त्योहारों में हवाई सफर बना महंगा सौदा, रायपुर से पुणे का किराया ₹20 हजार के करीब; दिल्ली-मुंबई की उड़ानें भी महंगी

दीपावली से पहले बढ़ी टिकटों की कीमतों ने यात्रियों का बजट बिगाड़ा, सामान्य दिनों के मुकाबले कई मार्गों पर दो से तीन गुना तक अधिक किराया | डायनेमिक प्राइसिंग पर सवाल, यात्रियों को राहत देने की मांग
रायपुर। त्योहारों पर घर लौटने की खुशी अब हवाई यात्रियों की जेब पर भारी पड़ रही है। नवरात्र और दशहरा के बाद दीपावली के दौरान अपने परिवार के बीच पहुंचने की तैयारी कर रहे लोगों को विमान टिकटों के लिए सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक रकम खर्च करनी पड़ सकती है। रायपुर से पुणे जाने का हवाई किराया 19 हजार रुपये के पार पहुंचने की जानकारी सामने आई है। वहीं दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और हैदराबाद जैसे प्रमुख शहरों के लिए भी टिकटों की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
18 अक्टूबर को प्रकाशित जानकारी के अनुसार, 1 से 6 नवंबर के बीच यात्रा के लिए रायपुर से पुणे का किराया लगभग 19,488 से 20,000 रुपये तक बताया गया है। सामान्य दिनों में इसी मार्ग पर टिकट करीब 6,500 से 7,500 रुपये में उपलब्ध होने का उल्लेख है। इस अंतर ने त्योहारों के दौरान हवाई यात्रा की किफायत और किराया निर्धारण की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुणे के लिए किराया सबसे ज्यादा, दूसरे मार्ग भी महंगे
त्योहारी सीजन में रायपुर से विभिन्न शहरों के लिए बताए गए हवाई किराये की तुलना सामान्य दिनों के किराये से करने पर यात्रियों पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ का अंदाजा लगाया जा सकता है।
गंतव्य शहर| 1–6 नवंबर के लिए बताया गया किराया| सामान्य दिनों का किराया
पुणे| ₹19,488–20,000| ₹6,500–7,500
दिल्ली| ₹9,327–12,000| ₹5,500–6,500
मुंबई| ₹14,356–15,500| ₹5,500–6,500
कोलकाता| ₹13,642–14,000| ₹5,200–6,000
हैदराबाद| ₹11,000–13,000| ₹4,500–6,200
नोट: ये आंकड़े प्रकाशित रिपोर्ट में दिए गए किराये पर आधारित हैं। वास्तविक कीमत यात्रा की तारीख, उड़ान, उपलब्ध सीटों, बुकिंग के समय और टिकट की शर्तों के अनुसार अलग हो सकती है।
आंकड़ों के मुताबिक, पुणे मार्ग पर सामान्य किराये की तुलना में टिकट की कीमत लगभग तीन गुना तक पहुंच रही है। मुंबई और कोलकाता के लिए भी यात्रियों को सामान्य दिनों के मुकाबले काफी अधिक भुगतान करना पड़ सकता है। दिल्ली और हैदराबाद के मार्गों पर भी कीमतों में अंतर दिखाई देता है।
आखिर क्यों बढ़ जाते हैं हवाई टिकटों के दाम?
विमानन कंपनियां आम तौर पर डायनेमिक प्राइसिंग के तहत टिकटों की कीमत तय करती हैं। इस व्यवस्था में यात्रियों की मांग, उड़ान में बची सीटों और बुकिंग की स्थिति के अनुसार किराया बदल सकता है। त्योहारों, छुट्टियों और व्यावसायिक यात्राओं के दौरान मांग बढ़ने पर कम कीमत वाली श्रेणी के टिकट जल्दी समाप्त हो सकते हैं। इसके बाद यात्रियों को अधिक कीमत वाले टिकट खरीदने पड़ते हैं।
हालांकि, यात्रियों की परेशानी केवल किराये में बढ़ोतरी तक सीमित नहीं है। टिकट बुक करने के बाद यात्रा की तारीख बदलने या टिकट रद्द करने की स्थिति में भी अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है। प्रकाशित रिपोर्ट में कैंसिलेशन शुल्क 3,000 से 4,500 रुपये तक बताए गए हैं। हालांकि, यह शुल्क सभी एयरलाइंस और टिकट श्रेणियों के लिए एक समान नहीं होता। इसकी वास्तविक राशि संबंधित कंपनी की शर्तों पर निर्भर करती है।
ईंधन पर कम वैट, फिर भी यात्रियों को राहत क्यों नहीं?
रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ में विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) पर वैट की दर चार प्रतिशत होने का उल्लेख किया गया है। कम वैट से विमानन कंपनियों की ईंधन लागत को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि टिकटों का किराया भी उसी अनुपात में कम होगा।
हवाई टिकट की अंतिम कीमत पर ईंधन के अलावा परिचालन खर्च, विमान की उपलब्धता, मार्ग पर प्रतिस्पर्धा, हवाई अड्डे से जुड़े शुल्क और यात्रियों की मांग जैसे कई कारकों का असर पड़ता है। इसलिए केवल कम वैट के आधार पर टिकटों की कीमत कम रहने की गारंटी नहीं दी जा सकती। फिर भी, जब स्थानीय स्तर पर ईंधन लागत में राहत की बात सामने आती है, तो यात्रियों के लिए हवाई सफर की वास्तविक लागत पर चर्चा होना स्वाभाविक है।
कारोबार और आपात यात्रा करने वालों पर ज्यादा असर
कैट के प्रदेश उपाध्यक्ष विमल बाफना के मुताबिक, लंबी दूरी की आपात यात्राओं के लिए विमान सेवा एक महत्वपूर्ण विकल्प है, लेकिन त्योहारों के दौरान बढ़ते किराये के कारण यात्रियों को परेशानी होती है। उन्होंने किराये में होने वाली बढ़ोतरी पर अंकुश लगाने की जरूरत बताई।
सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर अमर सिंह पंडेल ने भी त्योहारों के दौरान कॉर्पोरेट और व्यावसायिक यात्राओं की मांग को किराये में वृद्धि का एक कारण बताया। अधिक मांग के चलते कम कीमत वाले टिकट पहले बिक जाते हैं और बाद में उपलब्ध टिकट अपेक्षाकृत महंगे रह जाते हैं।
इन परिस्थितियों का असर उन यात्रियों पर अधिक पड़ सकता है, जिन्हें किसी जरूरी काम, पारिवारिक आयोजन या आपात स्थिति के कारण निर्धारित तारीख पर ही यात्रा करनी होती है। ऐसे यात्रियों के पास सस्ती तारीख चुनने या यात्रा टालने का विकल्प सीमित रहता है।
किराया निर्धारण में पारदर्शिता की जरूरत
त्योहारों के दौरान हवाई यात्रा की मांग बढ़ना सामान्य व्यावसायिक स्थिति है, लेकिन यात्रियों के लिए किराये की जानकारी स्पष्ट होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। टिकट बुकिंग के समय अंतिम देय राशि, बदलाव और रद्दीकरण की शर्तों तथा लागू शुल्कों की जानकारी आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए।
रायपुर से विभिन्न शहरों के लिए सामने आए किराये ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि त्योहारों के दौरान हवाई यात्रा आम यात्रियों के बजट में कैसे बनी रहे। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों से किसी विमानन कंपनी द्वारा नियमों का उल्लंघन या मनमाना किराया वसूले जाने का निष्कर्ष अपने आप नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए संबंधित उड़ानों की वास्तविक कीमतों, किराया श्रेणियों और लागू नियमों की जांच जरूरी होगी।
फिलहाल, दीपावली के आसपास यात्रा करने वालों के लिए टिकट बुक करने से पहले अलग-अलग उड़ानों और तारीखों का किराया देखना, कुल भुगतान की तुलना करना और रद्दीकरण की शर्तें पढ़ना उपयोगी रहेगा। वहीं, यात्रियों की अपेक्षा है कि व्यस्त सीजन में किराये की पारदर्शिता और उचित विकल्पों को लेकर संबंधित विमानन कंपनियां तथा नियामक संस्थाएं प्रभावी कदम उठाएं।
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