कॉमन बाउंड्री लांघी, 3.62 करोड़ की चपत: कोर्ट की सख्ती के आगे झुकी जिंदल पावर, भुगतान के बाद खुला खनन का रास्ता

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़। खनन नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक सख्ती के टकराव के बीच आखिरकार जिंदल पावर लिमिटेड (JPL) को झुकना ही पड़ा। गारे पेलमा 4/2 और 4/3 कोल ब्लॉक में निर्धारित सीमा से बाहर खनन करने के मामले में खनिज विभाग द्वारा लगाए गए 3.62 करोड़ रुपए के भारी-भरकम जुर्माने को कंपनी ने अंततः हाईकोर्ट के निर्देश पर जमा कर दिया। इसके बाद ही बंद पड़ा डिस्पैच दोबारा शुरू हो सका।
यह मामला केवल एक आर्थिक दंड का नहीं, बल्कि खनन अनुशासन, प्रशासनिक दृढ़ता और न्यायिक हस्तक्षेप का भी महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है।
सीमा से बाहर खनन, जांच में खुला खेल
पूरे घटनाक्रम की जड़ में है कॉमन बाउंड्री का उल्लंघन। खनन कार्य हमेशा वैज्ञानिक सर्वे और तय कोऑर्डिनेट्स के आधार पर होता है, जिसे सीएमपीडीआई (CMPDI) जैसी एजेंसियां निर्धारित करती हैं। लेकिन जांच में सामने आया कि जिंदल पावर ने तय सीमाओं को लांघते हुए लगभग डेढ़ हेक्टेयर क्षेत्र में करीब 30 हजार टन कोयला निकाल लिया।
जब नक्शों और केएमएल फाइल्स का मिलान किया गया, तो गड़बड़ी साफ दिखाई दी। इसके बाद राज्य शासन के निर्देश पर खनिज विभाग हरकत में आया और कंपनी से जवाब तलब किया गया।
नोटिस पर अड़ी कंपनी, फिर लगा ब्रेक
27 फरवरी और 18 मार्च को विभाग ने स्पष्ट नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जुर्माना जमा करने को कहा, लेकिन कंपनी टस से मस नहीं हुई। नतीजा यह हुआ कि प्रशासन ने सीधे एक्शन लेते हुए खदान से कोयले का डिस्पैच रोक दिया और ऑनलाइन पोर्टल ब्लॉक कर दिया। इससे ट्रांजिट पास बनना बंद हो गया और पूरी सप्लाई चेन थम गई।
राहत की कोशिशें नाकाम, कोर्ट की शर्त बनी निर्णायक
जुर्माना चुकाने के बजाय कंपनी ने नया सर्वे और रिपोर्ट बनवाकर राहत पाने की कोशिश की। मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा, लेकिन वहां भी राहत सशर्त ही मिली। अदालत ने साफ कहा—पहले पूरा जुर्माना जमा करो, तभी विभागीय आदेशों पर रोक मानी जाएगी।
यह आदेश कंपनी के लिए निर्णायक साबित हुआ। अंततः जेपीएल को 3,62,07,270 रुपए जमा करने पड़े, जिसके बाद ही पोर्टल अनब्लॉक हुआ और खनन गतिविधियां सामान्य हो सकीं।
प्रशासनिक सख्ती: कलेक्टर की भूमिका अहम
इस पूरे घटनाक्रम में कलेक्टर कार्तिकेया गोयल की भूमिका निर्णायक रही। बताया जाता है कि कंपनी ने दबाव बनाने के लिए कई स्तरों पर कोशिशें कीं, लेकिन प्रशासन ने तथ्यों के आधार पर ही निर्णय लिया। कलेक्टर ने दस्तावेजों की बारीकी से जांच के बाद ही कार्रवाई को मंजूरी दी, जिससे पूरे मामले में पारदर्शिता और सख्ती दोनों दिखाई दी।
संदेश साफ: नियमों से समझौता नहीं
यह कार्रवाई केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे खनन क्षेत्र के लिए एक स्पष्ट संदेश है—नियमों से बाहर जाकर काम करने पर चाहे कंपनी कितनी भी बड़ी क्यों न हो, कार्रवाई तय है।
खनन जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सीमाओं का उल्लंघन केवल आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि पर्यावरण और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी असर डालता है। ऐसे में यह मामला आने वाले समय में एक मिसाल के रूप में देखा जाएगा।