हमीरपुर सड़क परियोजना पर उठे सवाल: भू-अर्जन मुआवजे और रिकॉर्ड की त्रुटियों को लेकर जनसुनवाई में किसानों का विरोध

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
हमीरपुर, 28 जनवरी 2026।
हुंकरा डीपा चौराहा से धौरा भांठा हमीरपुर मार्ग तक प्रस्तावित सड़क निर्माण कार्य के लिए भू-अर्जन, पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन की सामाजिक समाघात निर्धारण प्रक्रिया के तहत बुधवार को ग्राम पंचायत हमीरपुर में जनसुनवाई का आयोजन किया गया। यह जनसुनवाई माननीय कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी द्वारा 29 दिसंबर 2025 को जारी आदेश के अनुपालन में आयोजित की गई।
जनसुनवाई के दौरान गठित निरीक्षण दल में सहायक प्राध्यापक श्रीमती चंद्रकांती साव (भवर सिंह पोर्ते महाविद्यालय, चुहकीमार-भेंडरा, घरघोड़ा), जनपद सदस्य तमनार श्री ओमप्रकाश बेहरा, ग्राम पंचायत हमीरपुर के सरपंच श्री अक्षय परजा, परियोजना सर्वे संभाग रायगढ़ से श्री एस.एल. नायक, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग रायगढ़ के उप संभाग अभियंता श्री तीज राम राठिया, पटवारी श्रीमती पुनिमती खड़िया सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में प्रभावित किसान भी उपस्थित रहे।
अधिकारियों द्वारा जनसुनवाई में प्रभावित किसानों को उनके पट्टा, खसरा नंबर और रकबा से संबंधित जानकारी दी गई। प्रस्तुत विवरण के अनुसार सड़क परियोजना के अंतर्गत कुल 23 खसरों के 20 परिवारों की लगभग 1.279 हेक्टेयर भूमि प्रभावित होना दर्शाया गया। परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 90 लाख 48 हजार 224 रुपये बताई गई, जबकि कुल सड़क लंबाई लगभग 14.40 किलोमीटर है, जिसमें हुंकरा डीपा चौक से धौरा भांठा हमीरपुर मार्ग तक का हिस्सा शामिल है। इस दौरान भूमि मुआवजा निर्धारण को लेकर चर्चा की गई और कुछ किसानों ने वर्तमान दर पर मुआवजा भुगतान की मांग रखी।
हालांकि जनसुनवाई के दौरान विरोध के स्वर भी उभरे। हमीरपुर के कृषक श्री आशीष मिश्रा ने प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए जनसुनवाई का विरोध किया। उन्होंने कहा कि राजस्व अभिलेखों में जमीन के सही स्वामित्व और नामों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। उनका आरोप था कि भूमि की सही नाप अब तक नहीं कराई गई है और नए नियमों के अनुसार मुआवजा राशि तय नहीं की जा रही। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि गांव में बुनियादी सर्वे कार्य अधूरा है और सभी प्रभावित किसानों को आज तक लिखित सूचना तक नहीं दी गई। उन्होंने मांग की कि सभी किसानों की बात सुनी जाए, अन्यथा ऐसी जनसुनवाई का कोई औचित्य नहीं है।
विरोध के बीच अधिकारियों ने किसानों की आपत्तियां दर्ज करते हुए आश्वासन दिया कि सभी बिंदुओं पर परीक्षण कर उचित समाधान किया जाएगा। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि जिस सड़क का निर्माण किया गया है, उसका उद्देश्य आम नागरिकों की सुगम आवाजाही के साथ-साथ कोयला परिवहन को भी व्यवस्थित करना है।
जनसुनवाई में सामाजिक कार्यकर्ता श्री हरिराम गुप्ता ने एक अलग लेकिन गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि हमीरपुर से रायगढ़ तक लगभग 26 किलोमीटर लंबी सड़क, जो वर्ष 2017 में निर्मित हुई थी, उसकी आज तक समुचित मरम्मत नहीं कराई गई है। खराब सड़क की वजह से आए दिन दोपहिया वाहन चालकों की दुर्घटनाएं हो रही हैं और कई लोगों की असमय मृत्यु तक हो चुकी है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि नई परियोजनाओं के साथ-साथ पुरानी सड़कों की मरम्मत पर भी तत्काल ध्यान दिया जाए।
जनसुनवाई का समापन इस आश्वासन के साथ हुआ कि प्रभावित किसानों की आपत्तियों, मुआवजा निर्धारण और सड़क सुरक्षा से जुड़े सभी मुद्दों पर संबंधित विभाग गंभीरता से विचार करेगा और आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।
News associate Hariram gupta



