तुरंगा पंचायत में भौतिक सत्यापन पर उठे सवाल—सरपंच और जिम्मेदार अधिकारी की गैरमौजूदगी ने बढ़ाई शंकाएं

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़ जिले के जनपद पंचायत पुसौर अंतर्गत ग्राम पंचायत तुरंगा में 8 अप्रैल 2026 को सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जानकारी के आधार पर पृथक्करण शेड निर्माण कार्य का भौतिक सत्यापन किया गया। दोपहर 12 बजे से लेकर 1 बजकर 40 मिनट तक चली इस प्रक्रिया में आवेदक पद्मनाभ प्रधान के आवेदन पर मौके का निरीक्षण किया गया और उनका बयान भी दर्ज किया गया।
जांच के दौरान गांव के उपसरपंच विवेक प्रधान, पंचायत सचिव दिलीप कुमार गुप्ता, पंच कुष्टो संवरा, दिनेश राणा और विभूति प्रधान मौजूद रहे। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम और चौंकाने वाली बात यह रही कि ग्राम पंचायत के मुखिया सरपंच स्वयं उपस्थित नहीं थे। जबकि बताया जा रहा है कि उन्हें इस जांच की सूचना पहले ही दे दी गई थी और उनके हस्ताक्षर भी लिए गए थे, जिसे रोजगार सहायक द्वारा सुनिश्चित किया गया था।

स्थिति और भी गंभीर तब नजर आई जब 12 पंचों वाली पंचायत में से महज एक पंच की उपस्थिति दर्ज हुई। यह सवाल खड़ा करता है कि जिस पंचायत व्यवस्था में “पंच परमेश्वर” की अवधारणा को सर्वोच्च माना जाता है, वहां इस तरह की महत्वपूर्ण जांच प्रक्रिया में जनप्रतिनिधियों की उदासीनता आखिर किस ओर इशारा करती है।
इतना ही नहीं, जांच दल में शामिल होने वाले जनपद पंचायत पुसौर की उप अभियंता राधिका पटेल भी मौके पर उपस्थित नहीं रहीं। तकनीकी अधिकारी की अनुपस्थिति ने पूरे सत्यापन की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
गांव के जानकारों और स्थानीय लोगों के बीच अब यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थितियां थीं, जिनके चलते पंचायत के प्रमुख पदाधिकारी और जिम्मेदार अधिकारी इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया से दूरी बनाए रहे। यह घटना न सिर्फ पंचायत व्यवस्था की कार्यशैली पर सवाल उठाती है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता की जरूरत को भी उजागर करती है।

अब देखना यह होगा कि संबंधित अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या इस पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
News associate Padmanabh pradhan