“खरीफ से पहले कलेक्टर का बड़ा प्रहार: उर्वरक कालाबाजारी रोकने ‘फ्लाइंग स्क्वॉड’ मैदान में, गड़बड़ी पर सीधे एफआईआर”
रायगढ़, 29 मई 2026।
खरीफ सीजन की दस्तक के साथ ही उर्वरकों की बढ़ती मांग को देखते हुए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। किसानों को निर्धारित दर पर पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने और कालाबाजारी पर लगाम कसने के लिए कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी मयंक चतुर्वेदी ने जिलेभर में विशेष ‘उड़नदस्ता दल’ गठित कर दिए हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जमाखोरी, अवैध भंडारण, जबरन टैगिंग और ओवररेटिंग जैसी गतिविधियों पर अब सीधे कार्रवाई होगी।
यह निर्णय राज्य शासन के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है, जिसमें उर्वरक वितरण प्रणाली को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया गया है। खास तौर पर उन शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है, जिनमें किसानों को उर्वरकों के साथ जबरन अन्य उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर किए जाने की बात सामने आती रही है।
हर स्तर पर निगरानी, औचक निरीक्षण से बढ़ेगा दबाव
गठित उड़नदस्ता दलों में कार्यपालिक दण्डाधिकारी, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी और उर्वरक निरीक्षक शामिल किए गए हैं। ये दल विकासखंडवार नियमित और औचक निरीक्षण कर स्टॉक, वितरण और विक्रय की पूरी व्यवस्था पर नजर रखेंगे। पीओएस मशीन में दर्ज स्टॉक और वास्तविक भंडारण का मिलान किया जाएगा, वहीं दुकानों पर मूल्य सूची और उपलब्ध मात्रा का प्रदर्शन भी अनिवार्य रूप से जांचा जाएगा।
कृषक विवरण पंजी की भी सघन जांच होगी, जिसमें किसान का नाम, भूमि विवरण और खरीदे गए उर्वरक की मात्रा दर्ज होना अनिवार्य है। प्रशासन ने थोक से फुटकर तक पूरी सप्लाई चेन पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि कहीं भी गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।
उद्योगों पर भी नजर, सब्सिडी वाले उर्वरक का दुरुपयोग रोकने की तैयारी
प्रशासन ने उन उद्योगों पर भी निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, जहां सब्सिडी वाले उर्वरकों के दुरुपयोग की आशंका रहती है। पशु आहार, रेसिन और प्लाईवुड जैसे क्षेत्रों में औचक निरीक्षण किए जाएंगे।
सीमाओं पर सख्ती, अवैध परिवहन पर कड़ी नजर
जिले की अंतर्राज्यीय सीमाओं पर विशेष चौकसी बरतने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उर्वरकों की अवैध निकासी रोकी जा सके। उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत दोषी पाए जाने पर सीधे एफआईआर दर्ज की जाएगी।
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विकासखंडवार उड़नदस्ता दल (नाम व संपर्क)
रायगढ़ विकासखंड
– कार्यपालिक दण्डाधिकारी: वर्षा तिवारी (मो. 9993223121)
– वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी: अभिषेक पटेल (मो. 9424183201)
– उर्वरक निरीक्षक: विनोद कुमार पटेल (मो. 9691966813)
पुसौर विकासखंड
– कार्यपालिक दण्डाधिकारी: अनुराधा पटेल (मो. 8770810450)
– वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी: रोहित कुमार पटेल (मो. 7566776565)
– उर्वरक निरीक्षक: मनीषा राठौर (मो. 9691441203)
खरसिया विकासखंड
– कार्यपालिक दण्डाधिकारी: संदीप राजपूत (मो. 9818069610)
– वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी: नीलाम्बर प्रसाद सिदार (मो. 9977362938)
– उर्वरक निरीक्षक: जन्मेजय पटेल (मो. 8120880118)
– उर्वरक निरीक्षक: पुरुषोत्तम चौधरी (मो. 9522044027)
लैलूंगा विकासखंड
– कार्यपालिक दण्डाधिकारी: उज्ज्वल पाण्डेय (मो. 9755602917)
– वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी: फलेश्वर प्रसाद (मो. 9753278107)
– उर्वरक निरीक्षक: पवन कुमार उरांव (मो. 9977092092)
घरघोड़ा विकासखंड
– कार्यपालिक दण्डाधिकारी: शिवम पांडेय (मो. 8770697391)
– वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी: दुबराज सिंह राठिया (मो. 9753756432)
– उर्वरक निरीक्षक: यू.एन. नगाइच (मो. 9753990029)
तमनार विकासखंड
– कार्यपालिक दण्डाधिकारी: ऋचा सिंह परिहार (मो. 8085744738)
– वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी/उर्वरक निरीक्षक: यू.एन. नगाइच (मो. 9753990029)
धरमजयगढ़ विकासखंड
– कार्यपालिक दण्डाधिकारी: हितेश साहू (मो. 9669924292)
– वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी: कुंवर किशोर पैंकरा (मो. 7999260105)
– उर्वरक निरीक्षक: एस.यू. खान (मो. 8319510508)
– उर्वरक निरीक्षक: राम कुमार पटेल (मो. 8305974960)
प्रशासन की इस सक्रियता से साफ संकेत है कि इस बार खरीफ सीजन में उर्वरकों की कालाबाजारी पर लगाम कसने की ठोस तैयारी की गई है। अब देखना होगा कि जमीनी स्तर पर यह सख्ती कितनी प्रभावी साबित होती है और किसानों को इसका कितना सीधा लाभ मिल पाता है।