रायगढ़ में अब ‘पोस्ता कॉरिडोर’ का पर्दाफाश? 72 घंटे में दूसरा खुलासा, घटगांव बना नया हॉटस्पॉट (देखें वीडियो)

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़ |
छत्तीसगढ़ का रायगढ़ जिला इन दिनों अवैध फसलों की खेती को लेकर एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासों से गुजर रहा है। तमनार के आमाघाट में हुई कार्रवाई को अभी तीन दिन भी पूरे नहीं हुए थे कि अब लैलूंगा विकासखंड के नवीन घटगांव में पोस्ता की अवैध फसल मिलने की खबर ने प्रशासनिक तंत्र को फिर कठघरे में ला खड़ा किया है।
सूत्रों के अनुसार, घटगांव के कम से कम तीन अलग-अलग खेतों में पोस्ता की खेती किए जाने की सूचना सामने आई है। हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह खबर तेजी से फैल चुकी है और गांव में हलचल मची हुई है।
खुलासा नेता के जरिए
इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इस अवैध खेती की भनक पहले भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रवि भगत को लगी।
उन्होंने सोशल मीडिया पर घटगांव में लहलहाती पोस्ता की फसल की जानकारी साझा की, जिसके बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में टीमों को सक्रिय किया गया और मौके की पड़ताल शुरू हुई।

72 घंटे में दूसरा मामला — यह कौन सा संकेत?
पहला मामला: तमनार थाना क्षेत्र के आमाघाट में बड़े पैमाने पर अफीम की खेती का भंडाफोड़
दूसरा मामला: अब लैलूंगा के घटगांव में तीन खेतों में पोस्ता
यानी, महज 72 घंटे के भीतर दूसरा बड़ा मामला सामने आया है।
अगर इन घटनाओं को जोड़कर देखा जाए, तो यह कोई इक्का-दुक्का मामला नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करता है।
यह हफ्ते का दूसरा केस — और कुल मिलाकर?
स्थानीय जानकारों और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर देखा जाए तो:
इस सप्ताह: 2 बड़े मामले (तमनार + घटगांव)
यानी यह साफ संकेत है कि छत्तीसगढ़, खासकर रायगढ़ बेल्ट में अवैध मादक खेती धीरे-धीरे जड़ें जमा रही है।
इंटेलिजेंस फेलियर या मिलीभगत?
लगातार सामने आ रहे मामलों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
क्या स्थानीय स्तर पर पटवारी अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल हो रहे हैं?
क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर किसी स्तर पर मिलीभगत भी संभव है?
इतने बड़े पैमाने पर खेती होने के बावजूद प्रशासन को भनक क्यों नहीं लगती?
ग्रामीणों के बीच भी यह चर्चा तेज है कि “अगर नेता सोशल मीडिया पर पोस्ट न करते, तो क्या यह मामला भी दबा रह जाता?”
‘काला सोना’ बनती जमीन
अफीम/पोस्ता की खेती को स्थानीय भाषा में अब ‘काला सोना’ कहा जाने लगा है—कम लागत में ज्यादा मुनाफा।
इसी लालच में कुछ किसान या बाहरी नेटवर्क ग्रामीण इलाकों को टारगेट कर रहे हैं, जहां निगरानी अपेक्षाकृत कमजोर होती है।

प्रशासन की चुनौती
अब प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है:
1. तत्काल कार्रवाई कर अवैध फसल को नष्ट करना
2. इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचकर मुख्य सरगनाओं का पर्दाफाश करना
अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो रायगढ़ जिला अवैध मादक खेती का बड़ा केंद्र बन सकता है।
तमनार से घटगांव तक फैली यह कहानी महज अवैध खेती की नहीं, बल्कि प्रशासनिक चूक, खुफिया तंत्र की कमजोरी और तेजी से पनपते एक खतरनाक नेटवर्क की है।
अब देखना यह होगा कि यह मामला भी सिर्फ कार्रवाई की खानापूर्ति बनकर रह जाता है या फिर सच में इस ‘कॉरिडोर’ की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश होती है।
अपडेट – सूचना मिलते ही प्रशासन एवं पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और जांच के दौरान किसान साध राम नाथ के खेत में लगभग 11×22 वर्ग फीट क्षेत्र में अवैध खेती पाई गई, जिसे जब्त कर लिया गया।
इसके अतिरिक्त, ग्राम के ही एक अन्य व्यक्ति अभिमन्यु नागवंशी के घर में अवैध सूखी फसल रखे होने की जानकारी मिली। टीम के पहुंचने पर आरोपी द्वारा साक्ष्य नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा था, जिसे समय रहते रोकते हुए फसल को जब्त किया गया।
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