“छाल तहसील में ‘रेट फिक्स’ का खेल उजागर: बी-1 सुधार के नाम पर 60 हजार की रिश्वत लेते बाबू एसीबी के शिकंजे में”

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़, 29 मई।
जिले के राजस्व तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका एक और चौंकाने वाला उदाहरण शुक्रवार को सामने आया। छाल तहसील कार्यालय में एक किसान से 60 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए एक लिपिक को एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। खास बात यह है कि पकड़ा गया कर्मचारी मूलतः शिक्षा विभाग में पदस्थ एक शिक्षक है, जिसे ‘अटैचमेंट’ के जरिए तहसील में बाबू का काम सौंपा गया था।
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम धसकामुड़ा निवासी किसान भानुप्रताप पटेल अपने जमीन के खसरा और बी-1 रिकॉर्ड में त्रुटि सुधार के लिए लंबे समय से तहसील के चक्कर काट रहा था। आरोप है कि इसी दौरान वहां पदस्थ तुलाराम पटेल, जो लिपिकीय कार्य देख रहा था, ने सुधार के एवज में 60 हजार रुपए की मांग रख दी। किसान के लिए यह रकम चुकाना संभव नहीं था, लेकिन बिना ‘लेन-देन’ के काम नहीं होने की मजबूरी ने उसे परेशान कर दिया।
आखिरकार भानुप्रताप ने हिम्मत जुटाकर एसीबी से संपर्क किया। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले की गोपनीय जांच शुरू की और आरोपों की पुष्टि होने पर योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप बिछाया गया।
जाल बिछा, रंगे हाथों गिरफ्तारी
पूर्व निर्धारित रणनीति के तहत शुक्रवार को शिकायतकर्ता रिश्वत की राशि लेकर छाल तहसील कार्यालय पहुंचा। जैसे ही उसने आरोपी तुलाराम पटेल को पैसे थमाए, पहले से सादे कपड़ों में मौजूद एसीबी टीम ने मौके पर दबिश दे दी। आरोपी को संभलने का मौका तक नहीं मिला और उसे नोटों सहित रंगे हाथों पकड़ लिया गया। इस अचानक कार्रवाई से पूरे तहसील परिसर में हड़कंप मच गया। कई कर्मचारी स्थिति भांपते ही अपने-अपने कक्षों से खिसकते नजर आए।
‘अटैचमेंट’ पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में एक बड़ा सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि शिक्षा विभाग का कर्मचारी तहसील में लंबे समय से कैसे और किन परिस्थितियों में लिपिकीय कार्य कर रहा था। प्रशासनिक व्यवस्था में इस तरह की ‘अटैचमेंट संस्कृति’ अक्सर पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती रही है।
कानूनी कार्रवाई और जांच जारी
एसीबी अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। मौके पर आवश्यक दस्तावेजों की जब्ती के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है और आरोपी को न्यायालय में पेश किया जाएगा। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हो सकता है।
व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
यह घटना न केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी भर नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था पर सवालिया निशान भी है, जहां छोटे-छोटे कामों के लिए किसानों और आम नागरिकों को भारी कीमत चुकानी पड़ती है। सवाल यह है कि क्या इस कार्रवाई के बाद व्यवस्था में वास्तविक सुधार होगा, या फिर यह सिलसिला किसी और नाम के साथ जारी रहेगा?
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