रायगढ़ की शिक्षिका दीपा चौहान का राष्ट्रीय स्तर पर परचम, नवाचार और समर्पण के दम पर दो-दो बड़े सम्मान हासिल

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com

रायगढ़।
जिले के शिक्षा जगत के लिए गर्व का विषय है कि ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत एक शिक्षिका ने अपने नवाचारी शिक्षण और सामाजिक सरोकारों के माध्यम से राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर पहचान बनाई है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तिलगा (रामगढ़) में पदस्थ व्याख्याता (जीवविज्ञान) श्रीमती दीपा चौहान को हाल ही में दो प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है, जो न केवल उनके व्यक्तिगत योगदान को दर्शाता है बल्कि रायगढ़ जिले की शैक्षणिक गुणवत्ता को भी नई पहचान दिलाता है।
जानकारी के अनुसार, “अंजोर भारत” छत्तीसगढ़ द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर की चयन प्रक्रिया में देशभर से लगभग 1500 शिक्षकों के बीच नवाचार आधारित शिक्षण कार्यों का मूल्यांकन किया गया। इसमें चयनित 200 उत्कृष्ट शिक्षकों में दीपा चौहान का नाम भी शामिल रहा। उन्हें स्वर्गीय हरिवंश मिश्र राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान समारोह रामगढ़ में आयोजित हुआ, जहां मुख्य अतिथि के रूप में भारत सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय से जुड़े स्वतंत्र निदेशक जगन्नाथ प्राणिग्रही सहित राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्णानंद मिश्रा एवं अन्य शिक्षाविदों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
इसके साथ ही, 26 सितंबर को नवा रायपुर स्थित कलिंगा यूनिवर्सिटी में आयोजित भव्य समारोह में दीपा चौहान को “एजुकेशन स्कल्प्टर अवार्ड-2026” से भी सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उन्हें छत्तीसगढ़ शासन शिक्षा आयोग के अध्यक्ष सुधीर गौतम एवं यूनिवर्सिटी के कुल सचिव डॉ. संदीप गांधी द्वारा प्रदान किया गया।
सिर्फ पढ़ाई नहीं, समाज से जोड़ने का प्रयास
दीपा चौहान का शिक्षण दृष्टिकोण पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़कर विद्यार्थियों के समग्र विकास पर केंद्रित है। उन्होंने शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसमें संस्कार, नवाचार, पर्यावरण जागरूकता और सामाजिक सहभागिता को भी शामिल किया। ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों के बीच उनके प्रयासों से न केवल शैक्षणिक स्तर में सुधार हुआ, बल्कि उनमें आत्मविश्वास और जागरूक नागरिक बनने की भावना भी विकसित हुई।
जिले के लिए प्रेरणा बनी उपलब्धि
एक ही माह में राष्ट्रीय और राज्य स्तर के दो बड़े सम्मान प्राप्त करना इस बात का प्रमाण है कि यदि शिक्षक अपने दायित्व को मिशन के रूप में लें, तो सीमित संसाधनों में भी उत्कृष्ट परिणाम संभव हैं। दीपा चौहान की यह उपलब्धि न केवल अन्य शिक्षकों के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि रायगढ़ का ग्रामीण क्षेत्र भी प्रतिभा और नवाचार के मामले में किसी से कम नहीं है।
शिक्षा विभाग और स्थानीय नागरिकों ने उनकी इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे जिले के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया है।
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