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पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से किसानों की बढ़ी चिंता, रायगढ़ के 256 पटवारी आंदोलन में शामिल; फसल सत्यापन से जमीन के काम तक अटकने का अंदेशा

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PV ऐप की खामियों, वेतन विसंगति और विभागीय कार्रवाई के विरोध में प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू; राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हो सकते हैं किसान, प्रशासनिक वैकल्पिक व्यवस्था पर टिकी निगाहें

रायगढ़। खेती-किसानी के कामकाज के बीच पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेशव्यापी आंदोलन के तहत 13 अक्टूबर 2026 से शुरू हुई हड़ताल में रायगढ़ जिले के 256 पटवारी भी शामिल बताए गए हैं। पटवारी राजस्व व्यवस्था की जमीनी कड़ी माने जाते हैं। खेतों में फसल की स्थिति दर्ज करने से लेकर जमीन के रिकॉर्ड, नामांतरण और विभिन्न प्रमाण पत्रों के लिए प्रतिवेदन तैयार करने तक उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में हड़ताल लंबी खिंचने पर इसका असर केवल सरकारी दफ्तरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन किसानों और ग्रामीण परिवारों को भी परेशानी हो सकती है, जिनके जरूरी काम राजस्व अभिलेखों पर निर्भर हैं।

पटवारी संघ ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन शुरू किया है। इसमें फसल सत्यापन के लिए इस्तेमाल किए जा रहे PV ऐप की तकनीकी और व्यावहारिक दिक्कतों का समाधान, वेतन विसंगति दूर करना, पदोन्नति का लाभ और ऐप से जुड़े मामलों में पटवारियों के विरुद्ध की गई निलंबन, तबादला सहित अन्य विभागीय कार्रवाइयों को लेकर आपत्ति शामिल है। संघ की मांगों और प्रशासन के रुख के बीच आगे क्या रास्ता निकलता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल किसानों की नजर इस बात पर है कि उनकी खेती और जमीन से जुड़े जरूरी काम कितनी जल्दी निपट पाएंगे।

फसल सत्यापन से लेकर जमीन के रिकॉर्ड तक, किसानों के सामने क्या हो सकती है परेशानी?

रायगढ़ जिले में बड़ी संख्या में किसान खरीफ की फसल और उससे जुड़े राजस्व कार्यों के लिए पटवारी व्यवस्था पर निर्भर रहते हैं। फसल की वास्तविक स्थिति का सत्यापन, गिरदावरी में दर्ज जानकारी, किसान पंजीयन से संबंधित प्रक्रियाएं तथा जमीन के अभिलेखों में सुधार जैसे कामों में पटवारी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

यदि हड़ताल के कारण इन कार्यों का नियमित निष्पादन प्रभावित होता है, तो किसानों को अपने दस्तावेजों के सत्यापन और संबंधित प्रक्रियाओं के लिए अधिक समय तक इंतजार करना पड़ सकता है। विशेष रूप से उन किसानों की परेशानी बढ़ सकती है, जिनके रिकॉर्ड में त्रुटियां हैं, जिनकी जमीन से संबंधित प्रक्रिया लंबित है या जिन्हें समय-सीमा के भीतर आवश्यक दस्तावेज पूरे करने हैं।

खेती के काम में समय का अपना महत्व है। फसल से जुड़ी जानकारी दर्ज कराने या जमीन के दस्तावेज दुरुस्त कराने में देरी होने पर किसान को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। हालांकि, हड़ताल से कितने काम वास्तव में प्रभावित होंगे और कितनी देरी होगी, यह संबंधित राजस्व कार्यालयों में उपलब्ध वैकल्पिक व्यवस्था तथा प्रशासन के निर्देशों पर निर्भर करेगा।

PV ऐप को लेकर विवाद, तकनीकी परेशानी से विभागीय कार्रवाई तक पहुंचा मामला

पटवारियों के आंदोलन में PV ऐप प्रमुख मुद्दों में शामिल है। फसलों के भौतिक सत्यापन के लिए इस्तेमाल होने वाले इस ऐप के माध्यम से काम करने में आ रही तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं के समाधान की मांग संघ कर रहा है।

संघ की आपत्ति केवल ऐप की कार्यप्रणाली तक सीमित नहीं बताई जा रही है। ऐप से संबंधित विवाद के दौरान पटवारियों के विरुद्ध हुई निलंबन, तबादला और अन्य विभागीय कार्रवाइयों को लेकर भी विरोध सामने आया है। पटवारी पक्ष चाहता है कि तकनीकी समस्याओं का व्यावहारिक समाधान निकाला जाए और संबंधित मामलों में उनकी शिकायतों पर विचार किया जाए।

डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी कामकाज को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है। लेकिन किसी तकनीकी प्रणाली के क्रियान्वयन में यदि मैदानी स्तर पर कठिनाइयां आती हैं, तो उनका समाधान भी जरूरी है। इस मामले में तकनीकी समस्याओं की वास्तविक प्रकृति, विभाग की ओर से अब तक किए गए सुधार और संघ की मांगों पर प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने से स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

वेतन विसंगति और पदोन्नति भी आंदोलन के प्रमुख मुद्दे

PV ऐप के अलावा वेतन विसंगति दूर करने और पदोन्नति का लाभ देने की मांग भी पटवारी संघ के आंदोलन का हिस्सा है। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी सेवा से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। इन मांगों पर शासन स्तर पर क्या निर्णय लिया जाता है, यह आंदोलन की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।

दूसरी ओर, हड़ताल का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कर्मचारियों की सेवा संबंधी मांगों और नागरिकों को मिलने वाली राजस्व सेवाओं के बीच संतुलन बनाना प्रशासन के सामने चुनौती होगी। यदि बातचीत के जरिए कोई समाधान निकलता है, तो इससे कर्मचारियों की मांगों पर विचार करने के साथ-साथ आम लोगों की परेशानी कम करने का रास्ता भी खुल सकता है।

रायगढ़ के किसानों के लिए प्रशासनिक व्यवस्था सबसे अहम सवाल

रायगढ़ जिले में 256 पटवारियों के आंदोलन में शामिल होने की खबर के बीच अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि लंबित राजस्व कार्यों के निपटारे के लिए जिला प्रशासन क्या व्यवस्था करता है। किसानों को फसल सत्यापन, गिरदावरी, जमीन संबंधी अभिलेखों में सुधार और प्रमाण पत्रों के लिए आवश्यक प्रतिवेदन जैसे कार्यों के सिलसिले में अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और वैकल्पिक व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है।

प्रशासन के लिए यह भी जरूरी होगा कि आम नागरिकों को बताया जाए कि हड़ताल की अवधि में उनके जरूरी आवेदन कहां जमा होंगे, किन सेवाओं के लिए वैकल्पिक अधिकारी या कर्मचारी उपलब्ध रहेंगे और समय-सीमा वाले मामलों का निपटारा किस तरह किया जाएगा। इससे किसानों को बार-बार कार्यालय पहुंचने और अपने काम की स्थिति जानने के लिए भटकने से राहत मिल सकती है।

हालांकि, जिले में किन-किन सेवाओं पर वास्तविक रूप से रोक या देरी आई है, कितने आवेदन लंबित हैं और प्रशासन ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था लागू की है या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। फिलहाल हड़ताल के कारण संभावित परेशानी को वास्तविक रूप से प्रभावित सेवाओं और प्रशासनिक निर्णयों से अलग करके देखना जरूरी है।

आंदोलन का समाधान निकला तो किसानों को मिलेगी राहत

पटवारी राजस्व प्रशासन और ग्रामीण जनता के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उनकी मांगों पर संवाद के माध्यम से समाधान निकालना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी किसानों के दैनिक कामकाज को प्रभावित होने से बचाना भी है। अनिश्चितकालीन हड़ताल लंबी चलती है तो लंबित आवेदनों और समयबद्ध प्रक्रियाओं का दबाव बढ़ सकता है।

ऐसे में निगाहें इस बात पर रहेंगी कि पटवारी संघ और शासन के बीच बातचीत कब आगे बढ़ती है, मांगों पर क्या निर्णय होता है और रायगढ़ जिला प्रशासन किसानों की सुविधा के लिए क्या कदम उठाता है। कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान और आम नागरिकों को समय पर राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराना—दोनों ही प्रशासनिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं।

फिलहाल रायगढ़ के किसानों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनकी फसल और जमीन से जुड़े जरूरी काम समय पर पूरे हो पाएंगे या उन्हें हड़ताल समाप्त होने तक इंतजार करना पड़ेगा। इसका वास्तविक जवाब प्रशासन की आगामी कार्रवाई और आंदोलन की अवधि से ही स्पष्ट होगा।

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Amar Chouhan

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