प्रेम, दबाव और साजिश: रायगढ़ के जंगल में मिली अधिवक्ता की लाश का सनसनीखेज खुलासा ( विथ पुलिस रिक्रिएट क्राइम सीन वीडियो)

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़, 16 मई।
किसी भी अपराध की तह तक पहुंचना महज़ संयोग नहीं, बल्कि लगातार की गई सूक्ष्म जांच, धैर्य और तकनीकी साक्ष्यों के संयोजन का परिणाम होता है। रायगढ़ पुलिस ने एक बार फिर इसे साबित किया है। कटेल टिकरा के सुनसान जंगल में मिली अधिवक्ता की अज्ञात लाश अब एक संगठित और सोची-समझी हत्या की कहानी बनकर सामने आई है—जिसके केंद्र में था प्रेम, धोखा और उससे उपजा दबाव।
जिला पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने शनिवार को पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित प्रेस वार्ता में इस जघन्य हत्याकांड का खुलासा करते हुए बताया कि मृतका की पहचान आराधना सिदार (31) के रूप में हुई, जो लैलूंगा क्षेत्र की रहने वाली और पेशे से अधिवक्ता थीं। इस मामले में पुलिस ने उसके प्रेमी लोकनाथ पटेल को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।

जंगल में मिली लाश से शुरू हुई जांच
12 मई को पूंजीपथरा थाना क्षेत्र के कटेल टिकरा जंगल में एक अज्ञात महिला का शव मिलने की सूचना ने पुलिस महकमे को सक्रिय कर दिया था। शव की हालत और परिस्थितियां साफ तौर पर किसी गंभीर अपराध की ओर इशारा कर रही थीं। मौके पर एडिशनल एसपी अनिल सोनी, डीएसपी सुशांतो बनर्जी और थाना प्रभारी रामकिंकर यादव टीम के साथ पहुंचे। एफएसएल और डॉग स्क्वॉड की मदद से शुरुआती साक्ष्य जुटाए गए।
पहचान सबसे बड़ी चुनौती थी। लेकिन चक्रधरनगर थाने में दर्ज गुमशुदगी रिपोर्ट ने जांच को दिशा दी। परिजनों द्वारा कपड़ों और अन्य सामान की पहचान के बाद यह स्पष्ट हो गया कि शव आराधना सिदार का ही है।

सीसीटीवी और बाइक नंबर ने खोला राज
जांच का सबसे अहम मोड़ तब आया जब पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में एक युवक मोटरसाइकिल पर महिला को ले जाते दिखाई दिया। यही सुराग आगे चलकर पूरे मामले की कुंजी साबित हुआ। बाइक नंबर के आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंची और सक्ती निवासी लोकनाथ पटेल को हिरासत में लिया गया।

प्रेम संबंध बना हत्या की वजह
पूछताछ में आरोपी ने जो कहानी बताई, वह रिश्तों के अंधेरे पहलू को उजागर करती है। पिछले दो वर्षों से दोनों के बीच प्रेम संबंध थे, लेकिन आरोपी पहले से शादीशुदा था। मृतका द्वारा शादी का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था। यही दबाव उसके लिए खतरा बन गया।
आरोपी ने योजना बनाकर 10 मई को आराधना को अपने साथ ले गया। पहले सक्ती और दमाऊधारा मंदिर घुमाने के बाद दोनों एक लॉज में रुके, जहां उसने फर्जी नाम से कमरा लिया। अगले दिन सुबह वह उसे सुनसान जंगल में ले गया और मौका पाकर पहले गला दबाया, फिर पत्थर और धारदार हथियार से उसकी हत्या कर दी।

हत्या के बाद भी रची गई चाल
हत्या के बाद आरोपी ने खुद को बचाने के लिए साजिश का दूसरा चरण शुरू किया। उसने मृतका का मोबाइल अपने पास रखकर उसकी आवाज की नकल करते हुए परिजनों और सहेलियों से बातचीत की, ताकि किसी को शक न हो। घटनास्थल से खून साफ करने और साक्ष्य मिटाने की भी कोशिश की गई, लेकिन तकनीकी जांच के सामने ये प्रयास टिक नहीं सके।
पुलिस की समन्वित कार्रवाई
इस पूरे मामले के खुलासे में थाना प्रभारी रामकिंकर यादव, एएसआई उमाशंकर विश्वाल और उनकी टीम की भूमिका महत्वपूर्ण रही। तकनीकी विश्लेषण, कॉल डिटेल, सीसीटीवी और फील्ड जांच—इन सभी ने मिलकर आरोपी तक पहुंचने का रास्ता तैयार किया।
एसएसपी का सख्त संदेश
प्रेस वार्ता में शशि मोहन सिंह ने स्पष्ट कहा कि रायगढ़ पुलिस हर गंभीर अपराध को वैज्ञानिक तरीके से सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है।
“कानून से बचने की कोशिश करने वालों के लिए इस जिले में कोई जगह नहीं है,” उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा।
यह घटना सिर्फ एक आपराधिक केस नहीं, बल्कि रिश्तों में बढ़ते अविश्वास और दबाव के खतरनाक परिणामों की भी चेतावनी है—जहां भावनाएं, जब नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं, तो अपराध का रूप ले लेती हैं।
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