रायगढ़ में आग का कहर: कबाड़ गोदाम से उठी लपटों ने बाइक शोरूम को लील लिया, छह घंटे की जद्दोजहद के बाद काबू—बड़ी त्रासदी टली

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़, 23 मई 2026।
भीषण गर्मी और तेज हवाओं के बीच शनिवार दोपहर रायगढ़-सारंगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब छातामुड़ा स्थित एक कबाड़ गोदाम में लगी आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। ईदी ट्रेडर्स और नगमा प्लास्टिक के इस गोदाम से उठी आग की लपटों ने देखते ही देखते बगल में स्थित आदित्य हीरो बाइक शोरूम को भी अपनी चपेट में ले लिया। काले धुएं के घने गुबार ने कई किलोमीटर दूर तक आसमान को ढक दिया, जिससे पूरे इलाके में दहशत और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर करीब साढ़े 12 बजे गोदाम के पीछे कचरे में लगी आग की चिंगारी हवा के साथ उड़कर कबाड़ में जा गिरी। गोदाम में भारी मात्रा में रखे पुराने टायर, प्लास्टिक सामग्री और कागज के ढेर ने आग को तेजी से फैलने का मौका दिया। कुछ ही मिनटों में आग बेकाबू हो गई और ऊंची-ऊंची लपटें उठने लगीं।

आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर दिन में ही अंधेरा छा गया। धुएं के कारण दृश्यता कम हो गई और सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने तत्काल यातायात डायवर्ट किया और अटल चौक, पुसौर रोड तथा औरदा मार्ग से वाहनों को निकाला गया।

सूचना मिलते ही जूटमिल पुलिस, नगर सेना की दमकल टीम और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। शुरुआती दो दमकलों से आग पर काबू पाना संभव नहीं था, जिसके बाद एनटीपीसी, जिंदल और अन्य उद्योगों से अतिरिक्त फायर ब्रिगेड बुलाई गई। करीब छह घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद देर शाम आग पर नियंत्रण पाया जा सका।

इस बीच आग शोरूम के पिछले हिस्से तक पहुंच गई, जहां सर्विसिंग के लिए खड़ी कई बाइक जलकर खाक हो गईं। हालांकि शोरूम प्रबंधन की तत्परता से नई गाड़ियों और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे बड़ा नुकसान टल गया।

घटना के दौरान एक और गंभीर खतरा पास की घनी आबादी वाली बस्ती पर मंडरा रहा था। आग यदि थोड़ी और बढ़ती तो बड़ी जनहानि हो सकती थी, लेकिन दमकल कर्मियों ने पीछे की ओर से मोर्चा संभालकर आग को बस्ती की ओर बढ़ने से रोक लिया। यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे राहतभरा पहलू रहा।

प्रशासनिक स्तर पर एसएसपी, एडिशनल एसपी, तहसीलदार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर डटे रहे और राहत-बचाव कार्यों की निगरानी करते रहे। स्थानीय लोगों ने भी आगे बढ़कर मदद की—किसी ने पानी पहुंचाया, तो किसी ने आग बुझाने में हाथ बंटाया।

प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक इस हादसे में लाखों रुपये का नुकसान हुआ है, हालांकि वास्तविक आंकड़ा जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। राहत की बात यह रही कि इस भीषण आगजनी में कोई जनहानि नहीं हुई।

तहसीलदार ने बताया कि आग के कारणों की जांच की जा रही है और नुकसान का आकलन भी किया जाएगा। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान आग पर काबू पाने और स्थिति को सामान्य करने पर केंद्रित रहा।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि घनी आबादी और मुख्य मार्गों के किनारे स्थित ऐसे ज्वलनशील कबाड़ गोदामों के लिए सुरक्षा मानकों का पालन कितना जरूरी है—क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही, बड़े हादसे का रूप ले सकती है।
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