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CSR फंड का झांसा… NGO कार्यकर्ता का बैंक खाता बना 2.17 करोड़ के साइबर फ्रॉड का रास्ता, रायगढ़ पुलिस ने पकड़ा अंतरराज्यीय गिरोह

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com

रायगढ़।
समाज सेवा के लिए फंड दिलाने का सपना… भरोसे का रिश्ता… और फिर उसी भरोसे से खुला बैंक खाता। लेकिन किसी को अंदाजा भी नहीं था कि यही खाता कुछ ही दिनों में देशभर के साइबर फ्रॉड का रास्ता बन जाएगा।

रायगढ़ की एक महिला NGO कार्यकर्ता के साथ हुई इस हैरान कर देने वाली घटना ने यह साबित कर दिया कि साइबर ठग अब कितनी चालाकी से लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। CSR फंड दिलाने का झांसा देकर ठगों ने महिला को अपने भरोसे में लिया, गुवाहाटी तक बुलाया और उसके बैंक खाते से करीब 2.17 करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांजेक्शन करा दिए।

मामला सामने आते ही रायगढ़ साइबर पुलिस ने तेज कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड से जुड़े पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जांच में यह भी सामने आया कि इस खाते से देशभर में 44 साइबर फ्रॉड शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं।

CSR फंड का लालच और भरोसे की शुरुआत

इंदिरानगर रायगढ़ निवासी आयशा परवीन एक सामाजिक संस्था से जुड़ी हुई हैं। दिसंबर 2025 में उनके भांजे ने उनकी मुलाकात अभय यादव और विजय चंद्रा से कराई। दोनों ने बताया कि एक बड़ी कंपनी CSR के तहत सामाजिक कार्यों के लिए फंड देना चाहती है।

महिला को यह मौका सही लगा। आरोपियों ने संस्था के दस्तावेज लिए और कहा कि फंड ट्रांसफर के लिए संस्था के नाम से बैंक खाता खुलवाना पड़ेगा। महिला ने भरोसा करते हुए एक्सिस बैंक में कॉरपोरेट खाता खुलवा दिया।

बैंक खाते पर कब्जे की चाल

खाता खुलते ही आरोपियों ने ऑनलाइन बैंकिंग की प्रक्रिया खुद पूरी कर दी। बताया गया कि कंपनी के अधिकारियों को खाते की जांच करनी होगी। भरोसा जीतने के लिए आरोपियों ने 10 रुपये ट्रांसफर कर टेस्ट भी किया।

इसके बाद महिला को बताया गया कि फंड की प्रक्रिया पूरी करने के लिए उसे गुवाहाटी जाना पड़ेगा। फ्लाइट टिकट और होटल की व्यवस्था भी आरोपियों ने ही कर दी।

गुवाहाटी के होटल में हुआ असली खेल

गुवाहाटी पहुंचने के बाद होटल में दो अज्ञात व्यक्ति आए और खुद को कंपनी का प्रतिनिधि बताया। उन्होंने महिला के मोबाइल में एक APK फाइल डाउनलोड कराई और कहा कि इससे बैंक खाते का वेरिफिकेशन होगा।

इसके बाद कई दिनों तक महिला और उसके पति को वहीं रुकवाया गया। इस दौरान आरोपियों ने महिला का मोबाइल, चेकबुक और बैंक से जुड़ी जानकारी अपने कब्जे में रख ली और खाते से लगातार ट्रांजेक्शन होते रहे।

करीब एक सप्ताह बाद महिला को वापस रायगढ़ भेज दिया गया।


बैंक कॉल से खुला बड़ा फ्रॉड

रायगढ़ लौटने के कुछ दिन बाद बैंक से फोन आया कि खाते में संदिग्ध लेनदेन हो रहे हैं। इसके बाद देश के अलग-अलग राज्यों से मेल आने लगे कि उनके खाते में साइबर फ्रॉड से जुड़ी रकम ट्रांसफर हुई है।

जब महिला ने विजय चंद्रा से संपर्क किया तो उसने बैंक की गलती बताकर मामला टाल दिया, लेकिन कुछ ही दिनों में उसका फोन बंद हो गया और वह गायब हो गया।


साइबर थाना में शिकायत और बड़ा खुलासा

12 मार्च 2026 को महिला ने रायगढ़ साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने BNS की धारा 318(4) और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

जांच में सामने आया कि आरोपी टेलीग्राम के जरिए संचालित अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े थे। उनका काम ऐसे बैंक खाते उपलब्ध कराना था जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी के पैसों के ट्रांजेक्शन के लिए किया जाता था।



5 से 15 प्रतिशत कमीशन पर चलता था खेल

पुलिस पूछताछ में पता चला कि आरोपी अलग-अलग राज्यों में सक्रिय साइबर फ्रॉड गैंग को बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। इसके बदले उन्हें फ्रॉड से मिली रकम का 5 से 15 प्रतिशत तक कमीशन मिलता था।

आरोपियों ने अब तक 25 से 30 बैंक खाते इस तरह उपलब्ध कराने की बात भी स्वीकार की है।


रायगढ़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई

रायगढ़ साइबर पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है —

मितेश सोनी (31 वर्ष), वसुंधरा नगर भिलाई-3, जिला दुर्ग

विजय चंद्रा (35 वर्ष), ग्राम कटौत, थाना डभरा, जिला सक्ती

अजय साहू (35 वर्ष), ढिमरापुर चौक, थाना कोतवाली रायगढ़

अभय यादव (23 वर्ष), कौहवाकुंडा पहाड़ मंदिर, थाना चक्रधरनगर

सचिन चौहान (24 वर्ष), कलमीडिपा, थाना चक्रधरनगर


पुलिस ने इनके कब्जे से 6 मोबाइल फोन और 1 लैपटॉप जब्त किया है।


देशभर से 44 साइबर फ्रॉड शिकायतें

साइबर समन्वय पोर्टल की जांच में सामने आया कि महिला के खाते से जुड़े 44 साइबर फ्रॉड केस देश के अलग-अलग राज्यों में दर्ज हैं, जिनमें करोड़ों रुपये के विवादित ट्रांजेक्शन का उल्लेख है।


इन पुलिस अधिकारियों ने सुलझाया मामला

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में यह पूरी कार्रवाई की गई।

एडिशनल एसपी अनिल सोनी और एडिशनल एसपी (साइबर) अनिल विश्वकर्मा के मार्गदर्शन में साइबर थाना टीम ने आरोपियों को गिरफ्तार किया।

पूरी कार्रवाई में
निरीक्षक विजय चेलक (थाना प्रभारी साइबर),
सहायक उप निरीक्षक नंद कुमार सारथी,
एएसआई ज्योत्सना शर्मा,
प्रधान आरक्षक करूनेश राय, बृजलाल गुर्जर, राजेश पटेल, दुर्गेश सिंह, रेणु सिंह मंडावी, रूपराम पटेल,
आरक्षक प्रशांत पंडा, महेश पंडा, रविन्द्र गुप्ता, पुष्पेन्द्र जाटवर, सुरेश सिदार, नवीन शुक्ला, धनंजय कश्यप, विक्रम सिंह, विकास प्रधान, प्रताप बेहरा, रोशन एक्का तथा महिला आरक्षक मेनका चौहान की अहम भूमिका रही।


एसएसपी का संदेश

एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि रायगढ़ पुलिस साइबर फ्रॉड करने वाले गिरोहों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक, ऐप या लालच देने वाले ऑफर से सावधान रहें और संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।

Amar Chouhan

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