार एवं स्वतंत्र भारत न्यूज़ 24 के संपादक सुधीर चौहान ने प्रदेशवासियों से सावधानी, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि गर्मी का यह दौर केवल स्वास्थ्य की परीक्षा नहीं है, बल्कि यह मानवीय संवेदनाओं को भी परखने का समय है। ऐसे में प्रत्येक नागरिक को अपनी सुरक्षा के साथ-साथ दूसरों की सहायता के लिए भी आगे आना चाहिए।
सुधीर चौहान ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में तापमान लगातार ऊंचाई पर बना हुआ है, जिसके कारण आमजन, विशेषकर मजदूर, किसान, राहगीर, बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे मौसम में शरीर में पानी की कमी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकती है। इसलिए लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, घर से बाहर निकलते समय पानी साथ रखने और धूप में अनावश्यक रूप से अधिक समय तक रहने से बचने की सलाह दी गई है।
उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि यदि संभव हो तो अपने घरों, दुकानों, कार्यालयों या प्रतिष्ठानों के बाहर पेयजल की व्यवस्था करें। एक मटका या पानी से भरा पात्र राह चलते किसी प्यासे व्यक्ति के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि समाज में छोटी-छोटी पहलें भी बड़े सकारात्मक बदलाव का कारण बनती हैं और कठिन समय में यही संवेदनशीलता लोगों को एक-दूसरे से जोड़ती है।

वरिष्ठ पत्रकार चौहान ने गर्मी से होने वाली स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को लेकर भी लोगों को सचेत किया। उन्होंने बताया कि अत्यधिक गर्मी के कारण चक्कर आना, सिरदर्द, कमजोरी, अत्यधिक पसीना आना, मतली या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे संकेतों को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति की तबीयत अचानक बिगड़ती हुई दिखाई दे, तो उसे तत्काल छायादार और ठंडे स्थान पर ले जाकर प्राथमिक सहायता उपलब्ध करानी चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सा सहायता लेने में भी देरी नहीं करनी चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और खुले वातावरण में काम करने वाले श्रमिकों के प्रति अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार, गर्मी के प्रभाव से ये वर्ग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं और समय रहते देखभाल नहीं होने पर हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
सुधीर चौहान ने कहा कि मानव समाज के साथ-साथ पशु-पक्षियों की चिंता करना भी हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। भीषण गर्मी में जलस्रोतों के सूखने और तापमान बढ़ने से पक्षियों और अन्य जीवों के सामने भी पानी का संकट खड़ा हो जाता है। ऐसे में घरों की छतों, बालकनी, आंगन, दुकानों और कार्यालयों के बाहर पानी से भरे बर्तन रखना एक सराहनीय और जीवनदायी पहल हो सकती है।
उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि इस कठिन मौसम में केवल अपनी सुरक्षा तक सीमित न रहें, बल्कि जरूरतमंदों, राहगीरों, श्रमिकों और बेजुबान जीवों की सहायता के लिए भी आगे आएं। गर्मी का यह दौर एक दिन समाप्त हो जाएगा, लेकिन इन दिनों में दिखाई गई संवेदनशीलता और सहयोग की भावना समाज में लंबे समय तक सकारात्मक संदेश छोड़ जाएगी।
“सावधानी, सेवा और संवेदना—यही भीषण गर्मी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।” इसी संदेश के साथ वरिष्ठ पत्रकार सुधीर चौहान ने सभी नागरिकों से सतर्क रहने और दूसरों का सहारा बनने की अपील की है।
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