NTPC लारा विस्तार पर उठ रहे सवाल, जवाब देना जरूरी ‼️

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़। एनटीपीसी लारा के फेज-3 विस्तार को लेकर क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है। 540 एकड़ अतिरिक्त जमीन अधिग्रहण, फ्लाईएश उत्सर्जन में संभावित तीन गुना वृद्धि और पर्यावरणीय प्रभाव जैसे मुद्दों ने अब जनचर्चा का रूप ले लिया है। ऐसे में 27 मार्च को NTPC लारा में हुई प्रेस मीटिंग बेहद अहम रही।
जानकारों का मानना है कि यह सिर्फ एक सामान्य प्रेसवार्ता नहीं थी , बल्कि NTPC प्रबंधन के लिए जवाबदेही तय करने का मंच साबित हुई। पहले और दूसरे चरण के बाद अब तीसरे चरण में 1600 मेगावाट की अतिरिक्त क्षमता जोड़ने की योजना है, जिससे कुल उत्पादन 4800 मेगावाट तक पहुंच जाएगा। लेकिन इसके साथ ही पर्यावरण, जल उपयोग, राख (फ्लाईएश) प्रबंधन और विस्थापन जैसे सवाल भी उतनी ही तेजी से खड़े हो रहे हैं।
क्यों जरूरी रही यह प्रेसब्रीफ ?
540 एकड़ नए भूमि अधिग्रहण पर स्पष्ट नीति क्या होगी?
फ्लाईएश के बढ़ते उत्सर्जन को नियंत्रित करने की ठोस योजना क्या है?
स्थानीय गांवों और किसानों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
पहले हुए भू-अर्जन विवादों से क्या सबक लिया गया?
जल उपयोग और पर्यावरण संतुलन कैसे सुनिश्चित होगा?
इन सवालों के जवाब केवल प्रेस नोट से नहीं, बल्कि खुले संवाद से ही संभव हैं।
पत्रकारों और जनप्रतिनिधियों की नजर
क्षेत्र के पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग इस प्रेसवार्ता को लेकर काफी गंभीर रहे। NTPC मैनेजमेंट ने खुद आगे आकर सभी मीडिया संस्थानों, जनप्रतिनिधियों और प्रभावित गांवों के प्रतिनिधियों को औपचारिक निमंत्रण दिया रहा ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
जिस तरह से मुद्दे उठ रहे हैं, अब NTPC लारा के लिए सीमित दायरे में वार्ता करना अनुचित नजर आएगा। व्यापक मीडिया उपस्थिति और खुली चर्चा ही कंपनी की साख बनाए रख सकती है।
27 मार्च की लारा प्रेस मीटिंग NTPC के लिए सिर्फ सूचना देने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि विश्वास बनाने की परीक्षा भी रही । ऐसे में सभी संबंधित पक्षों के हर सवाल का स्पष्ट जवाब देना ही सबसे बेहतर मार्ग है।
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