“दस दिनों में उजड़ गया आसरा: तहसीलदार मनोज कुमार गुप्ता ने खोए माता-पिता, घरघोड़ा शोक में डूबा”

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
घरघोड़ा। कभी-कभी जिंदगी ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देती है, जहां शब्द भी साथ छोड़ देते हैं। घरघोड़ा के तहसीलदार मनोज कुमार गुप्ता के परिवार पर बीते दस दिनों में जो वज्रपात हुआ, उसने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है।
सोमवार को उनकी माता सावित्री गुप्ता के आकस्मिक निधन की खबर जैसे ही फैली, प्रशासनिक गलियारों से लेकर आमजन तक हर कोई गहरे दुख में डूब गया। यह दुख इसलिए और भी असहनीय हो गया क्योंकि अभी परिवार 16 मई 2026 को हुए उनके पिता कृष्ण गोपाल गुप्ता के निधन के सदमे से उबर भी नहीं पाया था। महज दस दिनों के भीतर माता-पिता दोनों का साया उठ जाना किसी भी परिवार के लिए असहनीय त्रासदी है।
परिजनों के अनुसार, दोनों ही पिछले करीब दो महीनों से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। इलाज के हर संभव प्रयास किए गए, लेकिन नियति के आगे मानव प्रयास बेबस साबित हुए। एक ऐसा परिवार, जो कुछ समय पहले तक नाती-पोतों की किलकारियों से गूंजता था, आज गहरे सन्नाटे में डूबा हुआ है।
तहसीलदार मनोज कुमार गुप्ता, जो प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच हमेशा संयम और संवेदनशीलता के लिए जाने जाते हैं, इस निजी शोक की घड़ी में पूरी तरह टूटे नजर आ रहे हैं। उनके करीबी बताते हैं कि माता-पिता दोनों से उनका गहरा भावनात्मक जुड़ाव था, और इस तरह अचानक दोनों का साथ छूट जाना उन्हें भीतर तक झकझोर गया है।
इस हृदयविदारक घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रवासियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। हर कोई इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है।
घरघोड़ा ही नहीं, पूरे रायगढ़ जिले में यह खबर शोक की लहर बनकर फैल गई है—एक ऐसा दुख, जिसने हर संवेदनशील मन को भीतर तक छू लिया है।
(संवेदना)
ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करे और शोकाकुल परिवार को इस असीम दुख को सहने की शक्ति दे।
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