डिजिटल निगरानी का असर—पोर्टल शुरू होते ही चार उद्योगों पर कार्रवाई, प्रदूषण नियंत्रण को मिला नया औज़ार

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़। औद्योगिक प्रदूषण पर लगाम कसने की दिशा में प्रशासन ने अब तकनीक का सहारा लिया है और इसके शुरुआती नतीजे भी सामने आने लगे हैं। जिले में शुरू किए गए सीजी-निगरानी पोर्टल ने महज एक सप्ताह के भीतर ही चार उद्योगों को नियमों के उल्लंघन में पकड़ लिया, जिन पर जुर्माना भी लगाया गया है। यह पहल न केवल निगरानी व्यवस्था को पारदर्शी बनाएगी, बल्कि उद्योगों की जवाबदेही भी तय करेगी।
दरअसल, अब तक उद्योगों से निकलने वाले धुएं और अपशिष्ट जल की जांच मुख्यतः शिकायतों या मैन्युअल निरीक्षण पर निर्भर थी। इस प्रक्रिया में देरी और अनियमितता की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। नई व्यवस्था में उद्योगों के ईटीपी (इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) और ईएसपी (इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रीसिपिटेटर) को सीधे पोर्टल से जोड़ा गया है, जिससे उत्सर्जन का डेटा रियल टाइम में मॉनिटर किया जा सके।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जैसे ही किसी संयंत्र से निर्धारित सीमा से अधिक प्रदूषण दर्ज होता है, पोर्टल तत्काल अलर्ट जारी करता है। संबंधित उद्योग को सुधार के लिए लगभग डेढ़ घंटे का समय दिया जाता है। तय समय में स्थिति नियंत्रित न होने पर दंडात्मक कार्रवाई की जाती है।
पोर्टल लागू होने के बाद पहले ही सप्ताह में चार बड़े उद्योग—जेएसपी पतरापाली, जेएसडब्ल्यू स्टील नहरपाली, एनआर इस्पात और सुनील इस्पात—निर्धारित मानकों का उल्लंघन करते पाए गए। प्रत्येक इकाई पर एक दिन के उल्लंघन के लिए 30-30 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया, जिससे कुल 1.20 लाख रुपए की वसूली की गई।
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी ने इस पोर्टल को तेजी से लागू किया। फिलहाल जिले के 49 चिन्हित संयंत्रों में से 28 को पहले चरण में जोड़ा जा चुका है। शेष 21 संयंत्रों को भी जल्द ही इस प्रणाली में शामिल किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की डिजिटल निगरानी प्रणाली से न केवल प्रदूषण पर त्वरित नियंत्रण संभव होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी। वहीं स्थानीय नागरिकों को भी उम्मीद है कि इससे उद्योगों की मनमानी पर अंकुश लगेगा और वायु व जल गुणवत्ता में सुधार देखने को मिलेगा।
स्पष्ट है कि तकनीक के सहारे प्रशासन ने एक ऐसा तंत्र विकसित किया है, जो सिर्फ निगरानी तक सीमित नहीं, बल्कि तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने में भी सक्षम है। आने वाले समय में इसका प्रभाव और व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है।
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